भारत की सारी समस्याओं और संकटों का समाधान जैन दर्शन के अनेकांतवाद में - अपनी माटी 'ISSN 2322-0724 Apni Maati'

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भारत की सारी समस्याओं और संकटों का समाधान जैन दर्शन के अनेकांतवाद में



भारत की सारी समस्याओं और संकटों का समाधान जैन दर्शन के अनेकांतवाद व पं. दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद में समाहित है। उक्त विचार वक्ता प्रो. अजहर हाशमी ने अखिल भारतीय साहित्य परिषद द्वारा आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में रविवार को व्यक्त किए। संगोष्ठी का उद्घाटन प्रो. अजहर हाशमी, सीए आईएम सेठिया, डॉ. मथुरेशनंदन कुलश्रेष्ठ, ममता शारदा, श्यामसुंदर अग्रवाल व एबी सिंह ने दीप जलाकर किया।

 डॉ. राजेंद्र सिंघवी ने जैन दर्शन व एकात्म मानववाद में अंत: संबंध स्थापित किया। प्रो. डॉ. कमल नाहर ने निज वक्तव्य देकर साहित्यिक चर्चा शुरू की। परिषद के प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. मथुरेशनंदन कुलश्रेष्ठ ने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के प्रचार द्वारा भारत की विविधता व अनेकता को एकता व अखंडता के सूत्र में बांधने का आह्वान किया। आईएम सेठिया ने जैन दर्शन को व्यवहार में उतारने पर बल दिया। चेयरपर्सन ममता शारदा ने परिषद की गतिविधियों को नगर की सांस्कृतिक एकता के लिए आवश्यक माना। उपाध्यक्ष श्यामसुंदर अग्रवाल ने साहित्य को समाज का अंग बताया। संगोष्ठी में स्थानीय इकाई द्वारा प्रकाशित पुस्तक जैन दर्शन व एकात्म मानववाद का विमोचन किया।

इस दौरान श्रेष्ठ साहित्य सृजन व राष्ट्रीय एकता के प्रचार प्रसार में योगदान के लिए साहित्य परिषद द्वारा प्रो. अजहर हाशमी, डॉ. राजेंद्रकुमार सिंघवी, अरुण कंठालिया व कवि शांति तूफान को साहित्यश्री से सम्मानित किया गया। इकाई अध्यक्ष श्रीपालसिंह सिसोदिया ने अतिथि साहित्यकारों का स्वागत परिचय दिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. रवींद्र उपाध्याय ने किया। इस अवसर पर नुसरत खान, सदर शौकत मेव, फिरोज मेव, अमानुल्लाह खां, खुर्शीद एजाजी, डॉ. शौकीन वर्मा, डॉ. नित्यानंद द्विवेदी, उमेशकुमार शर्मा, गोरधन पाटीदार, पंकज झा, यशवंत जोशी, सीपी जोशी मौजूद थे।संगोष्ठी में प्रो. हाशमी ने जैन आगम ग्रंथों, गीता, महाभारत, रामायण, रामचरितमानस, चाणक्य, कुरान शरीफ आदि ग्रंथों के उद्धरण देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

समाचार सौजन्य -दैनिक भास्कर 

योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-
डॉ.राजेन्द्र कुमार सिंघवी
(अकादमिक तौर पर डाईट, चित्तौडगढ़ में वरिष्ठ व्याख्याता हैं,आचार्य तुलसी के कृतित्व और व्यक्तित्व पर ही शोध भी किया है.निम्बाहेडा के छोटे से गाँव बिनोता से निकल कर लगातार नवाचारी वृति के चलते यहाँ तक पहुंचे हैं.शैक्षिक अनुसंधानों में विशेष रूचि रही है. राजस्थान कोलेज शिक्षा में हिन्दी प्राध्यापक पद हेतु चयनित )

ई-मेल:singhvi_1972@rediffmail.com
मो.नं.  9828608270
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