विश्वास पत्रिया की कविता ...कोशिश - अपनी माटी 'ISSN 2322-0724 Apni Maati'

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित ई-पत्रिका

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विश्वास पत्रिया की कविता ...कोशिश

आज एक कोशिश की,
खुद को बनाने की,
खुद ही बन जाने की,
खुद में उतर जाने की,
खुद से खुदा तक पहुँचने की,
हाँ ऐसी कोशिश की ,
जो मैं अमूमन रोज़ करता हूँ,
पर बात अब तक बनी नहीं है,
हो सकता है की किसी दिन,
मैं सफलता को प्राप्त हो जाऊं,
या फिर सभी की तरह
इसी कोशिश में नष्ट हो जाऊं,
पर अर्थ इसमें नहीं की क्या मिलेगा,
अर्थ तो इसमें है की क्या कर रहे हैं,
मैं...आप...ये....वो....हम सभी,
हां शाब्दिक और जैविक रूप से,
जीवन तो यही है, जो हम जीते हैं,
पर फिर दुसरे अर्थ की तलाश क्यों,
क्या ही ज़रूरी है इन सब में पड़ना,
गहराई की बातों में गड़ना,
फिर उन बातों को किसी नासमझ
के सर पर ज़बरदस्ती मढना,
क्या हम भूल नहीं सकते कुछ देर,
की क्या खोया ,क्या पाया, क्या मिलेगा,
क्या कुछ भी ऐसा नहीं है जो आपका हो,
है ...बिलकूल है, और वो है आपका अस्तित्व,
यानि आपका अपना 'असली तत्त्व'....
खोजिये और जानिये ...
जानिये और पहचानिए,
पहचानिए और मानिए,
मानिए और फिर पुनः खोजिये......
जैसे मैं कर रहा हूँ....शुरुआत से अंत तक.......................



योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-



विश्वास पत्रिया
(18 वर्षों से अध्ययनरत रंगमंच की दुनिया बतौर विद्यार्थी अपने आप को गढ़ रहे हैं.भंवर पत्रिया,गोपाल आचार्य जैसे मंजे हुए गुरुओं से सीखना जारी है.इनकी रूचियों में रंगमंच, नाटक, कविता, शायरी, संगीत, मूर्तिकला, एवं भारतीय संस्कृति आदि शामिल हैं.)

पता- रंगोली, बी 315 , शास्त्री नगर, भीलवाडा, (राज.)
संपर्क - 98291 -72899 , 94685 -44555

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