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''जनसंस्कृति को मनोरजंन ही नही लोकचेतना का माध्यम बनना चाहियें। ''-डॉ. कालीचरण यादव

Written By 'अपनी माटी' मासिक ई-पत्रिका (www.ApniMaati.com) on शनिवार, जनवरी 28, 2012 | शनिवार, जनवरी 28, 2012


उदयपुर,
आत्म सम्मोहन के बोझ तले दबा हुआ मध्यम वर्ग परम्परागत संस्कृति को भूलता हूआ बाजारू संस्कृति का पोषक बनता जा रहा है बाजारू संस्कृति का पोषण करते हुये सामाजिक संस्कृति को क्षति पहूँचती है जिसका मानवीय सरोकारों से कोई सम्बन्ध नही है। उक्त विचार 12 वें राष्ट्रीय समता लेखक सम्मलेन के अवसर पर  डॉ. मोहन सिंह मेहता मेमोरियल ट्रस्ट तथा गांधी मावन कल्याण सोसायटी द्वारा आयोजित ‘‘ हाशिए पर जन संस्कृति और मुख्याधारा की बाजारू संस्कृति के बढ़ते प्रहार’’ विषयक संवाद में समाजवादी चिन्तक डॉ. कालीचरण यादव ने व्यक्त किये। डॉ. यादव ने कहा कि जन संस्कृति को मनोरजंन ही नही वरन् लोक चेतना का माध्यम बनना चाहियें। 

चिन्तक प्रो. नारायण कुमार ने कहा कि मध्यम वर्ग ने वैश्वीकरण के पश्चात् बाजार को ब्रह्य और लाभ को मोक्ष समझ लिया है। लाभ पर आधारित सोच ने परम्परागत संस्कृति को बहूत विकृत किया है। रंगकर्मी दीपक जोशी ने कहा कि घर और परिवार के संस्कार बालक को बनाते थे किन्तु अब बालक का निर्माण बाजारू पाठशालाओं में होने से जन संस्कृति का ह्यास हुआ है। चिन्तक सुरेश पडित ने कहा कि उदारीकरण के दौर मे वश्विक गाँव  का जौ मोडयुल हिंस मार्ग पर आधारित है। जयपुर फेस्ट का हवाला देते हुए कहा कि आम आदमी कि जींदगी और संस्कृति पर मिडिया की भुमिका भी अनुकुल नही है।

शिक्षा शास्त्री नन्द चतुवेंदी ने कहा कि गांधीवादी चिन्तन से दूर होने से राष्ट्र में जन संस्कृति की मुख्य धारा प्रभावित हुई है। संवाद की अध्यक्षता करते हुये वास्तुकार बी.एल. मंत्री ने कहा कि संस्कृति मानव का जीवनमूल्य है। घर के वातावरण में हुये बदलाव से बाहल संस्कृति हावी होती जा रही है। घर वास्तव में संस्कारों की पाठशाला है। कार्यक्रम के प्रारम्भ में कविता गांव के गवरी दल ने गवरी नृत्य प्रस्तुत किये। इस अवसर पर दीपक दिक्षित द्वारा निर्देशीत गवरी फिल्म का प्रदर्शन करते हुये दिक्षित ने कहा कि गवरी आदिवासियों की परम्परागत नृत्य अनुष्ठान है जो दक्षिणी राजस्थान को संस्कृति का अभिन्न अंग है। स्वागत गांधी मानव कल्याण सोसायटी के निदेशक मदन नागदा ने किया। धन्यवाद ट्रस्ट सचिव नन्दकिशोर शर्मा ने ज्ञापित किया। संचालन मलय पानेरी ने किया। 


योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-

नंद किशोर शर्मा

मोहन सिंह मेहता मेमोरियल ट्रस्ट सचिव
संपर्क सूत्र :-0294&3294658, 2410110 ,
msmmtrust@gmail.com,

और नितेश सिंह कच्छावा
कार्यालय प्रशासक
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