विश्वास पत्रिया की कविता ... 'मोह' - अपनी माटी

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विश्वास पत्रिया की कविता ... 'मोह'

आप जब भी देखेंगे,
कुछ और दिखेगा,
उस खिड़की के पार,
जहां इस तरफ से,
कुछ नहीं दीखता,
पर महसूस होता है,
कुछ अनजान, अनभिज्ञ,
और कुछ सुखद भी,
हर कोई पाना चाहता है,
हर कोई जाना चाहता है,
पर यूँ नहीं जाया जाता,
उस खिड़की के पार,
कहते हैं की,
स्वर्ग का मोहल्ला है,
उस खिड़की के पार.......

लेखक....'मोह'
माध्यम....'विश्वास'

योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-



विश्वास पत्रिया
(18 वर्षों से अध्ययनरत रंगमंच की दुनिया बतौर विद्यार्थी अपने आप को गढ़ रहे हैं.भंवर पत्रिया,गोपाल आचार्य जैसे मंजे हुए गुरुओं से सीखना जारी है.इनकी रूचियों में रंगमंच, नाटक, कविता, शायरी, संगीत, मूर्तिकला, एवं भारतीय संस्कृति आदि शामिल हैं.)

पता- रंगोली, बी 315 , शास्त्री नगर, भीलवाडा, (राज.)
संपर्क - 98291 -72899 , 94685 -44555
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