विश्वास पत्रिया की कविता ...'साथ' - अपनी माटी

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रविवार, जनवरी 15, 2012

विश्वास पत्रिया की कविता ...'साथ'

मैं तुम्हारा हूँ,
सदा ही मैं तुम्हारा ही रहूँगा,
जब तक प्राण है,
जब तक चेतना है,
तब तक,
चाहे तुम मेरा प्रेम,
समझो न समझो,
चाहे हर पल, हर क्षण,
मुझे अनदेखा करो,
मैं लड़ता रहूँगा तुम्हारे लिए,
सब से, स्वयं से भी,
पर तुम मेरे होना महसूस करो,
मेरा वादा है तुमसे,
जब तक तुम रहोगे,
मैं तुम्हारे साथ रहूँगा,
बिना किसी स्वार्थ, लालच के,
मैं तुम्हारे लिए ही बना हूँ,
और तुम भी मेरे ही लिए........शायद..........

लेखक और निवेदक--'आपका शरीर',
माध्यम--'विश्वास'
योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-

विश्वास पत्रिया
(18 वर्षों से अध्ययनरत रंगमंच की दुनिया बतौर विद्यार्थी अपने आप को गढ़ रहे हैं.भंवर पत्रिया,गोपाल आचार्य जैसे मंजे हुए गुरुओं से सीखना जारी है.इनकी रूचियों में रंगमंच, नाटक, कविता, शायरी, संगीत, मूर्तिकला, एवं भारतीय संस्कृति आदि शामिल हैं.)

पता- रंगोली, बी 315 , शास्त्री नगर, भीलवाडा, (राज.)
संपर्क - 98291 -72899 , 94685 -44555
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