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मनोहरलाल हर्ष की कविताओं में गहराई और सौम्यता है

Written By 'अपनी माटी' मासिक ई-पत्रिका (www.ApniMaati.com) on शनिवार, फ़रवरी 04, 2012 | शनिवार, फ़रवरी 04, 2012



बीकानेर । हास्य व्यंग्य रचनाकार एवं चित्रकार मनोहरलाल हर्ष कवि हृदय की पुस्तक मूषक पुराण का विमोचन रविवार को मरूधर हैरिटेज होटल में हुआ। विमोचन की कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए लालेश्वर महादेव मंदिर शिवबाड़ी के अधिष्ठाता संवित सोमगिरी जी महाराज ने कहा कि पुराणों में हमारा धर्म और संस्कृति समाहित है, कृति मूषक पुराण में हर्ष ने पुराण शब्द और पुराणों के प्रति श्रद्धाभाव का प्रदर्शन करते हुए पौराणिक प्रसंगों का बारीकी से चित्रण किया है, जो एक बेजोड़ मिसाल है। उन्होंने कहा कि मनोहरलाल हर्ष की कविताओं में गहराई और सौम्यता है, इनके माध्यम से उनके चित्त को टटोलें तो ऐसा लगता है कि मानो वे सागर में कुछ ढूंढ रहे हैं, कविताएं मोती के समान पिरोई हुई लगती हैं। महाराज ने कहा कि कवि ने पौराणिक और समसामयिक घटनाओं को मूषक पुराण में वर्णित करते हुए समाज का ध्यान आकर्षित किया है।

सोमगिरी जी महाराज ने कहा कि मूषक भगवान श्री गणेश का वाहन है और यह आध्यात्म और बुद्धि का प्रतीक है, कवि ने नूतन तरीके से हास्य और व्यंग्य का समावेश किया है। पुस्तक लोकार्पण समारोह के मुख्य अतिथि और बीकानेर के महापौर भवानी शंकर शर्मा ने कहा कि पुस्तक में रिश्वतखोरों के प्रति रोष है तो आतंकवादियों को नेस्तनाबूद करने का हौसला भी है, इसमें संगीत की साधना और हास्य रस की फुहार का अनोखा संगम है। हर्ष की कविताओं में हास्य-व्यंग्य के साथ-साथ राष्ट्र प्रेम, परमार्थ और स्पष्टवादिता का भी अनूठा संगम है। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि राजस्थानी भाषा, साहित्य और संस्कृति अकादमी के अध्यक्ष श्याम महर्षि ने कहा कि मूषक की हमारी पौराणिक संस्कृति में गणेश के वाहन के रूप में विशिष्ट पहचान है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समाज में गंभीरता और भागमभाग के दौर में हास्य-व्यंग्य की यह पुस्तक सुखद अहसास कराएगी। वरिष्ठ कवि और साहित्यकार भवानी शंकर व्यास विनोद ने कहा कि हर्ष की कविताएं गुदगुदाने वाली हैं, इससे पाठक हंसने के साथ-साथ सोचने पर भी मजबूर होंगे। उन्होंने छः तरीकों के व्यंग्यों का जिक्र करते हुए कहा कि कविहृदय ने मूषक पुराण में चूहों को माध्यम बनाकर समाज की असहनीय स्थितियों पर आक्रोष व्यक्त किया है।

मूषक पुराण पर अपनी पाठकीय टीप में वरिष्ठ साहित्यकार सरल विशारद ने कहा कि पुस्तक में चूहों के माध्यम से सामाजिक बुराईयों पर कटाक्ष किए गए हैं। उन्होंने चूहे को मानवता के लिए उपयोगी जीव बताते हुए कहा कि जीवन रक्षक औषधियों का शोध चूहों पर ही किया जाता है। लोकार्पण समारोह में रचनाकार मनोहर लाल हर्ष ने मूषक पुराण की चुनिंदा कविताओं का पाठ करते हुए मूषक पुराण बनाने का कारण, मूषक की किस्मों और पौराणिक कथाओं के बारे में बताया। समारोह के संरक्षक गीतकार एवं वरिष्ठ उद्घोषक चंचल हर्ष ने कहा कि मूषक की कथा अपने आप में अद्भुत है, उन्होंने कविता पाठ किया और सभी का आभार व्यक्त किया। समारोह का संचालन प्रसिद्ध व्यंग्यकार बुलाकी शर्मा ने किया। युवा साहित्यकार संजय आचार्य वरूण ने पुस्तक पर पत्रवाचन किया। लोकार्पण समारोह में लेखक, कवि, साहित्यकार तथा गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-कट-कोपी-पेस्ट 
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