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''आधुनिक कविता आम आदमी के आसपास विचरने वाली यथार्थवादी और प्रतीकात्मक कविता है। ''-डॉ॰ टी महादेव राव

Written By 'अपनी माटी' मासिक ई-पत्रिका (www.ApniMaati.com) on सोमवार, फ़रवरी 06, 2012 | सोमवार, फ़रवरी 06, 2012


विशाखापटनम॰फरवरी॰ 
हिन्दी साहित्य,संस्कृति और रंगमंच के प्रति प्रतिबद्ध संस्था सृजन ने आधुनिक हिन्दी कविता साहित्य पर एक कार्यक्रम का आयोजन विशाखापटनम के द्वारकानगर स्थित जन ग्रंथालय के सभागार में 5 फरवरी 2012 को किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सृजन के अध्यक्ष नीरव कुमार वर्मा ने की जबकि संचालन का दायित्व निर्वाह किया डॉ॰ टी महादेव रावसचिव, सृजन ने। संयुक्त सचिव डॉ संतोष अलेक्स ने आहुतों का स्वागतकिया।
अपने अध्यक्षीय सम्बोधन में नीरव वर्मा ने कहा की विविध तरह के कार्यक्रमों द्वारा विशाखापटनम में हिन्दी साहित्य सृजन को पुष्पित पल्लवित करनानए रचनाकारों कोरचनाकर्म के लिए प्रेरित करते हुये पुराने रचनाकारों को प्रोत्साहित करना सृजन का उद्देश्य है।  डॉ॰ टी महादेव राव ने आधुनिक कविता पर कार्यक्रमों के उद्देश्यों को स्पष्ट करते हुये कहा – आधुनिक कविता आम आदमी के आसपास विचरने वाली यथार्थवादी और प्रतीकात्मक कविता है। इस विषय पर कार्यक्रम आयोजित कर इसके विभिन्न रूपोंप्रवृत्तियों और विविध वादों से अवगत कराना ही आज के कार्यक्रम का मक़सद है।
कार्यक्रम में सबसे पहले बीरेन्द्र राय ने आम आदमी की अतिव्यस्त ज़िंदगी और राष्ट्रभक्ति से प्रेरित समारोहों को भी केवल औपचारिका मानकर मनाने की बात अपनी कविता छब्बीस जनवरी में प्रस्तुत की।नई कविता पर अपने विचार रखते हुये तोलेटी चंद्रशेखर ने  सोचो एक बार फिर कविता में आधुनिक जीवन, समाज और राजनीति पर कटाक्ष किया। सूक्ष्म बातों से ही बड़ी बातों का अस्तित्व है- इस बात को जी ईश्वरवर्मा ने अपनी कविता छोटी छोटी बातें मेंरेखांकित किया। नई आशानई उम्मीदें और नूतन आत्मविश्वास की कविता क्याखोया और क्या पाया पढ़ी मीना गुप्ता ने,जिसमें बीते वर्ष का सिंहावलोकन और इस साल में सभी शुभ और उन्नतिशील होने की आशा का संतुलन था। बी एस मूर्ति ने अपनी कहानी  साक्ष्य में गलत गवाही को अपनी बुद्धिमत्ता से पकड़कर सत्य की विजय कराने वाले जज के बारे में बखूबी बताया।
आधुनिक कविता पर अपने विचार रखे अशोक गुप्ता ने और अपनी एक गजलनुमा नई कविता प्रस्तुत की जिसमें पुराने और नए विचारों का संगम था। विभिन्न प्रतीकात्मक बिंबों वाली कविता वर्षा कापाठ किया डॉ बी वेंकट राव ने। लोकतन्त्र पर हास्य कविता में वर्तमान समाज में व्याप्त भ्रष्टाचारअत्याचार और हाहाकार पर अपनी बात रखी किरण सिंह ने।
नए कवि कपिल कुमार शर्मा ने गरीबी और भुखमरी से प्रभावित महिला की व्यथा गाथा विविध प्रतीकों के माध्यम से प्रस्तुत की अपनी कविता  वास्तविकता में। डॉ एम सूर्यकुमारी ने दार्शनिक विचारों औरप्रतीकात्मक बिंबों के माध्यम से घटती आयु और मृत्यु के विषय में अपनी मार्मिक कविता  कालपुरुष और घोडा में सुनाया। एस वी आर नायडू ने अपनी व्यंग्य कवितायें डर और डाईवोर्स सुनाया।
केदारनाथ सिंह की कविताओं में मानवतावाद विषयक प्रपत्र डॉ संतोषलेक्स ने प्रस्तुत किया जिसमें केदानाथ सिंह की कुछ कविताओं का उदाहरण देतेहुये उनमें निहित मानवतावादी दृष्टिकोण को उबारा। आधुनिक कविता की प्रवृत्तियाँशीर्षक अपने प्रपत्र में डॉ टी महादेव राव नेआज की कविता में जिन गुणों का समावेश होना चाहिए और वे किस तरह आम आदमी के करीब धड़कती हैं और उसके दुख दर्द का चिट्ठा खोलती हैइसका सोदाहरण प्रस्तुति की। कृष्ण कुमार गुप्ता ने आधुनिक कविता जो कि आज की कविता है को समय की मांग बताया और कहा कि रचनाकारों को इस दिशा में ईमानदार प्रयास करने चाहिए।
कार्यक्रम में सी एच ईश्वर रावताता राव ने भी सक्रिय भागीदारी की। सभी रचनाओं पर उपस्‍थि‍त कवि‍यों और लेखकों ने अपनी अपनी प्रति‍क्रि‍या दी। सभी को लगा कि‍ इस तरह के सार्थक हि‍न्‍दी कार्यक्रम अहि‍न्‍दी क्षेत्र में लगातार करते हुए सृजन संस्‍था अच्‍छा  काम कर रही है। डॉ संतोष अलेक्‍स ने धन्‍यवाद ज्ञापन कि‍या और नीरव कुमार वर्मा ने प्रति‍भागी रचनाकारों को स्‍मृति‍ चि‍ह्न प्रदान कि‍ये।

योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-
डॉ.टी.महादेव
लेखक,कवि और संस्कृतिकर्मी के रूप में जाने जाते हैं.साथ ही 'सृजन' संस्था क सचिव भी है.

संपर्क 
ई-मेल:-mahadevraot@hpcl.co.in
मोबाइल:- 09394290204
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