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डा. मनोज श्रीवास्तव का व्यंग्य :-डुप्लीकेट होने के फ़ायदे

Written By 'अपनी माटी' मासिक ई-पत्रिका (www.ApniMaati.com) on बुधवार, फ़रवरी 29, 2012 | बुधवार, फ़रवरी 29, 2012


ऊपरवाला भी बड़ा सोच-समझकर डुप्लीकेट यानी हमशक़्ल इंसान पैदा करता है। जो डुप्लीकेट पैदा होते हैं, उन पर ईश्वर की बड़ी कृपा होती है। बड़े-बड़े क्रिकेटरों, फ़िल्मी सितारों और राजनेताओं के हमशक़्लों के कहने ही क्या हैं? क्रिकेटरों के हमशक़्ल, लोगों की आँखों में धूल झोंककर आटोग्राफ़ देते हैं और छैल-छबीली लड़कियों की शोहबत हासिल करते हैं। राजनेताओं के हमशक़्ल संसद, विधानसभाओं और संवेदनशील राजभवनों में धड़ल्ले से घुसपैठ कर, केवल राजनेताओं की कीमती सुख-सुविधाओं का महाभोग करते हैं, बल्कि नामचीन अफ़सरों की जी-हुज़ूरी का भी लुत्फ़ उठा आते हैं।

चुनांचे, सबसे ज़्यादा मज़े लेते हैं--फिल्मी सितारों के हमशक़्ल। वे सार्वजनिक स्थानों पर अचानक़ प्रकट होकर नौजवानों को दीवाना बना देते हैं। वहाँ उमड़ती भीड़ को देख, कोई ज़िंदा बम बरामद होने का भान होता है। आम आदमी उनके संसर्ग में आकर अपने को धन्य मानता है--जैसे कि उसकी बरसों की अधूरी आस पूरी हो गई हो, उन्हें साक्षात ईश्वर का दर्शन मिल गया हो! बहरहाल, अभिनेताओं के हमशक़्ल कभी-कभार बड़े हैरतअंगेज़ कारनामें भी कर गुजरते हैं। वे असली अभिनेता की चहेती प्रेमिका की कोठियों के निहायत प्राइवेट चैंबर में घुसकर उसके साथ रोमांस भी कर आते हैं।

इन डुप्लीकेटों को बड़ी-बड़ी कंपनियाँ अपने उत्पादों के विज्ञापन के लिए मुँहमांगी कीमतें चुकाती हैं। मोडलिंग का असली फ़ायदा तो इन्हें ही मिलता है। आजकल टी.वी. पर डुप्लीकेट मोडलों की अहमियत कुछ यूँ भी बढ़ गई है कि दर्शक यही कयास लगाते रह जाते हैं कि फ़लाना मोडल वास्तव में असली है या नकली! कभी-कभार इसी मुद्दे पर दर्शकों को सट्टेबाजी तक करनी पड़ती है। जीत-हार की बाज़ियाँ भी लगानी पड़ती है। जो जीता, वो मालामाल! ऐसे में, काहिल-कुंजेहन किस्म के दर्शक भी बेहद जोश से भर जाते हैं, उनके नाकारेपन को रोज़ग़ार मिल जाता है।

अब, यह समझ लीजिए, जो डुप्लीकेट पैदा हुए हैं, उनकी लोटरी खुल गई है। उनके भावी सात पीढ़ियों का उद्धार हो गया है। प्रायः ऐसा होता है कि किसी-किसी व्यक्ति की हुलिया अचानक किसी नामीगिरामी हस्ती से मेल खाने लगती है। उसे इस बात का अहसास होते ही उसे यक़ीन हो जाता है कि अब उसके दिन फ़िर गए हैं। उसे वह सब कुछ हासिल हो जाएगा जिसकी उसे अरसों से तमन्ना रही है।

यों तो, डुप्लीकेट पैदा होना एक क़िस्मत की बात है। अस्तु, कुछ लोगों में खुद को किसी अभिनेता या क्रिकेटर की तरह अपनी हुलिया बनाने की होड़-सी लगी हुई है। उनका विश्वास होता है कि अग़र ख़ुदा--ख़ास्ता किसी अभिषेक या सचिन से उनका चेहरा मिल गया तो उन्हें रोज़ी-रोटी के लिए कोई ख़ास हाथ-पैर नहीं मारना पड़ेगा। बड़े आराम से उन्हें खाने को ग़िज़ा, रहने को आलीशान मकान और ऐश करने को कामनियाँ मयस्सर हो जाएंगी। सो, वे बड़े-बड़े बुटीक सेंटरों और सैलूनों में जाकर अपना भाग्य आज़मा रहे हैं--किसी अभिनेता की तरह शक़्ल बनाने की होड़ में। ऐसे में, सौंदर्यवर्धक क्रीम-पाउडरों के निर्माताओं के भी भाग्य जाग रहे हैं।लिहाजा, डुप्लीकेट बनने की सरगर्मी तेज होती जा रही है। अब, माँ-बाप भी अपने बच्चों की शक़्ल में किसी बड़ी हस्ती का हमशक़्ल देखने लगे हैं। ईश्वर उनकी आस पूरी करे! हम जैसे अभागे लोगों को जो ईश्वर के कृपापात्र बनकर किसी बड़े आदमी का डुप्लीकेट पैदा नहीं हो पाए, इस बात से संतोष होगा कि चलो! डुप्लीकेटों की पैदावार येन-केन-प्रकारेण बढ़ती जा रही है।


 योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-

डा. मनोज श्रीवास्तव 
आप भारतीय संसद की राज्य सभा में सहायक निदेशक है.अंग्रेज़ी साहित्य में काशी हिन्दू विश्वविद्यालयए वाराणसी से स्नातकोत्तर और पीएच.डी.
लिखी गईं पुस्तकें-पगडंडियां(काव्य संग्रह),अक्ल का फलसफा(व्यंग्य संग्रह),चाहता हूँ पागल भीड़ (काव्य संग्रह),धर्मचक्र राजचक्र(कहानी संग्रह),पगली का इन्कलाब(कहानी संग्रह),परकटी कविताओं की उड़ान(काव्य संग्रह,अप्रकाशित)

आवासीय पता-.सी.66 ए नई पंचवटीए जी०टी० रोडए ;पवन सिनेमा के सामने,
जिला-गाज़ियाबाद, उ०प्र०,मोबाईल नं० 09910360249
,drmanojs5@gmail.com)

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1 टिप्पणी:

  1. duplicate hone par kabhi kabhar jute bhi pad jate hae, yadi kisi villen ka duplicate bechara sheedha sadha ho.yeh bhi yad rakhne wali bat hae.

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