Latest Article :
Home » , , , , , , » ''‘बच्चे की हथेली पर’ उपन्यास संवेदना और शिल्प की दृष्टि से बेजोड है।''-डॉ.एल.एल.योगी

''‘बच्चे की हथेली पर’ उपन्यास संवेदना और शिल्प की दृष्टि से बेजोड है।''-डॉ.एल.एल.योगी

Written By 'अपनी माटी' मासिक ई-पत्रिका (www.ApniMaati.com) on शनिवार, फ़रवरी 18, 2012 | शनिवार, फ़रवरी 18, 2012


‘बच्चे की हथेली पर’ उपन्यास पर परिचर्चा
राजकीय महविद्यालय,बूंदी में दिनांक 17 फरवरी 2012 को

 डॉ.आर.डी.सैनी द्वारा रचित तथा हाल ही में प्रकाशित बाल मनोविज्ञान एवं उत्तर आधुनिक विसंगतियों को रेखांकित करने वाला चर्चित उपन्यास ‘बच्चे की हथेली पर’’ पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ.एल.एल.योगी ने अपने कहा कि यह उपन्यास संवेदना और शिल्प की दृष्टि से बेजोड है। इसमें भारतीय और पाश्चात्य संस्कृतियों की टकराहट और भौतिकवादी दौड़ में भागते हुए माता-पिता में पनपते अलगाव, एकाकीपन, तनाव के परिणाम को भोगता बच्चा है जो असमय ही आत्महत्या करने पर उतारू हो जाता है।

उपन्यास में गंभीर समाजशास्त्रीय प्रश्नों को उठाया हैं। डॉ. योगी ने बताया कि उपन्यास का अंग्रेजी में संजीव श्रीवास्तव द्वारा अनुवाद किया जा चुका है। दूसरे मुख्य वक्ता डॉ.आर.सी.मीणा ने अपने शोध-पत्र में बताया कि उपन्यास की विषयवस्तु भारत से माइग्रेट होकर फिनलैंड में रह रहे भारतीय दम्पति जेकब, जेनी तथा उनके 9 वर्षीय पुत्र जूम पर आधारित है जिसमें भौतिकता की दौड में दौड रहे माता-पिता के कारण बच्चों के खोते बचपन तथा उसके प्रभावों का जीवंत चित्रण किया गया है। डॉ.मीणा ने बताया कि उपन्यास हमारे सामने कई सवाल खडे करता है- पीत पत्रकारिता, पुलिस की भूमिका,लेस्बियन महिला चरित्र, आधुनिक शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल आदि।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे गुलाब चन्द पांचाल ने कहा कि आज संतान के प्रति माता-पिता का भावनात्मक संबंध कम होते जा रहे हैं, भारत की अपेक्षा विदेशों में स्थिति खराब है वहां तो कुत्ते बिल्लियों के प्रति ही वात्सल्य बचा है। आज बच्चों की हथेली पर टॉफी के स्थान पर अपनी महत्वांकांक्षाए थोपी जा रही है। हालांकि रचना के शीर्षक से लगता है कि बच्चा केन्द्रीय भूमिका में होगा लेकिन असामान्य मां का तनाव अवसाद और उसकी महत्वाकांक्षाएं प्रमुख हो गयी है जिसके लिए बच्चा और पति दोनों ही गौण हो जाते है। 

कार्यक्रम के दौरान परिचर्चा में, डॉ.सीमा कश्यप ने लेखक पर आरोप लगाते हुए कहा कि उपन्यास में स्त्री चरित्र की खोजबीन की है पर पुरूष पात्र को नैपथ्य में रखा है जो यथार्थ से दूर दिखाई देता है। छुट्टन लाल शर्मा ने कहा कि उपन्यास में स्त्री-पुरूष के संबंधों को ज्यादा विवेचित किया गया है तथा मूल विषय बाल मनोविज्ञान से लेखक भटक गया है। साथ ही लेखक ने माता-पिता-संतान की बढ़ती दूरियों को भी रेखांकित किया है।‘बच्चे की हथेली पर’ उपन्यास पर परिचर्चा कार्यक्रम का संचालन डॉ. ललित भारतीय ने किया। परिचर्चा के दौरान वरिष्ठ पत्रकार दिनेश विजयवर्गीय और डॉ.विजयलक्ष्मी सालोदिया, डॉ.सियाराम मीणा, डॉ.मणि भारतीय, डॉ.लालचन्द कहार, डॉ.विकास शर्मा, डॉ.संजय भल्ला, डॉ.सीमा सांखला, डॉ.मोनिका चौधरी, डॉ.वी.बी.श्रीवास्तव, डॉ.कोशल किशोर गोठवाल, डॉ.वन्दना शर्मा, डॉ.पदमचन्द भाटी, यशपाल जैन,रणसिंह यादव, डॉ.एन.के.जैतवाल, डॉ.मनोज रावत आदि संकाय सदस्य उपस्थित थे.


योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-



डॉ. ललित भारतीय
वर्तमान में बूंदी,राजस्थान राजकीय कोलेज में भूगोल के असोसिएट प्रोफ़ेसर हैं.पर्यटन जैसे कार्य हेतु रिसर्च गाईड की भूमिका भी निभाते हैं.साथ ही देशभर के सांस्कृतिक आयोजनों में प्रमुख भूमिका निभाते रहे हैं.एक चित्रकार के रूप में भी जाने जाते हैं.स्पिक मैके के जैसे छात्र आन्दोलन की बूंदी इकाई के वरिष्ठ कार्यकर्ता हैं.


lalitbhartiya@gmail.com
SocialTwist Tell-a-Friend
Share this article :

0 comments:

Speak up your mind

Tell us what you're thinking... !

संस्थापक:माणिक

संस्थापक:माणिक
अपनी माटी ई-पत्रिका

सम्पादक:जितेन्द्र यादव

सम्पादक:जितेन्द्र यादव
अपनी माटी ई-पत्रिका

एक ज़रूरी ब्लॉग

एक ज़रूरी ब्लॉग
बसेड़ा की डायरी:माणिक

यहाँ आपका स्वागत है



ज्यादा पढ़ी गई रचना

यहाँ क्लिक करके हमारी डाक नि:शुल्क पाएं

Donate Apni Maati

रचनाएं यहाँ खोजिएगा

हमारे पाठक साथी

सम्पादक मंडल

साहित्य-संस्कृति की त्रैमासिक ई-पत्रिका
'अपनी माटी'
========
प्रधान सम्पादक
सम्पादक
सह सम्पादक
तकनिकी प्रबंधक
========
संपर्क
apnimaati.com@gmail.com
========

ऑनलाइन

Donate Us

 
Template Design by Creating Website Published by Mas Template