साहित्य अकादेमी का पहला युवा पुरस्कार दुलाराम सहारण को - अपनी माटी 'ISSN 2322-0724 Apni Maati'

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित ई-पत्रिका

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साहित्य अकादेमी का पहला युवा पुरस्कार दुलाराम सहारण को

(मानो ऐसा लग रहा है ये हम सभी युवाओं का सम्मान हो,युवा साथी लेखक सहारण को 'अपनी माटी' परिवार की तरफ से भी बहुत सी बधाइयां.-सम्पादक )
चूरू, 13 फरवरी। 
दुलाराम सहारण
राज्य के चूरू  जिले में प्रमुख रूप से 
सक्रीय सामाजिक संस्थान प्रयास के अध्यक्ष है
और एक प्रखर संस्कृतिकर्मी के 
रूप में जाने जाते हैं.वे पेशे से वकील हैं.


चुरू,राजस्थान-9414327734
भारत सरकार की साहित्य अकादेमी नई दिल्ली की ओर से राजस्थानी भाषा का पहला युवा पुरस्कार  2011 चूरू के साहित्यकार दुलाराम सहारण को उनके प्रथम कहानी संग्रह ‘पीड़’ के लिए दिया जाएगा। अकादेमी द्वारा मान्य सभी  भारतीय भाषाओं के लिए शुरू किए गए इस पुरस्कार की घोषणा सोमवार शाम की गई। 

अकादेमी सचिव अग्रहार कृष्णमृर्ति के मुताबिक युवा पुरस्कार के तहत सम्मानित साहित्यकार को एक विशेष समारोह में उत्कीर्ण ताम्रफलक एवं पचास हजार रुपए नकद प्रदान किए जाएंगे। चूरू जिले की तारानगर तहसील के गांव भाड़ंग में 15 सितंबर 1976 को मां जहरोदेवी व पिता मनफूलराम के घर जन्मे दुलाराम सहारण इससे पूर्व भत्तमाल जोशी साहित्य पुरस्कार 1997, ज्ञान फाउंडेशन सम्मान एवं बसंती देवी धानुका युवा साहित्यकार पुरस्कार 2009 से सम्मानित हो चुके हैं। ‘पीड़’ के अलावा उनकी राजस्थानी बाल उपन्यास ‘जंगळ दरबार’, राजस्थानी बाल कथा संग्रह ‘क्रिकेट रो कोड’, हिंदी बालकथा संग्रह ‘चांदी की चमक’ आदि पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं तथा राजस्थानी कथा संग्रह ‘बात न बीती’ का संपादन उन्होंने किया है। बचपन से ही साहित्य में रूचि रखने वाले दुलाराम की रचनाएं माणक, जागती जोत, राजस्थली सहित विभिन्न पत्रा-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं। फिलहाल सहारण गैर सरकारी संगठन ‘प्रयास’ संस्थान के अध्यक्ष हैं और अपनी संस्था के जरिए क्षेत्रा में साहित्यिक वातावरण का निर्माण कर रहे हैं। 

साहित्य अकादेमी के अध्यक्ष सुनील गंगोपाध्याय की अध्यक्षता में सोमवार को हुई कार्यकारी मंडल की बैठक में 16 भारतीय भाषाओं के युवा पुरस्कारों का अनुमोदन किया गया। सहारण के अलावा हिंदी में उमाशंकर चौधरी, कन्नड़ में वीरन्ना मादिवालरा, कश्मीरी में निसार आजम, मराठी में ऐश्वर्य पाटेकर, ओड़िया में गायत्री बाला पांडा, पंजाबी में परमवीर सिंह, बांग्ला में विनोद घोषाल, मलयालम में सुष्मेष चंद्रोथ, कोंकणी में जोफा गोन्साल्विस, तेलुगु में वेमपल्ली गंगाधर तथा तमिल में एम. तवासी, मैथिली में आनंद कुमार झा,  गुजराती में ध्वनिल पारेख, अंग्रेजी में विक्रम संपत तथा असमिया में अरिंदम बरकतकी को यह पुरस्कार दिए जाने की घोषणा की गई है। 

योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-
माणिक,
इतिहास में स्नातकोत्तर.बाद के सालों में बी.एड./ वर्तमान में राजस्थान सरकार के पंचायतीराज विभाग में अध्यापक हैं.'अपनी माटी' वेबपत्रिका पूर्व सम्पादक है,साथ ही आकाशवाणी चित्तौड़ के ऍफ़.एम्. 'मीरा' चैनल के लिए पिछले पांच सालों से बतौर नैमित्तिक उदघोषक प्रसारित हो रहे हैं.उनकी कवितायेँ आदि उनके ब्लॉग 'माणिकनामा' पर पढी जा सकती है.

मन बहलाने के लिए चित्तौड़ के युवा संस्कृतिकर्मी कह लो.सालों स्पिक मैके नामक सांकृतिक आन्दोलन की राजस्थान इकाई में प्रमुख दायित्व पर रहे.आजकल सभी दायित्वों से मुक्त पढ़ने-लिखने में लगे हैं.वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय,कोटा से हिन्दी में स्नातकोत्तर कर रहे हैं.किसी भी पत्र-पत्रिका में छपे नहीं है.अब तक कोई भी सम्मान.अवार्ड से नवाजे नहीं गए हैं.कुल मिलाकर मामूली आदमी है.
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