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जनआन्दोलन से ही व्यवस्था परिवर्तन एवं प्रतिरोध की क्षमता उत्पन्न होगी- मदन मदिर

Written By 'अपनी माटी' मासिक ई-पत्रिका (www.ApniMaati.com) on शुक्रवार, फ़रवरी 03, 2012 | शुक्रवार, फ़रवरी 03, 2012


उदयपुर/गोगुन्दा 29 जनवरी, वें राष्ट्रीय समता लेखक सम्मेलन के तृतीय दिवस के दो सत्रों का आयोजन महावीर समता संदेश एवं अलर्ट संस्थान के संयुक्त तत्ववावधान में गोगुन्दा में आयोजित किया गया। आज के प्रथम सत्र में ‘प्रतिरोध की रणनीति’ के तहत् बोलते हुए कोटा व बूदी से प्रकाशित दैनिक अंगद के प्रधान सम्पादक मदन मदिर ने कहा कि पिछले तीन दिनों से हम हाशिये पर वर्तमान व्यवस्था द्वारा धकेले गये लोगों की स्थिति पर गहन मनन एवं चिन्तन कर रहे है। लेकिन अब हमें यह तय करना पड़ेगा कि हम तुरन्त ऐसी क्रान्ति की बात करें जो इन लोगों की स्थिति में परिवर्तन ला सके। पिछले समय में भी हमने कई जन आन्दोलन देखे है एवं वर्तमान में एक जन आन्दोलन तो परिक्षण के दौर में भी है। उन्होंने इस बात की ओर भी इशारा किया कि लोगों ने कई वर्षों तक अग्रेंजों की गुलामी और शोषण सहा एवं अन्ततः उनको अहिंसक जनआन्दोलन से खदेड़ दिया। लेकिन अब हमारा दुर्भाग्य है कि अपने ही लोग अपने लोगों के शोषण में तल्लीन हैं इस व्यवस्था को बदलने के लिए एक नये जन आन्दोलन की जरूरत है एवं वर्तमान में तीन रास्ते हमारे सामने दिखाई पड़ते है.

 प्रथम रास्ता वोट के जरिये व्यवस्था मे बदलाव, दूसरा जनआन्दोलन से व्यवस्था परिवर्तन करना एवं तीसरा बंदुक से क्रान्ति लाना लेकिन यह सम्मेलन इस तीसरे रास्ते को सीरे से खारीज करता है कि अंततः हिंसा हारती है और अहिंसक विचार की जीत होती है। हमें इस सम्मेलन के इस अन्तिम सत्र में ही तय करना होगा कि हम कौनसा रास्ता अपनाना चाहते है। क्योंकि हाशिये के लोगों की सहनशीलता अब समाप्त होती जा रही है।  

अलवर से आये सात्यिकार एवं कवि डॉ. रेवती रमण शर्मा ने प्रतिरोध का अर्थ समझाते हुए आव्हान किया कि समाज में हाशिये पर जी रहे लोगों को हर जगह दमन एवं शोषण का शिकार होना पड़ता है। चाहे वह रोजगार गारन्टी जैसे कार्यक्रमों में बेहतर मजदूरी पाना हो या और कोई बड़ा संघर्ष हो। उन्होने यह भी कहा कि प्रतिरोध के स्वर बालक की शैशवा अवस्था से लेकर जीवन के अन्त तक जारी रहते है। चूंकि जैसे-जैसे मनुष्य बड़ा होता है परिस्थितियों वश उसके प्रतिरोध का दायरा भी बढ़ता जाता है। और आज जरूरत इस बात है कि कोई भी प्रतिरोध लोगों के जीवन में खुशी लाने का/बेहतर जीवन स्तर प्रदान करने का काम करें। 

संवाद को आगे बढ़ाते हुए मानवीय समाज बैंगलोर के संस्थापक, लेखक एवं कवि डॉ. रणजीत ने अपनी दो कविताएं प्रस्तुत की जिसमें प्रथम कविता ने दलितों की वर्तमान स्थिति एवं शोषण की तरफ इंगित किया तथा द्वितीय रचना ने महिलाओं की अन्तनीर्हित क्षमताओं एवं वर्तमान में उन पर हो रहे शोषण के अन्तर्द्वन्द को स्पष्ट किया। अन्त में मुख्य अतिथि पद से बोलते हुए। वयोवृद्ध गांधीवादी समाजकर्मी किशोर सन्त ने कहा कि अपने अपने काल में अम्बेडकर, गांधी एवं लोहिया समाज के पथ प्रदर्शक रहे है। जिनकी विचारधारा को महावीर समता संदेश ने भी अपनाया है एवं आज जरूरत इस बात की है कि हम इन से सीख लेते हुए प्रतिरोध की वर्तमान सोच को कैसे विकसित करें। साथ ही उन्होंने आव्हान किया कि लेखकांे, साहित्यकारों एवं स्वैच्छिक संगठनों को साथ मिलकर संवाद को आगे बढाने एवं युवा पीढ़ी को इस तरह के संवादों में शामिल करने की भी जरूरत है। 

सम्मेलन के अन्तिम सत्र में एकेडमी ऑफ न्यूट्रीशन इम्पु्रवमेन्ट नागपुर के अध्यक्ष डॉ. शान्तिलाल कोठारी ने जोर देकर कहा कि दलितों, वंचितों और हाशिये पर धकेले गये लोगों को मुख्य धारा में लाने के लिए यह आवश्यक कि स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग बढ़ाया जाये जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो। उन्होंने कहा कि आज की व्यवस्था अमेरिका व अमेरिका के लोगों को धनवान बनाने ओर अग्रसर है तथा भारत को कंगाल बना रही है। उन्होंने खेसारी दाल, आयोडिन नमक और फलास के फूलों व महुवा के लिए उनके द्वारा चलाये जा रहे अभियान की बात की। 

सम्मेलन में भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद कार्यक्रम निदेशक डॉ. अजय गुप्ता ने सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए यह विश्वास दिलाया कि आगामी सम्मेलनों में साधनों की कोई कमी नहीं होने दी जायेगी। सम्मेलन में डॉ. अजय गुप्ता, डॉ. एस.एल. कोठारी, डॉ. वी.बी.सिंह का शॉल व प्रतिक चिन्ह देकर सम्मान किया गया।सम्मेलन में डी.एस. पालीवाल, हंस राज चौधरी एवं दिनेश चन्द व्यास आदि ने भी अपने विचार रखे। सम्मेलन की अध्यक्षता डॉ. वी.बी.सिंह ने की। कार्यक्रम का संचालन डॉ. वीणा द्विवेदी ने किया। अन्त में अलर्ट संस्थान के बी.के. गुप्ता की तरफ से धन्यवाद ज्ञापित किया गया। सम्मेलन में अतिथियों का स्वागत एवं परिचय महावीर समता संदेश के सम्पादक हिम्मत सेठ ने किया। बिलासपुर छत्तीसगढ़ से मड़ई के सम्पादक कालीचरण यादव व रफीक खान, कामरेड महेश शर्मा, दिल्ली से आये साहित्यकार एवं कवि उद्भ्रान्त, आगरा विश्वविद्यालय के प्रो. पुन्नीसिंह समाजकर्मी, शांतिलाल भण्डारी की उपस्थिति विशेष प्रशसनीय रही। सम्मेलन के अंत में सभी प्रतिभागियों ने महाराणा प्रताप के राज तिलक स्थल व हल्दीघाटी संग्राहालय का अवलोकन किया। 

योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-

हिम्मत सेठ

वरिष्ठ साथी पत्रकार,
उदयपुर से प्रकाशित 'समता सन्देश' 
पत्र के सम्पादक और 
समतावादी लेखक हिम्मत सेठ

फोन: 0294-2413423,  मो. 94606.93560



डॉ. हेमेन्द्र चण्डालिया 
समता लेखक सम्मलेन
आयोजन सचिव मो.  09460822818
प्रकाशकीय कार्यालय
एफ-30, भूपालपुरा, उदयपुर-313001
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