आशा पांडे ओझा की तीन हालिया कवितायेँ - अपनी माटी 'ISSN 2322-0724 Apni Maati'

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित ई-पत्रिका

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आशा पांडे ओझा की तीन हालिया कवितायेँ

(यहाँ आशा पांडे  की सध्य लिखित कवितायेँ प्रस्तुत हैं जिनमें मौसम के ज़रिये जीवन के बदलती तहें,प्रेम का अंदाज़ के साथ ही यादों की करवटें लिखी गयी है-सम्पादक)

एक 

सौ हेमंत
सौ बसंत
सौ शरद
बदलने के बावजूद
कभी कभी
जलता ही
रह जाता है
मन का मौसम
ग्रीष्म की तरह
जाने क्यों ?


दो 

मुहब्बत
दीप शिखा
और नदी का प्रवाह
तीनो में कितनी समानता है
जब तक
मिट जाये अस्तित्व
तब तक
थमने का नाम नहीं लेती
तीनो


तीन  
स्मृति का सुनार
रोज संवारता है
अतीत की तिजोरी से
निकाल कर
यादों के जेवर
जड़ कर उन पर
आंसू के हीरे मोती
फिर रख देता है
मन की तिजोरी में
सबसें छुपाकर
इस निजी धरोहर को
अपने साथ ले जानेको
सदा सदा के लिए 
योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-
आशा पांडे ओझा
युवा लेखिकाओ की सूची  में पाली,राजस्थान की प्रतिनिधि रचनाकार आशा पांडे ओझा मूल रूप से कविता ही करती रही है.पेशे से वकालात करने वाली आशा पांडे की कविताओं में नारी मन की व्यथा-कथा और प्रेम का विमर्श पढ़ा और ढूंढा जा सकता है.

उन्हें जानने हेतु उनके फेसबुक खाते के साथ ही उनके ब्लॉग आशा का आँगन,अम्बुधि-पयोधि पर भी संपर्क साधा जा सकता है.इनके अब तक दो कविता संग्रह 'दो समुद्र के नाम','एक कोशिश रोशनी की और' प्रकाशित हो चुके हैं.

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