Latest Article :
Home » , , , , , » हाशिये के लोग ही है संस्कृति के पहरू: डा.रत्नाकर पाण्डे

हाशिये के लोग ही है संस्कृति के पहरू: डा.रत्नाकर पाण्डे

Written By 'अपनी माटी' मासिक ई-पत्रिका (www.ApniMaati.com) on शुक्रवार, फ़रवरी 03, 2012 | शुक्रवार, फ़रवरी 03, 2012


उदयपुर/27-29 जनवरी, 2012 
हाशिए के लोग ही है जो हमारी संस्कृति के वाहक व सही अर्थों में उसके पहरूए हैं। ये ही लोग है जो पीढ़ी दर पीढ़ी संचित ज्ञान को सहेजे हुए है। इन्हे इनके अधिकारों से बेदखल किया गया तो पूरी व्यवस्था छिन्न-भिन्न हो जाएगी। उक्त विचार प्रसिद्ध साहित्यकार व राज्यसभा के पूर्व सदस्य डॉ. रत्नाकर पाण्डे ने बारहवें राष्ट्रीय समता लेखक सम्मेलन के उद्घाटन उद्घाटन समारोह में व्यक्त किया। 12 वें राष्ट्रीय समता लेखक सम्मेलन महावीर समता संदेश, सांस्कृतिक संबंध परिषद भारत सरकार, जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय, राजस्थान साहित्य अकादमी, डॉ. मोहनसिंह मेहता मेमोरियल ट्रष्ट, कासा संस्थान, अलर्ट संस्थान, आस्था संस्थान, खांजीपीर मेमोरियल ट्रष्ट के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ। यहां पर जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय के डिपार्टमेन्ट ऑफ कम्प्यूटर साइंस एण्ड इनफोर्मेशन टेक्नोलोजी के सभागार में आयोजित उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि पूर्व विधायक व किसान नेता डॉ. सुनीलम ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में विकास का जो आदर्श रखा गया है उसके रहते लोगों को हाशिए पर धकेला जाना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद विकास योजनाएँ तो ढेरों बनी पर सभी ने गरीब वर्ग विशेषकर आदिवासियों का विस्थापन किया। उन्होंने कहा कि अब तक लगभग साढ़े चार करोड़ लोग विस्थापित हुए हैं और जिस प्रकार की नई योजनाएँ बन रही है व एम ओ यू किए जा रहे हैं उससे आशंका यह है कि आने वाली पांच साल की अवधि में लगभग 10 करोड़ लोग विकास योजनाओं के कारण विस्थापित हो जाएंगे। यह सब एक सोची-समजी नीति के तहत हो रहा है जिसे बदले बिना लोगों का हाशिए पर धकेला जाना बन्द नहीं होगा। 

कार्यक्रम को उद्घाटन जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय के चांसलर प्रो. भवानीशंकर गर्ग ने किया। उन्होंने कहा कि राजस्थान विद्यापीठ प्रारंभ से ही वांचीत वर्ग की शिक्षा के लिए कार्य करती रही है। पं. नागर ने 1937 में उदयपुर के ग्रमीण अंचलों में शिक्षा प्रसार का कार्य किया। उन्होंने कहा कि विषमता किसी लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वीकार्य नहीं हो सकती। उसके चलते समाज में जो असन्तुलन पैदा होता है वह अंततः हानिकारक सिद्ध होता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के निदेशक अजय गुप्ता ने कहा कि हाशिए पर जो लोग हैं उनके बारे में गंभीरतापूर्वक विचार किया जाना जरूरी है। यदि उनमें असंतोष बढ़ गया तो सारी व्यवस्था चूर-चूर हो जाएगी। उन्होंने कहा कि बारहवें लेखक सम्मेलन में जिस प्रकार का खुला विचार मंथन हो रहा वै वैसी देष भर में जरूरत है। उन्होंने समता सन्देश द्वारा आयोजित लेखक सम्मेलन की भी मदद जारी रखने की घोषणा की।

बारहवें राष्ट्रीय लेखक सम्मेलन में मनीषी पं. जनार्दनराय नागर की राष्ट्रीय समता सम्मान 2012 भेंट किया गया। उनके पुत्र व राजस्थान विद्यापीठ के कुल प्रमुख प्रफुल्ल नागर ने यह सम्मान ग्रहण किया। उन्हें डॉ. रत्नाकर पाण्डे, डॉ. सुनील तथा डा.ॅ अजय गुप्ता ने शाल अभिनंदन पत्र व स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।

प्रफुल्ल नागर ने कहा कि महावीर समता संदेश भी उन्हीं लक्ष्यों के लिए काम कर रहा है जिनके लिए पं. नागर ने अपना सर्वस्व लगा दिया। पं. नागर के सम्मान पत्र का वाचन जाने माने शायर आबिद ‘‘अदीब’’ ने किया। इसी प्रकार डॉ. रत्नाकर पाण्डे को भी राष्ट्रीय समता सम्मन 2012 से सम्मानित किया गया। जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ के चांसलर भवानी शंकर गर्ग ने शॉल ओढ़ाकर, डॉ. सुनीलम ने स्मृति चिह्न व अभिनंदन पत्र देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम के प्रारंभ में जनकवि हंसराज चौधरी ने गीत प्रस्तुत किया तथा प्रो. हेमेन्द्र चण्डालिया ने महेश्वर की कविता का पाठ किया। उद्घाटन सत्र में डॉ. हेमेन्द्र चण्डालिया द्वारा सम्पदित ‘‘मनीषी पं. जनार्दनराय नागर: शताब्दी स्मरण’’ पुस्तक लोकार्पण किया गया। साथ ही डॉ. धर्मचन्द मेहता ‘‘राशि’’ की कविता पुस्तक ‘‘कागज ब्रह्मास्त्र का भी लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम के अंत में साहित्य संस्थान के निदेशक डॉ. जीवनसिंह खरकवाल ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि हाशिए पर जो लोग है वही दस हजार वर्षों से उस ज्ञान को संचित किया है जो समय की कसौटी पर परखा गया है व सन्य साबित हुआ है। सायंकाल मोहन सिंह मेहता मेमोरियल ट्रस्ट में संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-
हिम्मत सेठ

वरिष्ठ साथी पत्रकार,
उदयपुर से प्रकाशित 'समता सन्देश' 
पत्र के सम्पादक और 
समतावादी लेखक हिम्मत सेठ

फोन: 0294-2413423,  मो. 94606.93560



डॉ. हेमेन्द्र चण्डालिया 
समता लेखक सम्मलेन
आयोजन सचिव मो.  09460822818
प्रकाशकीय कार्यालय
एफ-30, भूपालपुरा, उदयपुर-313001
SocialTwist Tell-a-Friend
Share this article :

0 comments:

Speak up your mind

Tell us what you're thinking... !

संस्थापक:माणिक

संस्थापक:माणिक
अपनी माटी ई-पत्रिका

सम्पादक:जितेन्द्र यादव

सम्पादक:जितेन्द्र यादव
अपनी माटी ई-पत्रिका

एक ज़रूरी ब्लॉग

एक ज़रूरी ब्लॉग
बसेड़ा की डायरी:माणिक

यहाँ आपका स्वागत है



ज्यादा पढ़ी गई रचना

यहाँ क्लिक करके हमारी डाक नि:शुल्क पाएं

Donate Apni Maati

रचनाएं यहाँ खोजिएगा

हमारे पाठक साथी

सम्पादक मंडल

साहित्य-संस्कृति की त्रैमासिक ई-पत्रिका
'अपनी माटी'
========
प्रधान सम्पादक
सम्पादक
सह सम्पादक
तकनिकी प्रबंधक
========
संपर्क
apnimaati.com@gmail.com
========

ऑनलाइन

Donate Us

 
Template Design by Creating Website Published by Mas Template