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बाल फिल्मोत्सव,मुंगेर:-ज्ञानप्रद फिल्मों का अभाव है।

Written By 'अपनी माटी' मासिक ई-पत्रिका (www.ApniMaati.com) on शुक्रवार, फ़रवरी 10, 2012 | शुक्रवार, फ़रवरी 10, 2012


मुंगेर (10 फरवरी 2012)
बाल फिल्म सोसायटी और सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग के संयुक्त तत्वावधान में जिला जन सम्पर्क कार्यालय मुंगेर द्वारा आयोजित तीन दिवसीय फिल्म महोत्सव मुंगेर के ऐतिहासिक नीलम सिनेमा हॉल में आज शुरू हुआ। तीन दिवसीय बाल फिल्म महोत्सव का उद्घाटन मुंगेर के जिला पदाधिकारी कुलदीप नारायण ने दीप प्रज्जवलित कर किया। अपने उद्घाटन संबोधन में उन्होंने कहा कि इस आयोजन का मुख्य मकसद बच्चों को स्वस्थ मनोरंजन तथा ज्ञान प्रदान करना है। आज जब सिनेमा घरों तथा दूरदर्शन के विभिन्न चैनलों पर व्यवसायिक फिल्मों की भरमार है और ज्ञानप्रद फिल्मों का अभाव है। ऐसे में बाल फिल्म महोत्सव का आयोजन मुंगेर के बच्चों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा। जिला पदाधिकारी ने फिल्म देखने आए बच्चों का आवाह्न किया कि प्रदर्शित फिल्मों के संदेश को जीवन में उतारें और बेहतर नागरिक बनने का प्रयास करें।

उन्होंने इस अवसर पर प्रकाशित फिल्मों की विवरणी का भी विमोचन किया। समारोह को संबोधित करते हुए सूचना जन सम्पर्क विभाग के उप निदेशक डा.रामनिवास पाण्डेय ने कहा कि बाल फिल्म महोत्सव सोसायटी का मकसद बच्चों के लिए फिल्में बनाना, उनका वितरण करना तथा उसे प्रदर्शित करना है। सूचना जन सम्पर्क विभाग और सोसायटी के साझा प्रयास से पूरे बिहार के लिए फिल्मों के प्रदर्शन की रूप रेखा तैयार की गयी है। इसी रूप रेखा के तहत मुंगेर में आयोजित तीन दिवसीय बाल फिल्म महोत्सव है। इस बाल फिल्म महोत्सव से यहां के बच्चे संदेश लेकर जाएंगे। 

जिला शिक्षा पदाधिकारी अरूण कुमार कुंवर ने समारोह को संबोधित करते हुए बताया कि इस बाल फिल्म महोत्सव में मुंगेर के विभिन्न मध्य विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को बुलाया गया है। विशेष कर अनुसूचित जाति एवं अल्पसंख्यक तथा अभिवंचित वर्ग के बच्चों को इस महोत्सव के लिए आमंत्रित किया गया है। छात्र प्रदर्शित की जाने वाली फिल्मों से प्रेरणा लेंगे एवं उसका लाभ उठाएंगे। समारोह को संबोधित करते हुए सुप्रसिद्ध पत्रकार चंद्रशेखरम ने बच्चों को फिल्मों के आविष्कार के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी तथा फिल्मों की आधुनिक तकनीकी एवं जीवन में पड़ने वाले प्रभावों से भी उन्हें अवगत कराया। जिला पदाधिकारी कुलदीप नारायण के अतिरिक्त बड़ी संख्या में पदाधिकारी, पत्रकार एवं समाज के अन्य वर्गां के अतिरिक्त लगभग दो हजार स्कूली बच्चों ने फिल्में देखीं। लोगों ने सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग की इस पहल को सराहा तथा कहा कि इस तरह के महोत्सव बार-बार आयोजित होने चाहिए।

फिल्म प्रदर्शन की शुरूआत सुनील आडवाणी द्वारा निर्देशित फिल्म एक अजूबा से हुई। सुनील आडवाणी बाल फिल्मों के लिए जाने-माने निदेशक हैं जिनके कई वृŸा-चित्र तथा मेडिकल एवं अन्य विषयों पर आधारित फिल्में चर्चित हुई हैं। एक अजूबा फिल्म बाल मनोविज्ञान पर आधारित है। फिल्म में यह दर्शाया गया है कि बच्चों की मानसिकता को कैसे सुंदर तरीके से परिवर्तित किया गया है। फिल्म की कहानी इस प्रकार है: चित्रा एक गंभीर विद्यार्थी है, जो इस बात से दुखी है कि उसे कभी कक्षा में प्रथम स्थान नहीं प्राप्त हुआ चाहे वो कितना भी कठिन प्रयास क्यों न करे मदद के रूप में गुरूजी जो परिवार के मित्र एवं दार्शनिक हैं का आगमन होता है। वे चित्रा को पवित्र भभूत देते हैं जो उसमें अपनी स्पप्न को पाने के लिए विश्वास भर देगा, लेकिन वहां भी उसके भाई एवं उसका एक बदमाश मित्र रतन गुरूजी द्वारा दिए गए भभूत को चुराकर अपनी जिंदगी सरल बनाने की योजना बनाते हैं। उनका प्रयास शुन्य में बदल जाता है जब यह पता चलता है कि पवित्र भभूत कुछ नहीं है बल्कि स्थानीय धोबी के आयरन का अवशेष है। क्या चित्रा सफल होती है। 

इसी कड़ी में रामरजा रमजा द्वारा निदेशित हयात फिल्म दिखायी गयी जो 12 वर्षीय लड़की की संघर्षशीलता की दास्तान है। हयात वैसी लड़की है जो आसानी से हार मानने वाली नहीं। हयात का मतलब ही जिंदगी है। आज के बाल फिल्म महोत्सव की अंतिम फिल्म संतोष सिवन की फिल्म हैलो मुंबई की तंग गलियों में घूम रही 7 वर्षीय एक लड़की शशा की कहानी है। जिसके पिता पेशे से क्रिमनल वकील हैं जो शपथ के बगैर भी झूठ बोलने से इंकार करते हैं। एक नौकर जो हमेशा प्रेम में लिप्त रहता है इस फिल्म को मजेदार बनाते हैं।

बाल फिल्म महोत्सव के पहले दिन मध्य विद्यालय लालदरवाजा, आदर्श मध्य विद्यालय बेकापुर, कन्या मध्य विद्यालय माधोपुर, कन्या मध्य विद्यालय मनिया चौराहा तथा मध्य विद्यालय गुलजार पोखर के छात्रों के साथ अनुसूचित जाति आवासीय मध्य विद्यालय मुंगेर की छात्राओं ने भी फिल्मों को देखा। फिल्म महोत्सव की खासियत रही कि आस-पास के ऐसे बच्चे जो न तो दूरदर्शन पर फिल्म देख पाते हैं न ही सिनेमाघरों में, वैसे बच्चों ने भी फिल्मों को देखा। इस मौके पर बड़ी संख्या में पत्रकार, शहर के गणमान्य व्यक्ति तथा पूर्व प्राचार्या मृदुला झा, प्रगतिशील लेखक संघ के प्रो.शब्बीर हसन, उद्यन परिषद के जे.पी.पॉल सहित जन सम्पर्क विभाग के कर्मी उपस्थित थे।

दूजे दिन का हवाला


मुंगेर स्थित नीलम सिनेमा हॉल में दो दिनों से चल रहे बाल फिल्म महोत्सव में आज छात्रों की अपार भीड़ के कारण चार शो  में फिल्मों का प्रदर्शन कराया गया। आज के कार्यक्रम का शुभारंभ मुंगेर प्रमंडल के जन सम्पर्क उपनिदेषक डा.रामनिवास पाण्डेय द्वारा किया गया। आज कन्या मध्य विद्यालय लालदरवाजा, मध्य विद्यालय वासुदेवपुर, कन्या मध्य विद्यालय छोटी केलाबाड़ी, अभ्यास मध्य विद्यालय पूरबसराय, मध्य विद्यालय कौड़ा मैदान, मध्य विद्यालय मकसुसपुर, कन्या मध्य विद्यालय मकसुसपुर, मध्य विद्यालय श्रीमतपुर एवं कन्या मध्य विद्यालय वासुदेवपुर के लगभग दो हजार छात्रों ने क्रमशः लिलकी, क्रिस-ट्रिस-बाल्टी ब्वाय एवं द्विभाशी फिल्म को देखा। बच्चों में फिल्म देखने के प्रति अपार उत्साह देखा गया।

आज के फिल्म प्रदर्शन की एक विषेशता रही कि तीन शो के प्रदर्शन के बाद भी सरस्वती शिशु मंदिर विद्यालय, सादीपुर के लगभग 200 बच्चे फिल्म देखने के लिए आ गए। नीलम सिनेमा के प्रोपराइटर कुन्दन कुमार ने बच्चों के उत्साह एवं आग्रह को देखते हुए चौथा शो भी कराया और बच्चे हर्षतिरेक के साथ फिल्मों का आनंद उठाया।

मुंगेर प्रमंडल के उपनिदेशक  जन सम्पर्क डा.रामनिवास पाण्डेय ने आज बताया कि तीन दिवसीय बाल फिल्म महोत्सव का आयोजन जिला जन सम्पर्क कार्यालय मुंगेर द्वारा कराया जा रहा है जिसका समापन रविवार 12 फरवरी को होगा जिसमें संकल्प महेष राम द्वारा निदेशित छुटकन की महाभारत, संतोष सिवन द्वारा निर्देशित माली एवं राजीव मोहन निदेषित बान्डू बॉक्सर का प्रदर्षन किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि मुंगेर में फिल्म देखने के प्रति बच्चों का उत्साह देखने लायक है। इसके लिए अधिक बच्चों के बैठने की अतिरिक्त व्यवस्था की गयी है।

फिल्मों के संबंध में बताते हुए डा.पाण्डेय ने कहा कि छुटकन की महाभारत एक बच्चे द्वारा स्वप्न में देखी गयी घटना का उल्लेख है जिसमें युधिष्ठिर से चौसर के खेल में जीतने के उपरांत शकुनी मामा एवं दुर्याधन का हृदय परिवर्तन हो जाता है और वे अपने कार्यां के लिए क्षमा मांगते हैं तथा राजपाट के अपने दावे को त्याग देते हैं। इस तरह महाभारत शुरू होने के पूर्व ही खत्म हो जाता है। इसी तरह माली एक दस वर्षीय लड़की द्वारा आत्मा को बुलाने के प्रयास की असफल कहानी है जिसने एक घायल पक्षी का उपचार करा कर उसे पक्षी समूह के बीच मुक्त कर दिया और उसे तत्क्षण एक नीला मोती प्राप्त हुआ जो उसके स्वप्न को साकार करने का संकेत था। इसी तरह बान्डू बॉक्सर एक छात्र के संकल्पित लक्ष्य की कहानी है जो अपनी मेहनत के बल पर जीवन में उपलब्धि प्राप्त करता है।

योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-




सज्जन कुमार गर्ग
द्वारा हरिश्चन्द्र गर्ग
सदर बाजार मारवाड़ी मोहल्ला
पोस्ट-जमालपुर
जिला-मुंगेर
मो0-09931554140
garg.sajjan@gmail.com
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