युवा फिल्म समीक्षक मिहिर पंड्या की किताब 'शहर और सिनेमा वाया दिल्ली ' - अपनी माटी

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गुरुवार, मार्च 29, 2012

युवा फिल्म समीक्षक मिहिर पंड्या की किताब 'शहर और सिनेमा वाया दिल्ली '




(वाणी प्रकाशन से आने
वाली किताब,
मूल्य चार सौ पिचानवें)
 
इतिहास के भग्नावशेष उसके प्यार की अनगढ़ कहानियाँ बन जाते हैं और कैम्पस की चौड़ी सड़कों के किनारे बनी पत्थर की सीढ़ियाँ इन्तजार की अनगिनत शामों की हमसफ़र / प्रेम के भिन्न रूप यहाँ मिलते हैं और किस तरह यह शहर प्रेम के सामने पड़ने पर अपने रंग बदलता है,देखा जाना चाहिए

पुस्तक के संदर्भ में....
इसी सत्ता के शहर में एक लड़की प्यार करती है/ असंभाव्य प्यार और अपने वर्जित कृत्य के लिए इस भीड़ भरे शहर से एक निर्जन कोना चुरा लेती है/ इतिहास के भग्नावशेष उसके प्यार की अनगढ़ कहानियाँ बन जाते हैं और कैम्पस की चौड़ी सड़कों के किनारे बनी पत्थर की सीढ़ियाँ इन्तजार की अनगिनत शामों की हमसफ़र/ इस महानगर राजधानी के हृहयस्थल पर घूमते हुए एक और लड़की ने कभी मुझे बताया था कि उसे यह भीड़ बहुत पसंद है/ जिसमें कोई किसी को नहीं पहचानता हो / जिसमें उसका खो जाना संभव हो /रोज़मर्रा का शहर / एक चोर की कथा के मार्फ़त आप इस बीहड़ के भीतर प्रविष्ट होते हैं और भिन्न कालों में भिन्न यारों की टोलियाँ आपको इस शहर में प्रेम और विद्रोह के असल मायने समझती हैं/

लेखक के संदर्भ में .....(मिहिर पंड्या )
मिहिर पंड्या का जन्म 2 सितम्बर 1985 (उदयपुर) राजस्थान में हुआ / बी.. के दौरान खेल पर एक अखबारी कॉलम से लेखन की शुरुआत / दिल्ली विश्वविद्यालय से एम..,एम. फिल./ एम..के दौरान गाँधी की सिनेमाई संरचना पर शोध कार्य/ वर्तमान में दिल्ली विश्वविद्यालय में जूनियर रिसर्च फैलो /

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