तमाम जद्दोजहद के बीच नैतिकता-अनैतिकता - अपनी माटी ई-पत्रिका

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका('ISSN 2322-0724 Apni Maati')

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तमाम जद्दोजहद के बीच नैतिकता-अनैतिकता


डॉक्टर ग्लास : जलमार सॉडरबैरिये

'डॉक्टर ग्लासउन्नीसवीं सदी के अवसान काल के दौरान स्टॉकहोम नगर में घटित एक अनोखी प्रेम कहानी के परित: चलता स्वीडिश भाषा का यादगार उपन्यास है। डॉक्टर ग्लास जो कि पेशे से चिकित्सक (सर्जन) है एक बूढ़े पादरी की नवयौवना खूबसूरत बीवी के प्रति आसक्त हो जाता है। यह आसक्ति डॉक्टर ग्लास की मानसिक स्थिति मात्र ही नहीं बदलती, उसके दैनंदिन जीवन और व्यवहार को भी बदलने में उत्प्रेरक सिद्ध होती है। नायिका (मिसिज ग्रिगोरियस) डॉक्टर से यह गुजारिश करती है कि वह कुछ ऐसी बीमारी उसे बताए और इस बाबत पादरी को ऐसा सलाह दे कि पादरी अपनी बीवी मिसिज ग्रिगोरियस की देह से दूर रहे। थोड़े असमंजस के बाद डॉक्टर मान जाता है। और तब ऐसा करते-करते एक दिन उस पादरी को दवा के नाम पर ज़हर तक दे डालता है।
                तमाम जद्दोजहद के बीच नैतिकता-अनैतिकता, जायज-नाजायज, धर्म-अध्यात्म आदि को लेकर डॉक्टर ग्लास लंबे अंतद्र्वंद्वों से गुज़रता है और आखिर पाता है कि वह जिस खूबसूरत स्त्री के प्रति इतने घनघोर प्रेम  और सपने पाल रखा था वह उसके प्रेम में नहीं है। अपनी खूबसूरती से चकाचौंध पैदा करने वाली मिसिज ग्रिगोरियस की निजी ज़िंदगी और उसकी अपनी प्रेम कहानी का सच इस उपन्यास का चरम है।

                लगभग सवा सौ वर्ष पहले के स्टॉकहोम, उसकी खूबसूरती और नगर-व्यवस्था आदि का वर्णन डायरी शैली में लिखे पत्रकार-नाट्ïयकार ज़लमार सॉडरबैरिए के इस उपन्यास को ज़्यादा विश्वसनीय और महत्त्वपूर्ण बनाता है। मूल स्वीडिश में 1905 में छपे इस उपन्यास का कई भाषाओं में अनुवाद, नाट्यांतरण के अलावा इस पर बनी फिल्म भी का$फी चर्चित और सराहनीय रही है।

ज़लमार सॉडरबैरिए
कथाकार-उपन्यासकार, कवि और नाटककार ज़लमार सॉडरबैरिए (Hzalmar Soderberge) का जन्म 02 जुलाई, 1869 को हुआ। मूल स्वीडिश में 1905 में प्रकाशित 'डॉक्टर ग्लासका अंग्रेज़ी अनुवाद 1963 में आया फिर इस पर फिल्म भी बनी। स्वीडिश भाषा में इनकी दो दर्जन से ज़्यादा कृतियाँ उपलब्ध हैं जिनमें से आधा दर्जन से ज़्यादा किताबें अंग्रेज़ी में भी उपलब्ध हैं। उपन्यासकार सॉडरबैरिए पत्रकार के रूप में भी चर्चित रहे हैं। 14 अक्टूबर, 1941 को इनकी मृत्यु हुई।

द्रोणवीर कोहली
नौ मौलिक उपन्यासों एवं एक कहानी-संग्रह के रचयिता एवं संपादक द्रोणवीर कोहली अच्छे अनुवादक भी हैं।  फ्रेंच लेखक एमील ज़ोला के वृहद उपन्यास 'जर्मिनलका 'उम्मीद है, आएगा वह दिनशीर्षक से अनुवाद करने के अतिरिक्त इन्होंने समय-समय पर विश्व प्रसिद्ध कई रचनाकारों की रचनाओं को भी हिंदी में प्रस्तुत किया है।इनका जन्म 1932 के आसपास हुआ। 'आजकल’, 'बाल भारती’, 'सैनिक समाचारसाप्ताहिक के संपादक तथा आकाशवाणी में वरिष्ठ संवाददाता एवं प्रभारी समाचार संपादक की हैसियत से भी कार्य कर चुके हैं।


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