महाराज शिवदान सिंह 'कारोही' के कुछ दोहे - अपनी माटी

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सोमवार, मार्च 05, 2012

महाराज शिवदान सिंह 'कारोही' के कुछ दोहे


पथ वेतो चालां,अरे पथ तो चाल्या रचे /
कई करां पेली पथ रचणा, के चालणा //

आता को स्वागत करो,जाता ने पदराह /
ई जपाड़ में मत पड़ो,कुण आवे कुण जा //

ई जाता तो दो दीखरया,पग मंडरया ईक का /
दूजो वामें ही पग मेलारयो,मती न माथो खा //

जब तूफ़ान में न था,तो तूफ़ान का डर था /
अब तूफ़ान में हूँ तो अब डर किसका //




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