डॉ. कनक जैन से माणिक की लम्बी बातचीत - अपनी माटी

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शनिवार, अप्रैल 14, 2012

डॉ. कनक जैन से माणिक की लम्बी बातचीत


डॉ.कनक जैन


प्रतापगढ़ की आदिवासी तहसील अरनोद के दलोट गाँव  में पले-बढ़े जहां छट्टी कक्षा से ही साहित्यिक पृष्ठभूमि की बाल पत्रिकाओं के चक्कर में गए.बाद के सालों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् जैसे छात्र आन्दोलन में भी अनेक दायित्व निभाएं.कोलेज के ठीक बाद पत्रकारिता में भी हाथ साफ़ किया.

चित्तौडगढ की साहित्यिक संस्था संभावना के सह संयोजक और बनास जन जैसी लघु पत्रिका के प्रबधसम्पादक है.यादवेन्द्र शर्मा 'चन्द्र' के साहित्य और कृतित्व पर शोध किया है.वर्तमान में स्कूल शिक्षा में हिन्दी के प्राध्यापक हैं.

नगर में संचालित ठीक-ठाक विचारों की सामाजिक/सांस्कृतिक संस्थाओं के आयोजनों में आपका आना जाना है.मूल रूप से विज्ञान के छात्र है मगर हिन्दी के नाम से ख़ास पहचान है.मोबाईल--9413641775






कनक जी से माणिक की बातचीत का ये ऑडियो आपको कनक जी के बारे में बहुत कुछ कहेगा.उनके बचपन,कोलेज के दिन हो या साहित्य के इलाके में उनके दखल के बारे में.इसके ज़रिये उनके विचार जान सकेंगे.

माणिक,
इतिहास में स्नातकोत्तर.बाद के सालों में बी.एड./ वर्तमान में राजस्थान सरकार के पंचायतीराज विभाग में अध्यापक हैं.'अपनी माटी' वेबपत्रिका पूर्व सम्पादक है,साथ ही आकाशवाणी चित्तौड़ के ऍफ़.एम्. 'मीरा' चैनल के लिए पिछले पांच सालों से बतौर नैमित्तिक उदघोषक प्रसारित हो रहे हैं.उनकी कवितायेँ आदि उनके ब्लॉग 'माणिकनामा' पर पढी जा सकती है.

मन बहलाने के लिए चित्तौड़ के युवा संस्कृतिकर्मी कह लो.सालों स्पिक मैके नामक सांकृतिक आन्दोलन की राजस्थान इकाई में प्रमुख दायित्व पर रहे.आजकल सभी दायित्वों से मुक्त पढ़ने-लिखने में लगे हैं.वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय,कोटा से हिन्दी में स्नातकोत्तर कर रहे हैं.किसी भी पत्र-पत्रिका में छपे नहीं है.अब तक कोई भी सम्मान.अवार्ड से नवाजे नहीं गए हैं.कुल मिलाकर मामूली आदमी है.




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