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''मैं बहुत अरसे तक इस भ्रम में रहा कि मैं औरों से बेहतर इन्सान हूं। ''-सूरज प्रकाश

Written By 'अपनी माटी' मासिक ई-पत्रिका (www.ApniMaati.com) on सोमवार, अप्रैल 30, 2012 | सोमवार, अप्रैल 30, 2012

कथाकार सूरज प्रकाश 
सूरज प्रकाश यों तो एक जानामाना नाम है,मगर ऐसे लोकप्रिय व्यक्तित्व खुद अपने बारें में क्या नज़र रखते हैं,जानते हैं खुद सूरज प्रकाश जी की जुबानी -सम्पादक 

हम अक्सर दर्पण नहीं देखते इसलिए अपने आपको बहुत कम पहचानते हैं। और कहीं हमें दर्पण देखने की लत लग जाये तो हम अपने आपको इतना ज्यादा जानने-पहचानने लगते हैं कि अपने और सिर्फ अपने बारे में घंटों, दिनों और महीनों तक अच्छी अच्छी बात करते रह सकते हैं। भला हमारी निगाह में हमसे बेहतर कथा नायक कौन हो सकता है। दोनों ही स्थितियों में हम खुद  भी अंधेरे में रहते हैं और सामने वाले को भी अंधेरे में रखते हैं।

मैं बहुत अरसे तक इस भ्रम में रहा कि मैं औरों से बेहतर इन्सान हूं। सही समझ रखता हूं, सही वक्त पर सही फैसले करता हूं और संतुलित जीवन जीता हूं। मैं ये भी मान कर चलता रहा कि मैं टुच्चा तो नहीं ही हूं बेशक कुछेक कमज़ोरियां मुझ में रही हों। मैं इस मु्गालते में भी रहा कि जिस तरह मैं अपनी निगाह में बेहतर इन्सान हूं, दूसरों की निगाह में भी मैं उतना ही श्रेष्ठ, बेहतरीन और अनुकरणीय हूं।


लेकिन मैं जल्दी ही धरती पर उतर आया और तब से अपने बारे में, अपने लेखन के बारे में और अपने किये और न किये गये कामों के बारे में अब कोई भ्रम नहीं पालता। मैं ये स्वीकार करता हूं कि मैं पूरे जीवन में कोई भी बड़ा तीर नहीं मार सका और न ही मैंने अपने लेखन के ज़रिये कोई क्रांति ही की है। मुझे जितने लोग चाहने वाले हैं, उससे ज्यादा न चाहने वाले होंगे। मैं सीधा सादा जीवन जीता हूं और संतुष्ट रहता हूं। मैंने देखा है कि दुनिया में एक से बढ़ कर एक तीस मार खां भरे पड़े हैं और अपुन की कहीं कोई गिनती नहीं है। हां, इतना ज़रूर है कि ईमानदार जीवन जीया अपनी सामर्थ्य भर परिवार, समाज और देश के प्रति अपने छोटे मोटे कर्तव्य निभाता रहा। बेशक दूसरों के लिए ज्यादा काम करना चाहिये था और कर भी सकता था।


पैंतीस बरस की उम्र में लिखना शुरू किया। अब तक तीस पैंतीस कहानियां, पचास के करीब व्यंग्य, दो उपन्यास और तीस चालीस लघु कथाएं लिखीं। अंग्रेज़ी और गुजराती से कुछेक महत्वपूर्ण किताबों के अनुवाद किये। कुछेक किताबों का संपादन किया। रेडियो, दूरदर्शन पर भागीदारी की। कहानी संग्रह और उपन्यास पर एमफिल और पीएचडी के लिए कार्य हुए। कुछ कहानियां दूरदर्शन पर आयीं। एक बहुत बड़ा पाठक वर्ग मेरे हिस्से में भी आया बेशक दोस्त कम ही रहे। अकेलापन हमेशा रास आया। यायावरी भी की और खूब पढ़ा भी। फिल्में देखने का चस्का बीच बीच में ज़ोर मारता रहता है। शास्त्रीय संगीत सुनना भला लगता है। बच्चों का साथ भी। आत्म कथाएं और प्रेम कहानियां पढ़ना हमेशा अच्छा लगता है।


कुछेक शौक ज़रूर पूरे किये बेशक जो शौक कभी पूरे न करे सका, उनकी सूची लम्बी है और उसका मलाल हमेशा सालता रहेगा। पतंग उड़ानी अगर बयालीस बरस की उम्र में सीखी तो नाचना छप्पन बरस की उम्र में और सच कहूं नाच के जो आनन्द आया, उसे बयान नहीं किया जा सकता। पहाड़ों की खूब ट्रैकिंग की। कथा यूके से जुड़ा हुआ हूं और उसके लिए काम करने में सुकून मिलता है।तो भई ये ही अपनी राम कहानी है। जो कुछ रच पाया, वह यहीं इन्हीं पन्नों पर आस पास बिखरा हुआ है। हो सकता है, आपको बांधे रखे कुछ देर के लिए। आमीन..




  • मैंने बेशक देर से लिखना शुरू किया लेकिन इतना काम कर लिया है‍कि अब देरी से लिखने का मलाल नहीं सालता। बेशक चालीस के करीब कहानियां लिखी होंगी अब तक मेरे दो कहानी संग्रह हैं - अधूरी तस्वीर (1992) और छूटे हुए घर – (2002) तीसरा कहानी संग्रह प्रकाशक की तलाश में दिल्‍ली में भटक रहा है।

  • मेरे दो ही उपन्‍यास हैं- हादसों के बीच (1998) और देस बिराना (2002)।

  • इनके अलावा मेरा एक व्‍यंग्‍य संग्रह है - ज़रा संभल के चलो जो 2002 में छपा था।

  • मेरा एक कहानी संग्रह गुजराती में भी है - साचा सर नामे जो 1996 में छपा था।

  • मूल लेखन के अलावा मैंने गुजराती और अंग्रेज़ी से बहुत अनुवाद किये हैं और इस काम में मुझे संतोष भी बहुत मिला है।

  • अंग्रेज़ी से जो अनुवाद किये, वे हैं - जॉर्ज आर्वेल का उपन्यास एनिमल फार्म, गैब्रियल गार्सिया मार्खेज के उपन्यास Chronicle of a death foretold का अनुवाद, चार्ली चैप्लिन की आत्म कथा  का अनुवाद जो 2006 में आधार प्रकाशन से छपा। चार्ल्स डार्विन की आत्म कथा का अनुवाद जो NCERT से 2009 में छपा। मिलेना  (जीवनी) का अनुवाद   2004 में छपा। ऐन फ्रैंक की डायरी का अनुवाद 2002 में छपा। इनके अलावा कई विश्व प्रसिद्ध कहानियों के अनुवाद प्रकाशित होते रहे।

  • गुजराती से अनुवादों में व्यंग्यकार विनोद भट की तीन पुस्तकें, गुजराती के महान शिक्षा शास्‍त्री गिजू भाई बधेका की दो पुस्तकें दिवा स्वप्न और मां बाप से  का तथा दो सौ बाल कहानियां अनुवाद के जरिये हिंदी पाठकों तक पहुंचीं। दिनकर जोशी के उपन्यास प्रकाशनो पडछायो का अनुवाद किया। ये उपन्‍यास गांधी जी के बड़े बेटे हरिलाल के जीवन पर आधारित है। 

  • मैंने लगभग 9 पुस्‍तकों का संपादन किया है। साहित्‍य के अलावा 6 पुस्‍तकों का संपादन अपनी नौकरी के सिलसिले में किया। बंबई 1, बंबई पर आधारित कहानियों का संग्रह है, कथा लंदन यूके में लिखी जा रही हिन्दी कहानियों का संग्रह है और कथा दशक कथा यूके से सम्मानित 10 रचनाकारों की कहानियों का संग्रह है। 

  • रिज़र्व बैंक के लिए जिन 6 पुस्‍तकों का सम्‍पादन किया, वे हैं 1. लघु वित्‍त 2. रिटेल बैंकिंग3. एसएमई 4. कृषि व्‍यापार एवं निर्यात, 5. नेतृत्‍व और 6. ग्राहक सेवा

  • मेरे लिखे शब्‍दों को जो सम्‍मान मिले, वे हैं गुजरात साहित्य अकादमी का सम्मान और महाराष्ट्र अकादमी का सम्मान। इनके अलावा 2009 में मुंबई की संस्‍था आशीर्वाद की और से सारस्‍वत सम्‍मान। 

  • रेडियो पर प्रसारण लगभग 30 बरस से अनवरत। कई कहानियों का रेडियो पर प्रसारण

  • दूरदर्शन के कई केन्‍द्रों पर साक्षात्‍कार आदि का प्रसारण। इनके अलावा छोटे नवाब और बड़े नवाब तथा डर कहानियों का दूरदर्शन पर फिल्‍म के रूप में प्रदर्शन

  • ऑडियो के रूप में उपन्‍यास देस बिराना का नेशनल इंस्‍टीट्यूट फार ब्‍लाइंड द्वारा दृष्टिहीनों के लिए रिकार्डिंग तथा प्रसारण और यही उपन्‍यास देस बिराना लंदन की एक संस्‍था एशियन कम्‍यूनिटी आर्ट्स द्वारा ऑडियो सीडी के रूप में जारी।

  • कई शहरों में गोष्ठियों और मित्र मंडलियों में कहानी पाठ
विशेष उपलब्धियों में         
  • कहानी संग्रह छूटे हुए घर पर रोहतक विश्‍वविद्यालय की छात्रा द्वारा एम फिल के लिए शोधकार्य
  • उपन्‍यास देस बिराना पंजाब विश्‍वविद्यालय और चेन्‍नै विश्‍वविद्यालय की दो छात्राओं द्वारा पीएच डी के लिए शोध कार्य में शामिल 
  • कहानियां विभिन्न संग्रहों में प्रकाशित
  • कहानियों के दूसरी भाषाओं में अनुवाद प्रकाशित
  • पिछले 32 बरस से हिन्दी और अनुवाद से निकट का नाता
  • अंतर्राष्‍ट्रीय साहित्यिक संस्‍था कथा यूके के भारतीय प्रतिनिधि और उसकी गतिविधियों से निकट का नाता। कथा यूके के लंदन में होने वाले सम्‍मान समारोहों में पाँच बार भागीदारी।
मेरे शौक हैं-घूमना, ट्रैकिंग, संगीत सुनना, फिल्‍में देखना, आत्‍मकथाएं और प्रेम कहानियां पढ़ना और अपने अकेलेपन में मस्‍त रहना
परिवार में पत्‍नी मधु और दो बेटे अभिजित और अभिज्ञान
मेरे दो ब्‍लॉग हैं-    



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