बांग्ला साहित्य वाया भागलपुर - अपनी माटी 'ISSN 2322-0724 Apni Maati'

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित ई-पत्रिका

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बांग्ला साहित्य वाया भागलपुर


                     भागलपुर :जहाँ बही अंग -बंग संस्कृति की धार

ऐतिहासिक , भौगोलिक एवं आर्थिक कारणों सेअंगदेशके नाम से प्रसिद्द भागलपुर की भूमिबंगअर्थात बंगाल की साँझा संस्कृति और साहित्यिक गतिविधियों के केंद्र में रही है ! बांग्ला साहित्य में इतिहास का एक दौर  ऐसा भी आया जब भागलपुर  की पहचानसाहित्य तीर्थके रूप में होने लगी  और यहाँ रहकर बांग्ला के मूर्धन्य साहित्यकारों  सिर्फ अपनी लेखनी से समृद्ध किया, वरन  उसे एक नयी दिशा भी दी! भागलपुर को बांग्ला साहित्य के फलक पर प्रतिष्ठित करने में अमर कथाशिल्पी शरतचंद्र सहित बलायचंद मुखोपाध्यायबनफूल’ , विभूतिभूषण बंधोपाध्याय , निरुपमा  देवी, आशालता देवी आदि के नाम उल्लेखनीय हैं !

भागलपुर जैसेठेटबिहारी क्षेत्र का बांग्ला साहित्य के इतिहास में चर्चित स्थान प्राप्त कर लेना  वाकई महत्वपूर्ण बात है ! इस परिप्रेक्षय में सन 1907 में घटी एक घटना का जिक्र करना लाजिमी है जिसने पूरा पारिदृश्य ही बदल डाला ! वर्ष 1907 में बांग्ला  की प्रतिष्ठित पत्रिकाभारतीमें एक उपन्यास प्रकाशित हुआ था – ‘बोड़ो दीदी’ ( बड़ी दीदी ), जिसमें  इसके लेखक का नाम नहीं दिया  गया था ! इस उपन्यास ने बांग्ला पाठकों के बीच सनसनी फैला दी !

नारी मनोविज्ञान की दिल को छू लेनेवाली संवेदना के साथ जिस  तरह इसमें चित्रण किया गया था, लोगों ने यही  अनुमान लगाया की यह रवीन्द्र  नाथ टैगोर जैसी बिभूति को छोड किसी अन्य की कृति हो ही नहीं सकती ! किन्तु जब रवीन्द्रनाथ  से पूछा गया तो उन्होंने इंकार करते हुए कहा कि ऐसे रचनाकार को मैं बांग्ला साहित्य की मुख्यधारा में देखना चाहता  हूँ ! बाद में लोगों ने यह जाना कि इसके रचनाकार कोई कोलकाता निवासी नहीं, भागलपुर के रहने वाले हैं!और, इस तरह भागलपुर का नाम बांग्ला साहित्य में प्रकाश में आया ! ‘बोडो दीदीउपन्यास के लेखक और कोई नहींआवरा मसीहाशरतचंद्र थे ! ‘भारतीपत्रिका की संपादिका सरला देवी इस उपन्यास को चार अंकों में प्रकाशित करना चाहती थीं और पाठकों की उत्सुकता को जगाने की मंशा से प्रथम किश्त में उसके लेखक का नाम प्रकाशित नहीं किया था
 
नौवीं शताब्दी के प्रारंभ से ही कोलकाता बांग्ला सृजनात्मक लेखन का केंद्र बन गया था ! राजा राममोहन रॉय से लेकर मसुसूदन दत्त , बंकिमचंद्र ,गिरीश घोष, दीनबंधु मित्र , रवीन्द्रनाथ  - सभी प्रख्यात साहित्यकार कोलकाता के स्थायी निवासी थे !लेकिन भागलपुर से शरत का नाम इतनी प्रखरता से उभरा कि पूरे बांग्लासाहित्य पर छा गया  और भागलपुर का नाम पूरी विशिष्टत्ता के साथ स्थापित हो गया ! भागलपुर की प्रमुखता का सिर्फ यही  कारण नहीं था कि यहाँ से कई प्रमुख लेखक उभरे ! भागलपुर में रचित शरत की महत्वपूर्ण रचनाओं ने बांग्ला साहित्य के भावी  लेखकों को एक नयी दिशा भी दी!शरत का बचपन गरीबी में बीता था ! जीवन की सच्चाई को उन्होंने नजदीक से देखा था ! उनकी लेखनी में नारी मन के अनछुए पहलुओं को उकेरने का माद्दा था !एक वेश्या का भी कोई चरित्र होता है, इससे लोगों को रूबरू कराया ! लोगों ने महसूस किया कि उनकी लेखनी उनके जीवन के करीब है ! आम लोगों के जीवन से इस तरह तादात्म्य स्थापित कर उन्होंने बांग्ला साहित्य में मत्वपूर्ण योगदान किया और भावी लेखन की मानों धारा ही बदल दी !

शरत की तरह भागलपुर की साहित्यिकभट्टीसे जो बांग्ला लेखक प्रखरता से उभरे उनमें बिभूतिभूषण बंधोपाध्याय , बनफूल, दिब्येंदू पालित, चंद्रगुप्त मौर्या के नाम प्रमुख हैं ! बांग्ला के सुप्रसिद्ध लेखक बिभूतिभूषण बंधोपाध्याय ने अपने भागलपुर प्रवास के दौरान यहाँ की मिट्टी के मर्म और आत्मा को जाना जो उनकीपथेर पचाली’, ‘अरण्यकसरीखी रचनाओं में   प्रतिबिंबित हुई ! भागलपुर के महत्वपूर्ण बांग्ला लेखकों में बनफूल के नाम से प्रसिद्द डाक्टर बलायचंद मुखोपाध्याय का नाम आता है जिनकी कृतिहाटे बाजारेपर तपन सिन्हा के निर्देशन में बनी फिल्म को कई राष्ट्रीय और अन्तराष्ट्रीय पुरस्कार मिले ! जगत तारिणी, किछुक क्षण , निर्मोख   , जंगम ,पथेर, भुवन सोम , श्री मधुसूदन आदि उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं! बांग्ला के एक अन्य प्रमुख लेखक दिव्येंदु पालित का बचपन भागलपुर में बीता जिन्हें यहाँ के सामान्य लोगों के सामजिक जीवन ने अत्यंत प्रभावित किया जो उनकी लेखनी में प्रतिबिंबित हुई ! आमरा, सोनाली जीवन , अनुसरण, मुन्नीर  सोंगे किछुक क्षण , अनुभव. धन आदि उनकी चर्चित कहानियां उपन्यास हैं !

भागलपुर की कुछ प्रख्यात बंग्ल्ब लेखिकाओं ने भी बांग्ला साहित्य के दिशा निर्धारण में विशिष्ट योगदान किये ! इनमें निरुपमा देवी और आशालता देवी के नाम प्रमुखता से आते हैं ! शरतचंद्र को अपना साहित्यिक गुरु माननेवाली निरुपमा देवी ने 1895-96 से लेखन कार्य प्रारंभ किया और दीदी, अन्नापूर्नार मंदिर, विधि लिपि आदि की  रचना की जो खास चर्चित हुए ! भागलपुर पली-बडी बांग्ला कि दूसरी महत्वपूर्ण  लेखिका आशालता देवी की रचनाओं के प्रशंसकों में गुरुदेव का भी नाम शुमार है! अमीतार  प्रेम, मानसी, आविर्भाव , कालिगेर माया,अन्तरजामी आदि उनकी महत्वपूर्ण रचनाए हैं ! भागलपुर के इन महत्वपूर्ण बांग्ला रचनाकारों ने कालक्रम में लेखनी की जो धार बहायी , उसके अश्क बांग्ला साहित्य  में आज भी दिखाई देते हैं !तभी तो तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर विभाग के पूर्व अध्यक्ष डाक्टर विनय कुमार महता का मानना है कि भागलपुर को यदि बांग्ला साहित्य काकेम्ब्रिजकहा जाय तो कोई अतिशंयोक्ति नहीं होगी !

 योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-
शिव शंकर सिंह 'पारिजात'
डिक्सन  रोड़,मुंदीचक, भागलपुर,
बिहार
मो . 09431481336
ई-मेल

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