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'अपनी माटी' वेबपत्रिका का मई -2012 अंक

Written By 'अपनी माटी' मासिक ई-पत्रिका (www.ApniMaati.com) on शुक्रवार, मई 11, 2012 | शुक्रवार, मई 11, 2012



  1. डॉ. नन्द भारद्वाज की डायरी में रवीन्द्रनाथ ठाकुर
  2. 'सत्यमेव जयते' के सन्दर्भ में एक Doctor की डायरी
  3. संस्मरणों में अटल बिहारी वाजपेयी
  4. 'सत्यमेव जयते' जैसे काम पहले भी हुए हैं मगर अलग फॉर्म में
  5. भाषा या तो वैकल्पिक है या परिणाम निर्धारण में गौण
  6. कोलेज शिक्षा का माहौल वाया 1998
  7. हर आदमी के पास बहुत कम फ़ु़र्सत बची है
  8. रविन्द्रनाथ टैगोर के सन्दर्भों में :वर्ण व्यवस्था का भूत अब भी लोगों के दिलो दिमाग पर हावी है।
  9. सत्यजित रे का लेखाझोखा
  10. डॉ.महेंद्र भटनागर का गीत
  11. डॉ.सत्यनारायण व्यास की कवितायेँ विचारधारा की अपेक्षा मनुष्य को केन्द्र में रखती हैं
  12. ''मैं बहुत अरसे तक इस भ्रम में रहा कि मैं औरों से बेहतर इन्सान हूं। ''-सूरज प्रकाश
  13. महेंद्र भटनागर की विचारधारा वाम है; किन्तु वह आरोपित नहीं।
  14. ये साहित्यकार की ही शक्ति होती है कि वह प्रतिकार में खड़ा होता है।
  15. यशवंत कोठारी का उपन्यास 'नया सवेरा'
  16. सोलह कहानियों में सामाजिक विद्रुपताओं का लेखा जोखा है
  17. लोक गीतों पर चन्द्रकान्ता व्यास का काम बरसों याद किया जाएगा
  18. बांग्ला साहित्य वाया भागलपुर
  19. गोस्वामी तुलसीदास जी के कृतित्व की एक व्याख्या ये भी
  20. कवि होना और कवि मान लेना अलग अलग बातें हैं -डॉ सत्यनारायण व्यास
  21. उनकी एक खासियत यह है कि वह बाज़ार के लिए नहीं लिखते
  22. सादगी और संजीदगी के साथ सफ़र करता युवा भगवती लाल सालवी
  23. व्यंग्य:किताब दर किताब
  24. स्त्री के त्याग को हमारा पुरुष समाज भूल जाता है।
  25. लोकेश नशीने "नदीश" के दो गीत
  26. स्त्री-विमर्श पर अलगाववाद का ठप्पा नहीं लगाया जा सकता
  27. अलीगढ़ से लेकर आरा, बलिया, छपरा, देवरिया यानी 'एबीसीडी' तक
  28. संस्मरण:जले हुए घर और बची हुई औरतों की सिसकियां बाकी थीं
  29. रवींद्र प्रभात का ब्लॉग विश्लेषण :बिन ब्लॉग्गिंग सब सून

सलाहकार समूह(संरक्षक)


जिनकी पहचान ख़ास तौर पर आलोचक और कवि के रूप में रही है.मूल रूप से राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में हमीरगढ़ के वासी पिछले कई सालों से चित्तौड़गढ़ में रहते हैं.जीवनभर में तेरह नौकरिया की.घुमक्कड़ी का पूरा आनंद.कोलेज शिक्षा से हिंदी प्राध्यापक पद से सेवानिवृत.आचार्य हजारी प्रसाद द्विबेदी पर पीएच.डी.,दो कविता संग्रह,एक प्रबंध काव्य,पीएच.दी. शोध पुस्तक रूप में प्रकाशित है.इसके अलावा कई पांडुलिपियाँ छपने की प्रतीक्षा में.कई विद्यार्थियों के शोध प्रशिक्षक रहे.अपनी बेबाक टिप्पणियों और सदैव व्यवस्था विरोध के लिए जाने जाते हैं.कई सेमिनारों में पढ़े/सुने गए हैं.आकाशवाणी से लगातार प्रसारित हुए हैं.उनकी मुख्य कविताओं में शंकराचार्य का माँ से संवाद, कथा हमारे उस घर की ,सीता की अग्नि परीक्षा हैं.उनका संपर्क पता 29,नीलकंठ कालोनी, मोबाइल- 09461392200 चित्तौड़गढ़, राजस्थान उनका ब्लॉग लिंक है .




कवि और राजस्थानी साहित्यकार के रूप में ख्यात है। 
पिछले चार दशक से मैं हिन्दी और राजस्थानी में अपने लेखन-कार्य से जुडाव है।
हमेशा से श्रेष्ठ लेखन के कलमकार जो हाल ही में अपने नए कविता संग्रह 'आदिम बस्तियों के बीच' से खासी चर्चा में है.
अपनी माटी वेबपत्रिका के सलाहकार भी हैं .
साहित्य के हल्के में बड़ा नाम है।आकाशवाणी और दूरदर्शन में पूरी उम्र निकली है।
सेवानिवृत वरिष्ठ निदेशक,दिल्ली दूरदर्शन केंद्र,जयपुर .

चित्तौड़ नगर के शिक्षाविद हैं.जो कोलेज शिक्षा से सेवानिवृत प्राचार्य हैं. 
वर्तमान में भगवान् महावीर मानव समिति चित्तौड़गढ़ के अध्यक्ष, 
मीरा स्मृति संस्थान के सह सचिव, स्पिक मैके के अध्यक्ष 
होने के साथ ही वे इस आन्दोलन में संयोजन मंडल में हैं.लगातार पढ़ते रहने की आदत है।सामाजिक सेवा कार्यों में विशेष रूचि है।
समय के साथ आए न्यू मीडिया युग के प्रबल पक्षधर है।आपका संपर्क  सूत्र -ए-64शुभम,बापू नगर,सैंथी,चित्तौड़गढ़-राजस्थान ,ईमेल-draljain@gmail.com,मो-9414109779



    कोलेज शिक्षा से उम्रभर जुडाव रहा। लगभग दस वर्ष तक सिरोही 
    फिल्म सोसाइटी  का संचालन किया  हैं।देश-विदेश की यात्राओं के ज़रिये सामाजिक सन्दर्भों में आये बदलाव पर वैश्विक तुलना के कई आलेख प्रकाशित हैं।


    जयपुर इंटरनेशनल  फिल्म फेस्टिवल की ज्यूरी का सदस्य रहे हैं। जब भी संभव हो सका जानेमाने अखबारों में स्तम्भ लेखन किया है। आप आकाशवाणी व दूरदर्शन से नियमित  प्रसारित हुए हैं। आपका संपर्क सूत्र- ई-2/211, चित्रकूट, जयपुर- 302 021,मो-

     +91-141-2440782 ,

    +91-09829532504, ईमेल- dpagrawal24@gmail.com



मूल रूप से कवि है।अभी तलक एक कविता संग्रह 'इस सिंफनी में' 
और एक निबंध संग्रह'संस्कृति का समकाल' प्रकाशित हो चुका है।
जानेमाने स्तंभकार,कुरजां जैसी पत्रिका के प्रवेशांक से ही चर्चा में हैं।
 लक्ष्मण प्रसाद मंडलोई और राजेन्द्र बोहरा सामान से नवाजे जा चुके हैं।
साहित्य के साथ ही सिनेमा में भे लेखनगत रूचि है।
मो 09829190626,


जयप्रकाश मानस

संपादक, www.srijangatha.com

कार्यकारी संपादक,

पांडुलिपि (त्रैमासिक)


एफ-3, छगमाशिम, 
आवासीय परिसर, पेंशनवाड़ा
रायपुर, 
छत्तीसगढ़-492001
मो.-94241-82664



सम्पादक मंडल  सदस्य


अरविंद श्रीवास्तव ,मघेपुरा ,बिहार

मधेपुरा,बिहार से हिन्दी के युवा कवि हैं, लेखक हैं। 
संपादन-रेखांकन और अभिनय -प्रसारण जैसे कई विधाओं में आप अक्सर देखे जाते हैं।
 जितना आप प्रिंट पत्रिकाओं में छपते हैं, 
उतनी ही आपकी सक्रियता अंतर्जाल पत्रिकाओं में भी है।

संपर्क- कला-कुटीर अशेष मार्ग, 
मधेपुरा, बिहार- 852113 (बिहार) 
फ़ोन : 094310 80862


आधी जमीन (पटना), युद्धरत आम आदमी (नई दिल्ली), परिकथा(नई दिल्ली), हंस (नई दिल्ली), कथादेश (नई दिल्ली), प्रगतिशील वसुधा (भोपाल),सबलोग (नई दिल्ली), पुस्तक-वार्ता (वर्धा) में लेखन।
ब्लॉग:-जयरामढाणी
संपर्क :- 204-E, ब्रह्मपुत्र छात्रावास,
पूर्वांचल, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय,
नईदिल्ली110067, 
ई-मेल–pukhraj.jnu@gmail.com










आलोचक और वरिष्ठ कवि है जिनका हाल ही में    नया  संस्मरणात्मक  उपन्यास कथा रिपोर्ताज पाँव ज़मीन पर बोधि प्रकाशन जयपुर से प्रकाशित हुआ है.उनके बारे में विस्तार से जानने के लिए  यहाँ क्लिक करिएगा 

संपर्क ३४/242 प्रतापनगर,सेक्टर.3 जयपुर.303033 ;राजस्थान
ई-मेल shailendrachauhan@hotmail.com, फोन  9419173960





केदारनाथ अग्रवाल की कविताओं पर वर्धा विश्वविद्यालय में शोधरत है
गांव-राजपुरा,(महादेवजी के मंदिर के पास)
पोस्ट-कानोड़,मो.--08947858202
जिला-उदयपुर. राजस्थान 313604






युवा मलयालम कवि एवं बहुभाषा अनुवादक। मलयालम में दूरम शीर्षक काव्य संग्रह प्रकाशित । कविताओं का हिंदी , अंग्रेजी , तेलुगु एवं ओडिया भाषाओं में अनुवाद प्रकाशित। इनकी कविताओं का हिंदी अनुवाद जनपथ , अक्षर , दैनिक जनसंदेश टाइम्स , अनुभूति अभिव्यक्ति , अपनी माटी और कविता कोश में प्रकाशित हुई हैं

तकनीकी अधिकारी ,सी आई एफ टी, पाडुरंगापुरम,
आंध्रयूनिवर्सिटी पी ओ विशाखपटणम=530 003 

drsantoshalex@gmail.com



(अकादमिक तौर पर डाईट, चित्तौडगढ़ में वरिष्ठ व्याख्याता हैं,आचार्य तुलसी के कृतित्व और व्यक्तित्व पर ही शोध भी किया है.निम्बाहेडा के छोटे से गाँव बिनोता से निकल कर लगातार नवाचारी वृति के चलते यहाँ तक पहुंचे हैं.वर्तमान में अखिल भारतीय साहित्य परिषद् की चित्तौड़ शाखा के जिलाध्यक्ष है.शैक्षिक अनुसंधानों में विशेष रूचि रही है.'अपनी माटी' वेबपत्रिका के सम्पादक मंडल में बतौर सक्रीय सदस्य संपादन कर रहे हैं.)
मो.नं.  9828608270





सम्पादक 








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तकनिकी सहयोग 








मूल विचार 
माणिक,इतिहास में स्नातकोत्तर.बाद के सालों में बी.एड./ वर्तमान में राजस्थान सरकार के पंचायतीराज विभाग में अध्यापक हैं.'अपनी माटी' वेबपत्रिका पूर्व सम्पादक है,साथ ही आकाशवाणी चित्तौड़ के ऍफ़.एम्. 'मीरा' चैनल के लिए पिछले पांच सालों से बतौर नैमित्तिक उदघोषक प्रसारित हो रहे हैं.उनकी कवितायेँ आदि उनके ब्लॉग 'माणिकनामा' पर पढी जा सकती है.

मन बहलाने के लिए चित्तौड़ के युवा संस्कृतिकर्मी कह लो.सालों स्पिक मैके नामक सांकृतिक आन्दोलन की राजस्थान इकाई में प्रमुख दायित्व पर रहे.आजकल सभी दायित्वों से मुक्त पढ़ने-लिखने में लगे हैं.वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय,कोटा से हिन्दी में स्नातकोत्तर कर रहे हैं.किसी भी पत्र-पत्रिका में छपे नहीं है.अब तक कोई भी सम्मान.अवार्ड से नवाजे नहीं गए हैं.कुल मिलाकर मामूली आदमी है.



सम्पादकीय और व्यवस्थापकीय पता-
ई-मेल-info@apnimaati.com
वेबसाइट-www.apnimaati.com
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