डॉ.महेंद्र भटनागर का गीत - अपनी माटी (PEER REVIEWED JOURNAL )

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बुधवार, मई 02, 2012

डॉ.महेंद्र भटनागर का गीत


गाओ कि जीवन - गीत बन जाये.

हर क़दम पर  आदमी  मजबूर है,

हर  रुपहला  प्यार-सपना  चूर है,

आँसुओं के सिन्धु में   डूबा  हुआ

आस-सूरज   दूरबेहद  दूर है !

                   गाओ कि कण-कण मीत बन जाये !

.

हर तरफ़  छाया अँधेरा  है  घना,

हर हृदय हतवेदना  से है सना,

संकटों का  मूक  साया  उम्र भर

क्या रहेगा  शीश पर  यों ही बना ?

                   गाओपराजय - जीत बन जाये !

.

साँस पर  छायी विवशता  की घुटन,

जल रही है  ज़िन्दगी भर कर जलन,

विष भरे   घन-रज कणों से है भरा

आदमी की   चाहनाओं   का गगन,

                   गाओ कि दुख - संगीत बन जाये !


 योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-

डॉ.महेंद्र भटनागर   
मूल रूप से ग्वालियर,मध्य प्रदेश के हैं.कभी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपयी के सहपाठी भी रहे.फिलहाल सेवानिवृत प्रोफ़ेसर हैं. लिखने, पढ़ने, छपने में गहरी रूचि है. खुद को कविता रचना के सबसे करीब और मुफीद पाते हैं.उम्र लगभग छियासी पार है.कई किताबें प्रकाशित हुई और अनुदित भी.

पता-110,बलवंत नगर,गांधी रोड़,ग्वालियर,मध्य प्रदेश-474 002,फोन-0751- 4092908,ई-मेलब्लॉग फेसबुक

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