अनिल अयान श्रीवास्तव की चुनिन्दा गज़लें - अपनी माटी 'ISSN 2322-0724 Apni Maati'

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित ई-पत्रिका

नवीनतम रचना

अनिल अयान श्रीवास्तव की चुनिन्दा गज़लें


 01.

सोना सच्चा हुआ गल जायेगा
आग में मत हाथ रख जल जायेगा

अफवाहों का दौर आया है शहर में
खोटा सिक्का भी यहाँ चल जायेगा

तेजी से गुजरने की बात मत करना
वक्त पकड़ा तो निकल जायेगा

मोम का पुतला बना हर शख्स है
धूप में मजबूत तन पिघल जायेगा

इन्शानियाँ की लाश वो ढोते यहाँ
कैसे सूर्य भ्रस्टाचार का ढल जायेगा

अयान गली से शोर है उस संसद तक
देखना है वहाँ पर कौन सा दल जायेगा

02.
पीने का पानी जहाँ ठहरा हुआ है
उतना ही कड़ा वहाँ पहरा हुआ है

खुले आकाश को देखे सालों हो गए
आज चारो तरफ ही कोहरा हुआ है

चिरागों की चेतना ये समा पी गयी
और अँधेरा आज फिर गहरा हुआ है

अनजाने हम इस गुलामी में फस गए
पर ये तिरंगा शान से फहरा हुआ है

ये प्रजा अपनी शिकायतें करे किस्से
राजा इनका पूर्णतयः बहरा हुआ है

बेबस लोगों ने अयान खुद कब्र खोदी
अब कफ़न ही उनके सर सेहरा हुआ है

03.
सालों से बंधी जख्म की पट्टी को खोलिए
आपने देखा है जो सच उसको आज बोलिए

सूर्य से चुराकर मै यहाँ लाया हूँ एक किरण
इन नज़रो के पैमाने में उजालों को तौलिये

खुद बखुद ये बिजलियाँ चमक कर गिरेंगी
आप अपने विचारो को चेतना से घोलिये

समुन्दर भी चला आएगा प्यासे लबों तक
पहले के जमाने में माना आप खूब रो लिए

हमसे तो कहीं बेजुबां परिन्दें ही नेक है
वो चर्च मंदिर और मस्जिद भी हो लिए

अयान यह तन डुबाकर बड़ी भूल हो गयी
पापियों ने सारे पाप मेरी गंगा में धो लिए

04.

साहिल में सूना सा एक घर बना है.
आकाश में फैला अँधेरा भी घना है

दिन में इन आँखों को सुकून दे देना
यहाँ पूरी रात ही तुमको जागना है

बस्तियों में नकाबपोश है आये
सेवा करके मांग लो जो माँगना है

इस आँगन में तुम ना करो हलचले
यहाँ पे पुराना सा खोखला तना है

मर्यादाओं की सीमा नशेडी हो गयी
सौख से लान्घिये जिनको लांघना है

जख्मो में अयान संक्रमण है फैलता
अच्छा होने के लिए सीना मना है

05.
प्यार करना और निभाना है बहुत कठिन यारो
इस ज़िन्दगी में मुस्कुराना है बहुत कठिन यारो

दिल के संग खिलवाड़ करना चलता है रात दिन
इस रूठते दिल को मनाना है बहुत कठिन यारो

वक्त के संग इसप्यार के मायने है बदलने लगे
हर वक्त इसे समझ पाना है बहुत कठिन यारो

ऐतबार करना अब हमें दोबारा कैसे आएगा
यादों से उसको भुलाना है बहुत कठिन यारो.

शोहरत मिलती रही है सिसकियों के साथ में
चुपके से रोना और रुलाना है बहुत कठिन यारो

लाख लिखना पड़े यारो दुनियादारी के सबक
पहले प्यार को मिटाना है बहुत कठिन यारो

अयान दिल की दास्तानें चल रही है रात दिन
ख्वाबों को सम्हाल पाना है बहुत कठिन यारो

06
.कुछ राज छिपाए है सम्हलता हुआ चेहरा.
अच्छा नहीं लगता है बदलता हुआ चेहरा,

चेहरों में है नकाब यहाँ इस कदर लगे हुए
तूफ़ान को समेटे है ये बहलता हुआ चेहरा,

सच्चाई देखी हमने जब भी सूरमाओं की
मोम सा दिखता है पिघलता हुआ चेहरा

मासूम निगाहें है और चुपचाप है ये लब
हर रात में जलता है दहलता हुआ चेहरा

बर्फ की तासीर को हम समेटे हुए यहाँ
बेमौत मर रहा है फिसलता हुआ चेहरा

हर बच्चा सहम जाता है जब देखता उसे
अँधेरे से खौफनाक निकलता हुआ चेहरा

बड़ा हो गया है तो बड़प्पन को साथ रख
भाता नहीं अयान ये मचलता हुआ चेहरा

07.
बहुत दूर था अपना एक सहारा मेरा ....
क्या करता दरिया का किनारा मेरा .
.
फिर से था तूफ़ा का पैगाम यारो था .
बेबस था किस्मत का सितारा मेरा

लुटेरे मजे करते होगे अपने घर में
जो लूट ले गए सामान सारा मेरा

इसी तरह जी रहा हूँ हर पल यहाँ
सातवें आसमाँ में है अब पारा मेरा

चलो कही चले और कल की सुबह
अश्क हो गया है बहुत खारा मेरा

एक ने कहा था गलत उसको अयान
पानी तक नहीं माँगा यहाँ मारा मेरा

08.
तमन्ना जब किसी की नाकाम हो जाती है .
जिन्दगी उसकी उदास शाम हो जाती है .

दिल के साथ दौलत का होना भी जरूरी है
गरीब की मोहब्बत नीलाम हो जाती है .

जब इसे मुकम्मल मुकाम नहीं मिलता
इसी बहाने मोहब्बत बदनाम हो जाती है

कोई क्या जाने क्या गुजरती है उस वख्त
खास चीज जो बाजार में सरेआम हो जाती है .

वो क्या समझेगा मेरी रुसवाई का सबब
जिसकी शाम मेरी खातिर जाम हो जाती है

किस्सा अयान एक अंजाम तक पहुचता है
जब धड़कने इश्क में इंतकाम हो जाती है

09.

आँधी आई तो डर गए पत्ते.
शाख से यूँ बिखर गए पत्ते.

ढूँढने ज़िन्दगी के लम्हों को.
किस किसके घर गए पत्ते

ये मुकद्दर भी रेत जैसा है
बयां खुल के कर गए पत्ते

हार जीत के रिवाजों में आज
ख़त्म किस्सा कर गए पत्ते

वख्त ने हरा दिया उनको भी
कोशिश करके मर गए पत्ते

एक इबादत करने के लिए
यहाँ दो फूल धर गए पत्ते

अयान ग़मगीन माहौल को
मेरे हवाले कर गए पत्ते.

10.
सोचा था शाम संग सवेरा नहीं जाता.
देखा तो जुदा होकर ये डेरा नहीं जाता.

दर्द दफ़न हो गया जो जिगर जमीन में
चाहते हुए भी इसको उकेरा नहीं जाता .

दिल मेरा चाहे की वो राहों को छोड़ दे.
अफ़सोस है की उनका बसेरा नहीं जाता.

खुशबू दोस्ती और इश्क का है एक गुर
इनको बार बार बिखेरा नहीं नहीं जाता.

जो शराब के संग अयान शबाब बन गयी
जामों से उसको कभी उडेला नहीं जाता.

एक बार जो देख ले इस हसीं दोस्त को
उसके साथ नाम कभी भी मेरा नहीं जाता.


 योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-
अनिल अयान श्रीवास्तव
दीप शिखा स्कूल से तीसरी गली.
मारुती नगर,सतना ..प्र .
पिन ४८५००५
ईमेल ;ayaananil@gmail.com
सम्पर्क 9406781040

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