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'सत्यमेव जयते' के सन्दर्भ में एक Doctor की डायरी

Written By 'अपनी माटी' मासिक ई-पत्रिका (www.ApniMaati.com) on गुरुवार, मई 10, 2012 | गुरुवार, मई 10, 2012

 'सत्यमेव जयते' के सन्दर्भ में कम मैंने अपने मित्र डॉ श्रीगोपाल काबरा की किताब 'अंतर्द्वन्द्व' से एक रचना यहां पोस्ट की थी. आज पढ़ें उसी किताब की एक और विचलित कर देने वाली रचना, 'अंतर्द्वन्द्व':-
    लगभग दस वर्ष तक सिरोही फिल्म सोसाइटी  का संचालन,

    जयपुर इंटरनेशनल  फिल्म फेस्टिवल की ज्यूरी का सदस्य

    समय.समय पर अखबारों में स्तम्भ लेखन,

     आकाशवाणी दूरदर्शन से नियमित प्रसारण

    -2/211, चित्रकूट, जयपुर- 302 021

       +91-141-2440782 ,
    +91-09829532504

    dpagrawal24@gmail.com

अंतर्द्वन्द्व 
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पात्र- 
  • मिस प्रिया, 30 वर्ष की आधुनिक, अविवाहित गर्भवती महिला
  • लेडी हाउस सर्जन, 25 वर्ष
  • प्रमुख महिला सर्जन, डॉ नाज, एक वयस्क महिला
  • डॉ पॉल, पुरुष, विधि विषेषज्ञ
  • डॉ सेन, पुरुष, सोनोलोजिस्ट
  • वार्डबॉय
  • सिस्टर 

यह एक अस्पताल का आउट डोर विभाग है। महिला रोग एवं प्रसूति विभाग की प्रमुख का केबिन नुमा चेम्बर और केबिन के बाहर कमरे में सामने ही एक मेज के उस ओर हाउस सर्जन बैठी है, सफेद एप्रॉन पहने, सामने टेबल पर स्टेथेस्कोप और ब्लडप्रेशर नापक यंत्र रखे हैं। प्रमुख सर्जन अंदर के कमरे में बैठी हैं, सफेद कोट पहने, साईड मे पेशण्ट देखने की लम्बी टेबल है।

प्रिया, गर्भवती अविवाहित महिला, बॉब कट बाल, जीन्स और टाप पहने, ठसके से तेज कदमों से चलती हुई कमरे में आती है, हाथ में आउटडोर टिकट है। हाउस-सर्जन की टेबल के सामने पहुंच कर पूछती है -

प्रिया: डॉ नाज की हाउस सर्जन आप हैं? ‘‘

हाउस सर्जन: जी! ‘‘

मिस प्रिया: ‘‘ यह लीजिये उनके नाम की फाइल,
और फिर सामने रखी कुर्सी पर बैठते हुए बिना किसी भूमिका के कहती है, “मुझे अॅबोर्शन करवाना है।“ ‘‘

हाउस-सर्जन को महिला का रुख अजीब लगता है। महिला सम्भ्रान्त दिखती है पर यह कौनसा सलीका हुआ! गुड मॉर्निंग, नमस्ते, कुछ कहा, कुछ बात, सीधाअबोर्सन करवाना है ऐसा लगा जैसे किसी डिपार्टमेंटल स्टोर में आकर कह रही होएक सेनेटरी पैड का पैकेट देना” ‘ हाउस सर्जन तल्ख नजर से उसे देखती है पर महिला बिना झिझक उसी घमन्डी अंदाज में दोहराती है-

प्रिया: आई हेव कम फोर एम. टी. पी. मैं गर्भ समापन करवाने आई हूँ

हाउस-सर्जन फाइल खोलती है और देख कर पूछती है -

हाउस सर्जन: ‘आप शादीशुदा हैं?

प्रिया अपने घमन्डी अंदाज में: क्यों? क्या गर्भपात करवाने के लिए यह ज़रूरी है? ‘‘

हाउस सर्जन: आपने पति या पिता का नाम भी नहीं लिखा है। ‘‘

प्रिया: गर्भपात मुझे करवाना है, पति या पिता को नहीं। ‘‘

हाउस सर्जन: अपनी मेनस्ट्रुअल हिस्ट्री बतायेंगी? ‘

प्रिया: पूछिये, क्या पूछना है। ‘‘

हाउस सर्जन: मासिक नियमित होते हैं? ‘‘

प्रिया: हाँ। ‘‘

हाउस सर्जन: कितने दिन से? ‘‘

प्रिया: अट्ठाइस। ‘‘

हाउस सर्जन: कितने दिन रहते हैं। ‘‘

प्रिया: तीन ‘‘

हाउस सर्जन: आख़री मासिक कब हुआ था? ‘‘

प्रिया: बीस सप्ताह पहले। ‘‘

हाउस सर्जन: गर्भपात क्यों करवाना चाहती हैं? ‘‘

प्रिया: झुंझलाते हुए तल्ख लहजे में कहती हैओफफो! अजीब सवाल है! मेरी इच्छा। मैं नहीं चाहती गर्भ। ‘‘

हाउस सर्जन: नहीं चाहती तो गर्भधारण ही क्यों किया था? ‘‘

प्रिया: कौनसा मैंने चाह कर धारण किया था। यह तो हो गया।और फिर कुछ रुक कर और भी तल्ख रुख में, “प्लीज़! आप मुझे चीफ़ सर्जन से मिलवा दीजिए, मैं उन्हीं के लिए आयी हूँ।“ ‘‘

हाउस-सर्जन जवाब देने को मुँह खोलती है पर कुछ सोच कर चुप होजाती है। फ़ाइल उठाती है, महिला को साथ आने का इशारा करती है और प्रमुख सर्जन के पास ले जाती है। सर्जन को फाइल देकर महिला के बारे में बताती है-

हाउस सर्जन: ‘‘ मैडम, यह मिस प्रिया हैं। बीस सप्ताह का गर्भ है, अबोर्शन के लिये आई हैं, शादीशुदा नहीं हैं।

प्रमुख सर्जन फाइल लेकर बैठने का इशारा करते हुए, “ बैठो। यस!” ‘‘

प्रिया प्रमुख सर्जन के सामने रखी कुर्सी पर बैठते हुए अपने उसी अंदाज में कहती है: ‘‘मैं सॉफ़्टवेयर एन्जीनियर हूँ। यहाँ की एक कम्प्यूटर फर्म में एक्ज़ीक्युटिव हूँ। परम्परागत शादी नहीं की है लेकिन अपने मन पसन्द व्यक्ति के साथ रह रही हूँ। बच्चा नहीं चाहती, गर्भ गिरवाना है।

प्रमुख सर्जन: “गर्भ नहीं चाहती तो आपको निरोधक उपाय अपनाने चाहिए थे। आप तो सुशिक्षित हैं।“ ‘‘

प्रिया: “जी, अपनाये थे। लेकिन आप तो जानती हैं, हो जाता है। ‘‘

प्रमुख सर्जन फ़ाइल में देख कर, “अगर ऐसा था तो आपको पहले आना चाहिए था। बीस सप्ताह तक क्या करती रहीं?” ‘

प्रिया: बस, काम में समय ही नहीं मिला। हम लोगों का काम ही ऐसा है। अभी भी दिक्कत ही है। मैं चाहती हूँ कि अगले शनिवार या इतवार को आप एम.टी.पी. कर दें ताकि मैं सोमवार से वापस काम पर जा सकूँ। मैं देरी अफोर्ड नहीं कर सकती।फिर कुछ सोच कर, गर्भ समापन कानून में बीस सप्ताह तक तो परमिटेड है, फिर क्या दिक्कत है? ‘

प्रमुख सर्जन एकटक प्रिया को देखती है और फिर कुछ सोचकर: “अच्छा! ऐसा करिए, हमारे कानून विषेषज्ञ डॉ पॉल हैं। मैं उन्हें फ़ोन कर देती हूँ। आप उनसे मिल आइये।‘‘

प्रिया: इसकी क्या जरूरत है। मैं वयस्क हूँ। अपने बारे में निर्णय मैं खुद ले सकती हूँ। गर्भपात मेरा अधिकार है। मैंने कानून पढ़ा है-जानती हूँ। यह मेरा पहला अॅबोर्शन नहीं है।‘‘

प्रमुख सर्जन कुछ सख्त लहजे में: आप डॉ पॉल से मिल आइये। कानूनी राय वही देंगे। मैं उन्हें फोन कर देती हूँ!

डॉ पाल को फोन मिलाती हैं: “हलो! डॉ पॉल। हाँ पहचान लिया। नहीं, नहीं। अच्छा सुनिये, मैं एक मिस प्रिया को आपके पास भेज रही हूँ। अनमेरिड, लिविंग टुगेदर, अॅबोर्शन करवाना चाहती हैं। बीस सप्ताह की प्रेग्नेन्सी है। हाँ। उनसे बात कर लीजिये। हाँ। वे कहती हैं वे कानून जानती हैं। उन्हें समझा दीजिये। मैं उन्हें वार्ड बॉय के साथ आपके पास भेज रही हूँ।‘‘

प्रिया कुछ बोलने का होती है, “जी इसकी क्या --
प्रमुख सर्जन बीच में ही रोकते हुए: “आप पहले डॉ पॉल से मिलकर आइये।‘‘

घंटी बजाने पर नर्स आती है तो उसे फाइल देकर कहती है: ‘‘इन्हें वार्ड बॉय के साथ डॉ पाल के पास भिजवा दो।

वार्ड बॉय मरीज को डॉ पाल के कमरे में ले जाता है।

वार्ड बॉय डॉ पाल के पास पहुंच कर उन्हे फाइल देते हुए: “ सर! इन्हें डॉ नाज ने भेजा है।‘‘

डॉ पॉल वार्ड बॉय के हाथ से फाइल लेते हैं, हाँ, आइये। बैठिये।

फाइल देखकर, कुछ अंतराल के बाद, हॉं तो मिस प्रिया, आपके रिकार्ड के अनुसार आप शादीशुदा नहीं हैं, 20 सप्ताह गर्भवती हैं, और कोंट्रासेप्टिव फेलियोर से ठहरे गर्भ से निजात पाना चाहती हैं।‘‘

प्रिया: दैटस राइट। मैं एम. टी. पी. करवाना चाहती हूँ।‘‘

डॉ पॉल: लेकिन निरोध असफलता से ठहरे गर्भ का समापन तो केवल विवाहित महिलाओं में ही किया जा सकता है और इस रिकार्ड के हिसाब से तो आप अविवाहित हैं।‘‘

प्रिया: यह कैसे हो सकता है? कानून तो सबके लिए बराबर है। गर्भ रखना या रखना हर स्त्री का अपना अधिकार है। मौलिक अधिकार।‘‘

डॉ पॉल: गर्भ गिरवाने या नष्ट करवाने का अधिकार असीमित नहीं है। इसकी कुछ मान्य सीमाएं हैं। गर्भ समापन कानून में निरोध असफलता से ठहरे गर्भ को नष्ट करने की सुविधा केवल विवाहिता को ही उपलब्ध है।‘‘

प्रिया: आप गलत कह रहे हैं कानून में ऐसा नहीं है। हजारों अविवाहित लड़कियाँ गर्भपात करवाती हैं। मैंने भी करवाया है।‘‘

डॉ पॉल: ये रहे कानून की किताब में गर्भ-समापन कानून में सन्दर्भित प्रावधान। आप स्वयं पढ़ लीजिए।

प्रिया उनके हाथ से किताब लेकर पढ़ती है, फिर पलट कर उसका टाईटल पेज देखती है। तब कुछ दबे स्वर में कहती है, “जी मैंने पढ़ लिया। आप ठीक कह रहे हैं। लेकिन यह गलत है। यह स्त्रियों का शोषण है। उन्हें ब्लेकमेल करने का तरीका है।“ ‘‘

डॉ पॉल: यह आपका सोच है, कानून बनाने वालों का मत कुछ और था।‘‘

प्रिया तुनक कर: क्या मत था उनका? फिर कुछ सोच कर.... खैर! छोड़िये। अबोर्शन तो मुझे करवाना ही है। आप तो बताइये मुझे क्या करना है? ‘‘

डॉ पॉल: मैंने कानूनी प्रवाधान आपको बता दिये। एम. टी. पी. कानून के दायरे में आपको गर्भ समापन करवाना है तो उसके लिए क्या करना है यह निर्णय आपको करना है।‘‘

प्रिया: क्या करना है? ‘

डॉ पॉल: मैंने आपको प्रावधान बता तो दिया कि निरोध असफलता के लिए गर्भ समापन की सुविधा अविवाहित महिलाओं के लिए नहीं है, और आपके इस रिकॉर्ड में आप अविवाहित हैं।‘‘

प्रिया: आपका क्या मतलब है? मैं अपने आप को विवाहित बताऊँ? इसमें पति के नाम की जगह किसी का भी नाम लिख दूँ? ‘‘

डॉ पॉल: मेरा कोई मतलब नहीं है। आपको क्या करना है, आप सोचिये। हाँ हमें कोई मेरिज सर्टिफिकेट नहीं चाहिए और ही व्यक्ति के पति होने का प्रमाण। स्त्री ने जो रिकार्ड में लिखा है, हमारे लिए वही सत्य है।‘‘

प्रिया: (कुछ देर चुप रहने के बाद) ठीक है। लाइये, फाइल दीजिये, मैं दूसरी बनवा लाती हूँ।‘‘

डॉ पॉल: मुस्कराते हुए फाईल देते हैं। वह जाने के लिए उठती है तो टोकते हुए कहते हैं, और हाँ सुनिये। आपके बीस सप्ताह का गर्भ है। कानूनन उसे समापन करने के लिए दो डॉक्टरों को प्रमाणित करना होगा कि गर्भ रहने से आपको अपूरणीय और गम्भीर मानसिक आघात लग सकता है, अतः आप डॉक्टरों को ठीक से बताइयेगा कि आपके कैरियर की इस स्टेज पर बच्चा होना एक बड़ा आघात होगा।‘‘

फाइल लेकर वापस आउट डोर काउँटर पर जाती है, नया फार्म भरती है और नयी फाइल बनवाती है, प्रमुख सर्जन से मिलती है और फिर वापस डॉ पॉल के पास आती है। फाईल हाथ में है।

प्रिया: मे आई कम इन डॉ पॉल?

डॉ पॉल: हाँ हाँ आइये मिस प्रिया।
प्रिया: थैंक्यू डॉ पॉल। मैं नई फाइल लेकर प्रमुख सर्जन से मिल आई हूं। कन्सेंन्ट फार्म साईन कर दिया है। सर्जन शनिवार को एम टी पी करने को मान गई हैं यह लीजिये फाइल।‘‘

डॉ पॉल: फाइल लेकर, चलिए अच्छा हुआ।‘‘ फिर कुछ सोचकर, अच्छा प्रियाजी, आप तो बड़े खुले खयालातो की महिला हैं। अपने निर्णय स्वयं लेती हैं। आपको एतराज तो नहीं होगा अगर गर्भ समापन के दौरान आपके गर्भ का हम अल्ट्रासाउण्ड वीडियो रिकॉर्ड करें, उसमें आप या आपके शरीर का कोई भाग नहीं दिखेगा, सिर्फ गर्भ की वीडियो रिकार्डिंग होगी।‘‘

प्रिया: क्या यह सम्भव है? ‘

डॉ पॉल: हाँ, अब यह सम्भव हो गया है। हमने हाल ही में थ्री. डी. अल्ट्रासाउण्ड मषीन खरीदी है। उसी से शरीर के भीतर का वीडियो चित्रण संभव है। हम प्रयोग कर देखना चाहते हैं।‘‘

प्रिया: हाँ, शौक से करिये। मुझे कोई एतराज नहीं है।‘‘

डॉ पॉल: आप इसकी लिखित में स्वीकृति देंगी? ‘‘

प्रिया: हाँ क्यों नहीं। लाइये, कागज दीजिये। और स्वीकृति लिख देती है।

डॉ पॉल सोनोलोजिस्ट डॉ सेन को फोन करते हैं। डॉ सेन, अगले शनिवार को एक एम टी पी शिड्यूल है। आपकी नई थ्री डी मषीन से प्रॉसिज़र की वीडियोग्राफी करनी है।

डॉ सेन: ‘‘अरे नहीं भाई, बेकार झंझट में फंस जाएंगे। इन महिलाओं का कोई भरोसा नहीं है। बाद में जाकर अगर शिकायत करदे कि लिंग निर्धारण किया था, और गर्भ समापन मादा भ्रूण के लिए था, तो झंझट हो जायेगा। सब यही सोचते हैं कि सोनोग्राफ़ी के बाद अगर गर्भ गिराया है तो जरूर मादा भ्रूण के लिए होगा। रहे सहे यह मीडिया वाले, ये तो पीछे ही पड़ जाएंगे। सब पर जुनून-सा छा रहा है। बेकार सारा कैरियर स्टेक पर लग जायगा।

डॉ पॉल: (समझाते हुए) अरे नहीं, ऐसा कुछ नही होगा। यह नॉर्मल अल्ट्रासाउण्ड नहीं है, वरना जैसे आपरेशन के दौरान हृदय आदि की मॉनिटरिंग करते हैं वैसे ही गर्भ समापन प्रक्रिया की मॉनिटरिंग है। महिला की लिखित स्वीकृति लेली है, सब समझा कर।‘‘

डॉ सेन फोन पर: ‘‘चलो, तुम कहते हो तो ठीक है। जब एम टी पी हो, तब बुला लेना।

ऑपरेशन खत्म हुआ। वीडियोग्राफ़ी हो गई। महिला को होश गया, उन्हे कमरे में भेज दिया गया। सब खत्म कर सर्जन और एनेस्थेटिस्ट जब बैठने के कमरे में आते है तो सिस्टर सब को एक-एक कप कॉफी लाकर देती है। डॉ सेन सबको मशीन पर वीडियो का रिप्ले दिखाते हैं।

डॉ सेन: ‘‘अच्छी थ्री डाईमेंशनल पिक्चर्स आई हैं। मशीन का रेजोल्यूशन अच्छा है। यह देखिये, बच्चा पूर्ण विकसित है। अपने हाथ पाँव हिला रहा है। आँखें बन्द हैं। होंठ हिला रहा है। हिल डुल रहा है। यह, नीचे से डाला औज़ार गर्भ में आया तो बच्चे ने चौंक कर कैसे हाथ पाँव सिकोड़ लिए हैं। औज़ार से बचने के लिए कैसे इधर उधर हो रहा है। अरे देखा, औज़ार का सिरा हाथ के पास आया तो कैसे अपनी नन्ही हथेली से उसे पकड़ लिया है। और अब औज़ार उसकी बाँह पर कसा गया है तो (कुछ दबती आवाज में) उसने .. पाँव ... फैला ... दिये हैं, उसके ... होंठ ... थरथरा रहे हैं। और .... यह ... यह ... और बुदबुदाते हुए चुप हो जाते हैं।

सब एकटक उस नन्हें शिशु को देख रहे हैं। किसी ने कॉफी की एक घूंट तक नहीं ली है। फिर जो दिखा उसको देखने के कुछ ही देर बाद गर्भ समापन करने वाली सर्जन चीख उठती है -

प्रमुख सर्जन: प्लीज स्टॉप इट! ब्ंद करिये। इट्स होरिबल टू वाच!!‘‘

सर्जन का मुख विकृत हो उठता है और वे उठ कर बाथरूम मे चली जाती हैं।

कुछ देर बाद वापस आती हैं, चेहरा बड़ा गम्भीर है, जैसे उन्हे अन्दर ही अन्दर कुछ कचोट रहा है, साल रहा है। कमरे में सन्नाटा है। कुछ देर गम्भीर बिना पलक झपकाए बैठी रहती हैं, फिर कहती हैं-

प्रमुख सर्जन: मैं तो अब गर्भपात नहीं कर पाऊँगी। दूसरी तिमाही के गर्भपात तो कभी भी नहीं फिर कुछ रुक कर, उस लड़की को इसकी कॉपी बना कर जरूर दीजियेगा। कह रही थी यह उसका पहला गर्भपात नहीं है।‘‘



दूसरे दिन


हाउस सर्जन प्रमुख सर्जन से पूछती है, ‘‘मैडम, जिसका एम.पी.टी. किया था वह बिल्कुल ठीक है, उसकी छुट्टी कर दें?

प्रमुख सर्जन: ‘‘कौन? प्रिया की, जो 111 नम्बर कमरे में है? ‘‘

हाउस सर्जन: ‘‘जी‘‘

प्रमुख सर्जन: ‘‘हाँ, कर दो। लेकिन डिस्चार्ज टिकट देने से पहले उसे एम.टी.पी की वीडियो जरूर दिखा देना। कह रही थी यह उसका पहला अबोर्शन नहीं है। वीडियो की सी डी डॉ पॉल पाल के पास है, उनसे ले लेा।‘‘

हाउस सर्जन: जी। वीडियो की सीडी लेकर उनको दे देती हूं, डिस्चार्ज टिकट के साथ।‘‘

प्रमुख सर्जन: नहीं, सी डी नहीं देनी है, उसको दिखानी है। लैपटोप ले जाओ। वीडियो उसकी लिखित अनुमति से किया गया था। उससे कहना जाने से पहले देख ले। जो अबोर्शन करवाती है वह भी तो देखे और समझे कि दूसरी तिमाही के गर्भपात में क्या होता है।‘‘

हाउस सर्जन: जी मैडम! ‘(यह कह कर हाउस सर्जन चली जाती है।)

हाउस सर्जन लैपटॉप और सी.डी. लेकर प्रिया के कमरे में पहुंचती है। साथ में मरीज का टिकट लिये वार्ड सिस्टर है। कमरे में प्रवेश कर हाउस सर्जन प्रिया से पूछती है।

हाउस सर्जन: ‘‘कैसी हैं आप?

प्रिया: ‘‘बिल्कुल ठीक डाक्टर! फिट एज़ फिडल। बिंदास! नहा चुकी हूँ। ब्रेकफास्ट भी कर लिया हैं। छुट्टी कर दें तो सीधी आफिस चली जाऊँ।

हाउस सर्जन: ‘ओह यस, श्योर! कह कर हाउस सर्जन उसकी संक्षिप्त जांच करती है, फाइल में उसका पल्स, टेम्परेचर आदि का रिकार्ड देखती है।

हाउस सर्जन सिस्टर से पूछती है, ‘ब्लीडिंग तो नहीं? और फिर मरीज से कहती है, प्रियाजी, आप बिल्कुल ठीक हैं। मैडम से पूछ लिया है, मैं आपका डिस्चार्ज टिकट बना देती हूँ। तब तक आप यह वीडियो देख लीजिये। आपके एम.पी.टी. की रिकॉर्डिंग है। मैडम ने कहा है, जाने से पहले आप इसे जरूर देख लें आपकी अनुमति से प्रोसेजर की थ्री डी वीडियो रिकार्डिंग की गई है।‘‘

प्रिया: दैट्स ग्रेट! लाइये, दीजिये। मैं देखूँगी और सब को दिखाऊँगी भी। इटस ग्रेट जॉब डन।‘‘

हाउस सर्जन: ‘ नहीं, यह सी डी ले जाने के लिये नहीं है। मैडम ने कहा है जाने से पहले इसे यहीं देखलें।

प्रिया: क्यों? लेजाने के लिए क्यों नहीं है? मेरी सी डी है, आप सी डी के पैसे ले लीजिये।

हाउस सर्जन: बात पैसों की नहीं है। आप सी डी देखिये, मैडम ने कहा है। यह लीजिए लैपटॉप और सी डी। मैं तब तक आपका डिस्चार्ज टिकट बना कर लाती हूं।

हाउस सर्जन और नर्स, नर्सिंग स्टेशन कमरे में चली जाती हैं।

प्रिया अपने अभ्यस्थ हाथों से लेपटॉप चालू करती है, सी.डी. सी.डी. ड्राइव में डालती है और पलंग पर तकिये के सहारे बैठ कर देखने लगती है। चित्र पटल पर कुछ हलचल के बाद चित्र उभरता है। नन्हा सा शिशु नन्हें नन्हें हाथ पाँव, नन्हा सा कोमल चेहरा। देख कर अच्छा लगता है। अलग-अलग कोण से दिखने के बाद चित्र स्थिर होजाता है। नन्हा बच्चा हरकत कर रहा है। प्रिया को याद आता है जब पहली बार उसे पेट में बच्चे की हलचल महसूस हुई थी। शायद उस रोज सोकर लेट उठी थी और सवेरे की कॉफी पी रही थी। हठात पेट में कुछ लगा था। कॉफी का घूंट मुंह में ही रह गया था। झटका सा लगा था। मस्तिष्क में कौंधा था आफिस, काम और अपना कैरियर। काफी दिन चढ़ गये थे, सोचा कुछ करना होगा, शीघ्र ही करना होगा। निर्णय किया और अबोर्शन करवाने आगई। किसी से कुछ नहीं कहा था, जिससे गर्भ ठहरा था उससे भी नहीं। वह अपने काम से बंगलोर गया हुआ था। परंपरागत विवाह नहीं किया था पर रहते पति पत्नी की तरह ही थे। और किसी से कहने का कोई औचित्य नही था। दकियानूसी, सब अपने सोच के अनुसार बेकार की बातें करते और बात आफिस में फैलती। सवाल पूरे कैरियर का था। चलो अच्छा ही हुआ। जैसा सोचा था वैसा ही सब आराम से होगया। आधुनिक चिकित्सा का यही तो कमाल है। सब कुछ ठीक ही हो गया। झंझट मिटा।

ध्यान फिर लैपटॉप के चित्रपटल पर जाता है। नन्हें शिशु में कुछ हरकत होती है जैसे उसने करवट ली हो। उस नन्हें से शिशु को देख कर प्रिया का मन होता है कि अंगुली से उसे छुए, उसे महसूस करे।

तभी नीचे से डाला गया औजार दिखाई देता है। औजार बच्चे के शरीर को छूता है तो उसमें हरकत होती है, उससे बचने की कोशिश में दूर हटने की। प्रिया उठंग कर बैठ जाती है। औजार वापस जाकर फिर आता है तो बच्चा अपने पाँव सिकोड़ लेता है। हाथ के पास आता है तो उसे अपनी नन्हीं हथेली से पकड़ने की कोशिश करता है। और उसके बाद जब औजार बच्चे के एक हाथ पर आकर कसता है तो ऐंठ कर पांव फैला देता है। एक झटके के बाद चित्र धुंधला होजाता है। जल्दी जल्दी हलचल होती रहती है, औजार आता जाता दिखता रहता है। बाकी साफ कुछ नहीं दिखता, बस चित्र में छटपटाहट सी नजर आती है। नन्हा शिशु देखते देखते लुप्त हो जाता है। प्रिया का दिल तेज तेज धड़कने लगता है। मुंह सूख जाता है। आंखें फटी रह जाती है। फिर चित्रपटल पर सब शांत हो जाता है। मन वितृष्णा से भर जाता है। उसका हाथ इमर्जेंसी घंटी की ओर बढ़ जाता है और साथ ही मुंह से एक खरखराती सी चीख निकलती है।

हाउस सर्जन नर्सिंग स्टेशन में बैठी डिस्चार्ज टिकट पूरी करती ही है कि नम्बर 111 के कमरे की घंटी जोर से बजती है और साथ ही उधर से आवाज आती है: सि...सि...सिस्टर!!!‘‘

हाउस सर्जन और सिस्टर दोनों भागी भागी उस कमरे में पहुंचती हैं।

प्रिया चीखती है। मुंह वितृष्णा से विकृत है। यह तो हत्या है! सरासर हत्या!!‘‘

हाउस सर्जन: ‘हत्या, क्या हत्या है? ‘‘

प्रिया: (लरजती आवाज में) ‘‘यही जो वीडियो में दिखाया गया है।‘‘

हाउस सर्जन: ‘‘वीडियो में तो वही है जो किया गया है, और जो आपने करवाया है।‘‘

प्रिया: (भरे गले से) ‘‘मुझे ... क्या ....मालूम........?

हाउस सर्जन: ‘‘मालूम क्यों नहीं? आप तो कह रहीं थीं, आप सब जानती हैं। आप तो कह रहीं थीं आप कानून जानती हैं। फिर जो कानून के दायरे में किया गया उसे आज आप हत्या कैसे कह रहीं हैं? आपने तो कहा था अबोर्शन आपका मौलिक अधिकार है। आपने पहले भी करवाया है।‘‘

प्रिया: (रुंधे गले से) ‘‘मुझे क्या मालूम था कि गर्भपात में बच्चे के साथ ऐसा होता है? ‘

हाउस सर्जन: ‘आपको मालूम था गर्भ 20 सप्ताह का है। पांच महीने में तो बच्चा अच्छा खासा विकसित हो जाता है। दूसरी तिमाही के गर्भपात में ऐसा ही होता है। आप तो पहले भी गर्भपात करवा चुकी हैं, आपको तो सब मालूम ही था।‘‘

प्रिया रूंआसी सी हो जाती है। कुछ देर गुमसुम रहती है, टिश्यू पेपर से आँख और नाक पोंछती है फिर कहती है, ‘‘प्लीज आप मैडम को बुला देंगी! ‘‘

डॉ श्रीगोपाल काबरा,15,
 विजय नगर,
डी-ब्लॉक

मालवीय नगर,
जयपुर – 302017,
टेलीफोनः 0141 2721246
 
प्रमुख सर्जन आती हैं। रूंधे गले से प्रिया कहती है: ‘‘मैडम, यह तो सरासर हत्या है, क्रूर हत्या। आपने कैसे किया यह। मुझे तो कुछ मालूम नहीं था। मैं तो मूर्ख थी। आप तो डाक्टर हैं-जीवन देने वाली। आपने कैसे किया? ‘

प्रमुख सर्जन कुछ नहीं बोलती। उसके कंधे पर हाथ रख कर चुपचाप खडी़ रहती हैं। कुछ देर चुप्पी छाई रहती है। फिर प्रिया सर्जन का हाथ अपने दोनों हाथों में लेकर बोलती है, गला भरा है, आंखों में आँसू हैं...

प्रिया: आई एम सो सॉरी डाक्टर। आई फील सो गिल्टी। आप सब से माफी मांगती हूं।‘‘

प्रमुख सर्जन दूसरे हाथ से उसका कंधा थपथपाती है। लेकिन इसके पहले कि सर्जन वापस जाती, प्रिया पूछती है,

प्रिया: लेकिन मैडम, अगर केाई महिला मजबूर हो तो क्या करे? गर्भ अगर अनचाहा हो तो....?

प्रमुख सर्जन: ‘‘ तुम तो कानून जानती हो। कानून में पहले 12 सप्ताह तक के गर्भपात के लिये अलग व्यवस्था है। उसमें भ्रूण को नष्ट करना क्रूर नहीं है। अगर मजबूरी है तो 12 सप्ताह से पहले गर्भपात करवाना चाहिये। उसके बाद के दूसरी तिमाही के गर्भपात क्रूर होते हैं। दूसरी तिमाही के गर्भपात तो तभी करवाने चाहिये जब गर्भ से माँ के जीवन को खतरा हो, माँ की जान पर ही बने। तब तो मजबूरी है, माँ की भी और डाक्टर की भी।‘‘

प्रिया (बड़ी मायूसी के साथ): ‘‘काश! मुझे पहले मालूम होता। मैंने जो पढ़ा और देखा उसमें तो यह कहीं नहीं था। किसी ने नहीं बताया। और मैं सोचती थी पढ़ लिया है तो मैं सब जानती हूं। और फिर कुछ रुक कर कहा: डॉक्टर, मैं अपने आपको कैसे माफ करूंगी? ‘‘ और सर्जन का हाथ अपने चेहरे पर रख कर फफक कर रो पड़ती है।
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