''बनारस के वाएब्रेशंस विलग ही हैं ''-उमेश सेठ - अपनी माटी ई-पत्रिका

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका('ISSN 2322-0724 Apni Maati')

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''बनारस के वाएब्रेशंस विलग ही हैं ''-उमेश सेठ

बनारस में सालों से यानिकि जन्म से ही रह रहे उमेश सेठ ने दुनिया को देखने की नज़र बनारस में ही पैदा की है।यहीं की आबोहवा में रहते रेलवे की नौकरी और स्पिक मैके जैसे मंच के ज़रिये संस्कृति की सेवा करते हुए कई लाज़वाब अनुभव पाए हैं।उनसे सुरत्कल में हुए स्पिक मैके  अधिवेशन के दौरान जून 2012 में एक बातचीत की गयी थी।बातों में बहुत सी पुराणी बातों के दोहराव के साथ ही नए तथ्य और विचार भी सामने आये हैं।उमेश सेठ से इन नंबर पर संपर्क साधा जा सकता है। 09454163441








माणिक,
इतिहास में स्नातकोत्तर.बाद के सालों में बी.एड./ वर्तमान में राजस्थान सरकार के पंचायतीराज विभाग में अध्यापक हैं.'अपनी माटी' वेबपत्रिका पूर्व सम्पादक है,साथ ही आकाशवाणी चित्तौड़ के ऍफ़.एम्. 'मीरा' चैनल के लिए पिछले पांच सालों से बतौर नैमित्तिक उदघोषक प्रसारित हो रहे हैं.उनकी कवितायेँ आदि उनके ब्लॉग 'माणिकनामा' पर पढी जा सकती है.

मन बहलाने के लिए चित्तौड़ के युवा संस्कृतिकर्मी कह लो.सालों स्पिक मैके नामक सांकृतिक आन्दोलन की राजस्थान इकाई में प्रमुख दायित्व पर रहे.आजकल सभी दायित्वों से मुक्त पढ़ने-लिखने में लगे हैं.वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय,कोटा से हिन्दी में स्नातकोत्तर कर रहे हैं.किसी भी पत्र-पत्रिका में छपे नहीं है.अब तक कोई भी सम्मान.अवार्ड से नवाजे नहीं गए हैं.कुल मिलाकर मामूली आदमी है.

1 टिप्पणी:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
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    इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (01-07-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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