किसी भी राष्ट्र की मूल पहचान उसकी अपनी संस्कृति से मानी जाती है - अपनी माटी

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किसी भी राष्ट्र की मूल पहचान उसकी अपनी संस्कृति से मानी जाती है


महिला सशक्तिकरण पर प्रथम छत्तीसगढ़ी आर्ट मूवी-अंजोर
रायपुर,  
तपेश जैन
किसी भी राष्ट्र की मूल पहचान उसकी अपनी संस्कृति से मानी जाती है और इसके प्रदर्शन का मुख्य जरिया सिनेमा होता है। ऐसे ही विशिष्ट संस्कृति सभ्यता के कारण छत्तीसगढ़ी कला-साहित्य को सम्पूर्ण विश्व में आदर के साथ देखा सुना जा रहा है।

छत्तीसगढ़ी बोली पर बनी पहली आर्ट-फिल्म ''अंजोर'' आगामी नवंबर माह में रीलिज होने वाली है। अंधविश्वास के खिलाफ जागरूकता फैलाने वाली इस फिल्म की अधिकांश शूटिंग राजधानी रायपुर के सन्निकट पास के गांवो में ही हुई है। फिल्म के निर्देशक तपेश जैन का मानना है कि फिल्में सामाजिक बदलाव लाने का एक सशक्त माध्यम है। जैसा कि ''अंजोर'' का आशय प्रकाश या उजाला से होता है, इसी नामारूप फिल्म अंजोर की कथावस्तु छत्तीसगढ़ में फैले पुराने अंध-विश्वास के खिलाफ है। इस फिल्म में एक डायलॉग है कि ''छत्तीसगढ़ ला सरल बनाना है, माटी के कर्ज चुकाना हैं  का उल्लेख करते हुए श्री जैन ने कहा कि वास्तव में जो व्यक्ति यहॉं के विकास के साथ गौरव की प्राप्ति हेतु समर्पित हो, छत्तीसगढ़ की माटी माता में प्रेम की अनुभूति रखता हो ,वही सच्चा छत्तीसगढिय़ा है। विशेषतया महिला सशक्तिकरण पर केन्द्रित इस फिन्म की खास बात यह है कि इस फिल्म में एक भी गाने का समावेश नही किया गया है। अपनी, पृथक-क्रांतिकारी सोच के साथ आगे बढऩे वाले, छत्तीसगढ़ी फिल्म निर्देशक श्री तपेश जैन का अटूट विश्वास है कि फिल्म-अंजोर ,दर्शकों को भरपूर मनोरंजन के साथ- साथ छत्तीसगढ़ की अंजोर संस्कृति का सुयश बिखेरते हुए नए कीर्तिमान स्थापित करेगी।

 एक खास मुलाकात- तपेश जैन से
'' छत्तीसगढ़ की उन्नति, संस्कृति के लिए कार्य करे वही छत्तीसगढिय़ा - तपेश जैन 
छत्तीसगढ़ की अपनी अलग परम्परा है। यही परम्पराओं को विभिन्न अंदाज में समेट कर प्रोड्यूसर होने के नाते दर्शकों तक विगत 17 सालों से दर्शकों को परोस रहें है। चाहे वह छत्तीसगढ़ी फिल्म हो या डाक्यूमेंटी फिल्म हो या सच्ची घटना पर आधारित ही क्यों हो? दर्शकों ने निर्माता तपेश जैन की फिल्मों को देखना पसन्द किया है। श्री जैन के फिल्मों के लम्बे कैरियर में अब परिपक्वता गई है। छत्तीसगढ़ी संस्कृति कला का फिल्मों में अद्भूत समागम छत्तीसगढ़ वासियों के दिलों को छु जाती है।

बहुमुखी प्रतिभा के धनी श्री जैन के बारे में जानकारों का मानना है कि वे पत्रकारिता के क्षेत्र में भी अपनी कलम का जादू दिखा चुके है। इनकी चार किताबें भी प्रकाशित हो चुकी है। नाटकों में भी इन्होंने अभिनय से अपनी शुरूआत की। उस समय की ललक के कारण इन्हें आज छालीवुड में स्थापित निर्माता - निर्देशक का दर्जा प्राप्त करनें में कहीं कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ा। श्री जैन अब तक 36 डाक्युमेंटी फिल्मों का निर्माण निर्देशन कर चुके हैं। इतना ही नहीं इन डाक्युमेंट्री फिल्मों की स्क्रीप्ट भी श्री जैन ने लिखी है। छत्तीसगढ़ी फिल्मों में इनकी पकड़ आज किसी से छुपी नहीं है।

प्रस्तुत है हमारे प्रतिनिधि से अनौपचारिक चर्चा के दौरान पूछे गए कुछ  अंश-

1)    फिल्म निर्माण का जुनून आप में कब जागा?
    
बचपन से ही फिल्मों के प्रति रूझान था। नाटक मंचन को शौक से देखा करता था।  मसूद अहमद जी के यहां आना-जाना था। कैमरे का एंगल एवं वीडियों की समझ इलेक्ट्रानिक मीडिया से जुडऩे के बाद हो गई थी। बचपन में देखे फिल्म श्री 420 का जुनून इस कदर सवार हुआ कि मेरा बचपन ही फिल्मों के मायाजाल में खोकर रह गया।

2)    आपकी आर्ट फिल्म अंजोर कब प्रकाशित होगी?
    
अगामी सितम्बर माह में रिलिज होने वाली अंजोर फिल्म पूर्णत: नारी शसक्ति करण पर आधारित है। इस फिल्म में नारी की भूमिका प्रधान है। इस फिल्म में एक और खास बात यह है कि एक भी गाने का समावेश नहीं किया गया है।

3)    फिल्मी कैरियर में आपको मुख्य उपलब्धियां क्या रही ?
    
अब तक मैने 36 डाक्यूमेंटी फिल्मों का निर्माण किया है। स्वर्ण तीर्थ राजिम, जय मां महामाया, जय मां बम्लेश्वरी एवं जय माँ दंतेश्वरी आदि खास चर्चित डाक्युमेंटी फिल्मे हैं। लेखन के क्षेत्र में भी चार किताबें दिल्ली से प्रकाशित हो चुकी है।

4)    सुनने में आया है कि आप छत्तीसगढ़ लोक कलाकार संस्थान के महासचिव भी हैं ? इस नाते छत्तीसगढ़ी संस्कृति के विकास हेतु आपने अब तक क्या-क्या प्रयास किए हैं ?
    
सन् 1998 में लोक कलाकार संस्थान का गठन किया गया। महासचिव होने नाते पुरे छत्तीसगढ़ में घुम-घुम कर प्रचलित कला संस्कृति का मुझे ज्ञान हुआ है। छत्तीसगढ़ी बोली को राजभाषा का दर्जा दिलाने हेतु हमने कई बार आंदोलन किया है। हेमन्त भाई मूलत: छत्तीसगढिय़ा हूं। छत्तीसगढ़ की माटी महतारी में अपूर्व वात्सल्यता के गुण होने के कारण मुझे धरती के इस भूखण्ड से अटूट लगाव है तथा मैं दिल से मानता हूं कि असली छत्तीसगढिय़ा तो वही है जो छत्तीसगढ़ के विकास के लिए कार्य करे, छत्तीसगढ़ की उन्नति में ही स्वयं को गौरवान्वित महसूस करे।

5) छत्तीसगढ़ वासियों के लिए आप क्या संदेश देना चाहते हैं ?
    
छत्तीसगढ़ वासियों से मैं यही अपेक्षा रखता हूं कि वे सदा एक रहें, नेक रहें, यहां की मिट्टी प्रेम रूपी उर्वरा से कूट-कूट कर भरी हुई है। नि:श्छल सादगीपूर्ण यहां की मुख्य विशेषता है। इसी कारण सम्पूर्ण भारतवर्ष में छत्तीसगढ़ की एक अलग पहचान बनी हुई हैं।

जयप्रकाश मानस
एफ-3, छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल,
आवासीय परिसर पेंशनवाड़ा, विवेकानंद नगर,
रायपुर, छत्तीसगढ़-492001
(मोबाइल-94241-82664)

उनका पूरा परिचय यहाँ पढ़ा जा सकता है.

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