Latest Article :
Home » , , » अर्चना ठाकुर की दो कवितायेँ

अर्चना ठाकुर की दो कवितायेँ

Written By Manik Chittorgarh on गुरुवार, सितंबर 13, 2012 | गुरुवार, सितंबर 13, 2012

(1)


मुझे उम्मीद थी जिस सुबहा की
मुझे उम्मीद थी जिस सूरज की रोशनी की
मुझे उम्मीद थी चिड़िया के जिस मोहक शोर की
मुझे उम्मीद थी जिस चमकते खुले आँगन की
मुझे उम्मीद थी चिमनी से उठते जिस धुऐ की
बस वही नहीं था
सब कुछ हुआ ऐसा
नई बहू को आँगन में जला दिया
उठी तेज़ रोशनी
चीखो के शोर की साथ
फिर शेष रह गया धुआ
सुबहा तक अखबार के एक कोने में आने की चाह में .....

(2)
कैसे समझाऊँ
किन शब्दो को करूँ पेश
की तुम समझ जाओ
मेरे निर्गुण मन की अभिलाषा
और कर लो स्वीकार
हुलास भरे मन से उसे
की मैं नहीं आना चाहती
फिर उनही पगडंडियो पर
जिनहे लांघ कर
निकल चुकी हूँ
क्षितिज के उस पार....


परिचय 
जन्म : 05 मार्च, 1980
जन्म स्थान : कानपुर(उत्तर प्रदेश)
शिक्षा : मनोविज्ञान में स्नातकोत्तर उपाधि,परामर्श में डिप्लोमा,एम0 फिल  (मनोविज्ञान)
प्रकाशन : विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कविताएँ, कहानियाँ, लघु कथा  आदि का प्रकाशन
सम्पर्क :  अर्चना ठाकुर, तेजपुर ,सोनित पुर जिला ,आसाम
             arch .thakur30 @gmail .com
            archana.thakur.182@facebook.com
Share this article :

2 टिप्‍पणियां:

संस्थापक:माणिक

संस्थापक:माणिक
अपनी माटी ई-पत्रिका

सम्पादक:जितेन्द्र यादव

सम्पादक:जितेन्द्र यादव
अपनी माटी ई-पत्रिका

एक ज़रूरी ब्लॉग

एक ज़रूरी ब्लॉग
बसेड़ा की डायरी:माणिक

यहाँ आपका स्वागत है



ज्यादा पढ़ी गई रचना

यहाँ क्लिक करके हमारी डाक नि:शुल्क पाएं

Donate Apni Maati

रचनाएं यहाँ खोजिएगा

हमारे पाठक साथी

सम्पादक मंडल

साहित्य-संस्कृति की त्रैमासिक ई-पत्रिका
'अपनी माटी'
========
प्रधान सम्पादक
सम्पादक
सह सम्पादक
तकनिकी प्रबंधक
========
संपर्क
apnimaati.com@gmail.com
========

ऑनलाइन

Donate Us

 
Template Design by Creating Website Published by Mas Template