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सुनहरे हर्फों में लिखा एक बेमिसाल अध्याय''खेजड़ी''

Written By Manik Chittorgarh on बुधवार, सितंबर 26, 2012 | बुधवार, सितंबर 26, 2012


राजस्थान का अकल्पनीय शौर्य से एक ऐसा अटूट रिश्ता है जो कई बार अचम्भित कर देता है और उस शौर्य की मिसाल पेश करने के लिए जरुरी भी नहीं है कि हर बार रण-भूमि हो या कोई शत्रु दल ही समक्ष हो। वीर-वीरांगनाओं ने तो 
प्राणोत्सर्ग करने के लिए तो आवश्यकता पड़ने पर अपने घर-आँगन में ही हँसते-हँसते प्राणोत्सर्ग किया है जो न केवल अतुलनीय शौर्य की गाथा बना है वरन आने वाली पीढ़ियों का शुभ-पंथ-पाथेय भी सिद्ध हुआ है। 

वैसे खेजड़ी कहने को तो मरुभूमि में बहुतायत से पाया जाने वाला एक पेड़ ही है जो मेरी अत्यधिक प्रिय केर-सांगरी की बेहद स्वादिष्ट सब्जी का एक हिस्सा भी उपलब्ध करवाता है दूसरा हिस्सा पाने के लिए केर को ढूंढना पड़ता है पर अभी तो खेजड़ी की बात करनी है इसलिए केर की बात फिर कभी। तो इसी खेजड़ी के अमूल्य वृक्ष ने राजस्थान के वीर-वीरांगनाओं को अपने शौर्य का परिचय देने का जो कारण उपलब्ध कराया वो आज भी सारी दुनिया के लिए एक मिसाल है और पर्यावरण के प्रति भारतीय जागरूकता का एक सुनहरे हर्फों में लिखा एक बेमिसाल अध्याय भी है। 

जोधपुर से 24 किलोमीटर दूर विश्नोइयों के गाँव खेजड़ली में जोधपुर महाराज के सैनिकों ने किले में नवीन निर्माण के लिए खेजड़ी के वृक्ष काटने चाहे तो एक विश्नोई महिला अमृता देवी ने इसका विरोध किया . राजा के सैनिकों ने कीमत देनी चाही तो उसने कहा

दाम लियां लागे दाग टुकड़ो देवो न दान 
सिर साटे रूँख रहे तोई सस्तो जान 


सिर कट जाए और पेड़ बच जाये तो भी सस्ता ही है। ये भावना थी राजस्थान की एक वीरांगना की . सैनिकों को विरोध पसंद नहीं आया उन्होंने अमृता देवी के शरीर के टुकड़े-टुकड़े कर दिए फिर उनकी बेटियों ने विरोध किया वो भी मारी गयीं एक-एक करके लोग आते गए और पेड़ बचने के लिए 363 लोगों ने अपनी जान न्यौछावर कर दी। बाद में राजा ने इस पापकर्म की माफ़ी मांगी लेकिन तब तक राजस्थानी शौर्य सारी दुनियां के सामने अपनी वीरता और पर्यावरण प्रेम की कभी न भुलायी जाने वाली दास्तान पेश कर चुका था। कुछ पेड़ों के लिए तीन सौ तिरेसठ लोग अपनी जान न्यौछावर कर दें सहसा तो इस बात पर यकीन ही नहीं होता लेकिन ये राजस्थान है ................ 

आ तो सुरगां ने सरमावै ई पर देव रमण ने आवै 
ईं रो जस नर-नारी गावै धरती धोरां री 
ईं रै सत री आण निभावां ईं रै पत नै नहीं लजावां 
ईं नै माथो भेंट चढ़ावा मायड़ कोडां री धरती धोरा री

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