लोक संस्कृति के हालात सभी जगह एक से - अपनी माटी ई-पत्रिका

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका('ISSN 2322-0724 Apni Maati')

नवीनतम रचना

लोक संस्कृति के हालात सभी जगह एक से

मणिपुरी नृत्य का पर्याय बन चुकीं पदमश्री से सम्मानित दर्शना झावेरी जी के नृत्य के साथ-साथ उनके स्वभाव की सौम्यता किसी को भी प्रभावित करने की सामर्थ्य रखती है। एक पूरा दिन उनके कार्यक्रमों के नाम रहा तो बीच-बीच में मिलने वाले समय में मेरे अनगिनत सवालों ने उन्हें संभवत: विचलित किया भी होगा लेकिन उन्होंने कोई शिकायत नहीं की बस हर एक सवाल का मुस्करा कर जवाब देती रहीं। मैंने पूछा कि गुजराती होने के बावजूद उन्होंने मणिपुरी नृत्य क्यों चुना तो उन्होंने कहा कि उनकी बड़ी बहन ने सीखना शुरू किया तो उनकी रूचि भी स्वत: जागृत हुई और उसका सारा श्रेय उनके गुरु को जाता है। 


बातों ही बातों बात राजस्थानी लोक संगीत तक पहुंची तो जब मैंने मांगनियार समुदाय के लोक संगीत के समक्ष खड़ी समस्याओं के बारे में उन्हें बताया तो उन्होंने बताया कि लगभग वैसी ही स्थिति मणिपुर में संकीर्तन की है जो वहां के सामाजिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है और चैतन्य महाप्रभु की देन है। कितनी अजीब बात है कि हमारे देश की बिल्कुल विपरीत दिशाओं में स्थित दो राज्यों की संस्कृति एक जैसी समस्या से ग्रस्त है। कभी संस्कृति का दृढ़ आधार वैविध्य में भी एकत्व का सृजन करता था आज वो आधार कमज़ोर पड़ रहा है और एकत्व अब संस्कृति के सौन्दर्य में नहीं वरन उसके समस्या ग्रस्त होते स्वरुप में जगह बना रहा है। हाँ ! दर्शना जी जैसे दीप-स्तम्भ गहरे होते अंधरे में अब भी रौशनी लिए इस तरह खड़े हैं कि उस खोये हुए रास्ते के फिर से मिल जाने की उम्मीद बंधती हैं जो रास्ता कभी पूरी दुनियां को रास्ता दिखाता था।

1 टिप्पणी:

ज्यादा जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें

Responsive Ads Here