डॉ सत्यनारायण सोनी की अनुदित कहानी 'आ फोटू अठै कियां' - अपनी माटी 'ISSN 2322-0724 Apni Maati'

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डॉ सत्यनारायण सोनी की अनुदित कहानी 'आ फोटू अठै कियां'

कहानी 'आ फोटू अठै कियां'(मूल राजस्थानी-डॉ सत्यनारायण सोनी)  
यह तस्वीर यहां कैसे(अनुवाद हिन्दी-मनमोहन कसाना)
14 अक्टूबर 2007
आज ईद है।
ईद से दो दिन पहले दरगाह में बम फूट गया। 
दो मर गये और बाईस जख्मी हुये। 
यह घटना दर्दनाक होने के साथ साथ देश के लिए शर्मनाक है।
लोग इसमें विदेशी हाथ बता रहे हैं।
लेकिन
लेकिन देश विदेश को छोडो..............
विदेश में इंसान नहीं रहते और देश में क्या हैवान ?
परदेस के ही एक आदमी गुलाम अली ने नवभारत टाईम की तरफ से आयोजित एक कार्यक्रम दिल्ली मेरा दल में गजल पेष करी थी। सुनने वाले झूम उठे थे मेरे साथी अंग्रजी के प्राघ्यापक राजेन्द्र कासोटिया वहीं बैठे थे उन्होने मोबाईल फोन के व्दारा लाइव गजल सुनाई थी। एक गजल का शेर था........
         
          कैसी चली है अबके हवा तेरे शहर में 
          बंदे भी हो गये हैं खुष तेरे शहर में 
          कुछ दुश्मनी का ढव है ना अब दोस्ती के तौर
          दोनों का एक रंग हुआ तेरे शहर में ।
        शायद उन्हें पता था कि खातिर अजनबी 
          लोगों को लूठ लिया तेरे शहर में।
............. शायर तो शायर है इसमें देष विदेश क्या! क्या हिन्दू मुसलमान ।
लेकिन उस आदमी का क्या करें......... जो पिछले दिन रामस्वरुप किसान के बहार के कमरे में आ बैठा। उसने कमरे में लटकी तस्वीरों की तरफ उंगली करते हुऐ पूछा ‘‘ यह फोटू!’’ 
‘‘ किशोर कुमार की!’’ किसान जी ने बताया।
‘‘ और यह ?’’ उसने दूसरी तस्वीर की तरफ उंगली की।
‘‘ मोहम्मद रफी की । ’’ किसान जी मोहम्मद रफी के पक्के फैन हैं। और उनका बेटा कृष्ण भी। होठों से नाम निकलते ही उनके मुहं पर खुषी और आंखों में चमक आ गई। जैसे उन्हें मोहम्मद रफी का नाम लेने में ही बहुत गर्व हुआ हो।
लेकिन................
लेकिन वो आदमी .... जिसकी फोटू की तरफ उंगली करके पूछा था उसकी आंखों में वह खटका और इसी तरह उसके बोल...........।
..... इसकी फोटू हमारे घर में !
सुनकर किसान जी के चेहरे का रंग बदल गया। उस आदमी ने सम्प्रदाय विशेष के लिए अपमान जनक शब्द कहे। और किसान जी को इस बात बहुत तेज गुस्सा आया। बोले ‘‘ भाई सहाब ! पानी पियो और यहां से चलता बनो जल्दी। मै आपको नहीं बता सकता। ’’ बस वो आदमी चला गया वहां से।
    ...........................................................................................................
आज ईद है।
अभी मेरी नींद खुली ही थी कि विजय का फोन आ गया। 
‘‘ गुरुजी! ईद मुबारक।’’
आपको भी।.............. और सुना। 
गुरुजी ईद मुबारक का कोई धांसू सा एस एम एस बना कर भेजो।
क्यो ! भाई तुम्हें क्या जरुरत है ?
क्यों ईद हमारी नहीं है क्या ?.... वो हंसते हसते बोला ।
मैं भी हंसते हुऐ बोला ...... भेजू भाई भेजू।
इतने में फेंफाने से महबूब अली का मैसेज आया।
   ‘‘ आज खुदा की हम पर मेहरबानी
     करदे माफ हम लोगों की सारी नाफरमानी
     ईद का दिन आज आओं मिल करें ये वादा
     खुदा की ही राहों में हम चलेंगें सदा
     सारे अजीजों करीबों को ईद मुबारक। ’’

तुरन्त ही अमीन खान का मलसीसर से आया।
ईद दिवाली दौनू आवै ई महीनै रे माहं 
हिन्दू  मुसलीम सगला मिलैं घाला गले न बाहैं।
मैने ये दोनों ही एस एम एस ।

घर में रौनक है।
आज नीतू बेटी अपनी सहेली मैमुना के घर खाने पर जा रही है। वह तैयारी कर रही है। इसी बीच मुझे एक बात का घ्यान आया जो नीतू की मैडम ने मुझे कही कि नीतू की संगत को सुधारो। मैनें कोई ज्यादा सबाल जववा नहीं किये थे उस मैडम से। परन्तू मुझे चिन्ता तो हो ही गई। 
शाम को बहुत प्यार से नीतू को वह शिकायत वाली बात बताई। सुनते ही वह रोने लगी...............। 
‘‘ पापा ! मैडम मैमुना के लिए कहती है ।’’
मुझे अचम्भा हुआ । क्यों ?
मैडम को वह स में रहने वाले बच्चे अच्छे नहीं लगते ।
प्रमोद को भी मुश्ताक ने आमंत्रित किया है। मिठाई बटेगी। वह मुष्ताक के लिए भेंट तैयार कर रहा है। वह तैयार हुआ इतने मे ही मुश्ताक अपने जुगाड को लेकर आ गया। उसके साथ दो और भी थे जुगाड पर।
नीतू मैमूना के और प्रमोद  मुश्ताक के घर गये।

दीवाली का दिन नजदीक आ गया।
हारुन आज भी नहीं आया। घर की हालत कब सुधरेगी। पंद्रह वर्ष हो गये बनाये । लेकिन इसका महुर्त ही नहीं निकला। पत्नि बोली।
आज तो ईद है हारुन आज तो आयेगा नहीं । 
ईद से अगले दिन से लगने की कह रहा था।
‘‘ तो फोन करके पुछ लो! कल से लगेगा तो आज षाम को दोनों कमरा खाली करलें। बैड और कम्प्यूटर बाहर के कमरे में सजाना पडेगा।’’

मैं ! हारुन को फोन करता हूं। मोबाईल की डायरेक्ट्री खोली। हारुन का नाम खोज करके डायल किया। घंटी जाने लगी ... ‘‘ हरे राम....हरे राम हरे कृष्णा हरे राम......। सुना। फोन काट दिया। सोचने लगा यह कॉलरटून हारुन की नहीं हो सकती। लगता है गलत नम्बर लग गया। दुबारा ढंग से फोन लगाया। वही टून आई।
मैनें अजय को आवाज दी। वो आ गया।
‘‘ बेटा! हारुन का नम्बर देख कर बता।’’ 
‘‘ निनानवें दौ सौ चौरासी पन्द्रह जीरो चवालीस।’’ उसने डायरी में देखकर बताया। 
मैनें फिर डायल किया। मोबाईल पर कॉलिंग के साथ साथ हारुन का नाम आया। नम्बर तो वही है। 
हरे राम हरे राम ....... हरे कृष्णा ..... हरे राम फिर वही टयून। उसने फोन रिसीव किया। मेरे बोलने से पहले ही उसकी आवाज आयी। 
गुरुजी ! राम राम !
‘‘ राम राम भई राम राम। ईद मुबारक।’’
‘‘ गुरुजी आपको भी।’’
‘‘ यार ये टयून ? फौन तो तेरा ही है न ?’’
हॉं क्यों अच्छी नहीं लगी ?
है तो अच्छी । मैनें बात बदलते हुऐ अपने मतलब की बात शुरू की।
हारुन तू सुबह ही आ रहा है न । मै सामान बहार निकाल लूं। 
हां गुरुजी निकाल लो। सुबह आठ बजे आ जाउंगा।
ठीक! मैने फोन काट दिया।

मै सामान बहार निकालने लगा।
मै उतरादै के पास वाले कमरे की आलमारी खाली कर रहा था। इसमें कमरे सामने एक थान है यानि की पूजाघर है। वहां शिवजी और गणेश जी की मूर्तीयां है दुर्गा लक्ष्मी व हनुमान जी की फोटू भी सजी हैं। मैं कभी पूजा पाठ नहीं करता मेरी पत्नि इस बात से बहुत नाराज रहती है। वह है पक्की धार्मिक। स्कूल का दरवाजा भी नहीं देखा। लेकिन बच्चों को देख देख कर वह घर ही पढ़ गई और अटक अटक कर ही सही अक्षर तो पढ़ लेती है। कल ही बारह महीने के व्रत त्यौहारों की किताब खरीदी है। वह भी इधर ही सजा रखी है। 
आलमारी खाली करते करते मेरी नज़र मन्दिर पर पड़ी । हनुमान जी और दुर्गा की फोटू के बीच में मुझे नयी फोटू दिखी। हाथ में उठा कर देखी तो एक पुराने पोस्ट कार्ड पर अखबार की रंगीन कटिंग चिपका रखी थी। जिस पर चांद और तारों के चित्र और उपर देवनागरी और नीचे फारसी लिपी में मोटे मोटे अक्षरों में लिखा था 
‘‘ ईद मुबारक।’’
मेरे आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा। मैं वह फोटू उठाकर आंगन में लाया और पूछा.. यह फोटू ... यह फोटू मन्दिर में किसने लगाई भाई।

‘‘ मैने लगाई।’’ पत्नि हंसकर बोली। वह मुस्कराते हुये मेरा मुंह देखती हुई बोली ‘‘ लेकिन आप को  कोई तकलीफ ?’’
मुझे क्या तकलीफ हो सकती है और इस बात से क्या किसी को कोई तकलीफ होगी।
(डॉं. सत्यनारायण सोनी जिनकी अब तक दो कहानी संग्रह आ चुके है। राजस्थानी के जाने माने लेखक और कथेसर पत्रिका के माननीय संपादक हैं।)

मनमोहन कसाना
युवा हैं। उत्साही हैं। भरतपुर, राजस्थान की वैर तहसील के जगजीवनपुर गाँव में रहते हैं। अपने शुरुआती सफ़र में बहुत पत्र-पत्रिका में छप चुके हैं। उनके अच्छे भविष्य की कामनाएं। 
मो-09672281281,9214281281

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