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हिन्दी पत्रकारिता के हस्ताक्षर 'आचार्य लक्ष्मी कांत मिश्र'

Written By Manik Chittorgarh on मंगलवार, अक्तूबर 23, 2012 | मंगलवार, अक्तूबर 23, 2012

  • हिन्दी पत्रकारिता के सषक्त हस्ताक्षर थे आचार्य लक्ष्मी कांत मिश्र
  • प्रथम पुण्यतिथि मनायी गयी
  • सज्जन कुमार गर्ग

आचार्य लक्ष्मी कांत मिश्र पूर्व  बिहार के हिन्दी पत्रकारिता के सशक्त हस्ताक्षर थे । पत्रकार होना कोई महत्वपूर्ण नही क्योकि आज पहले की उपेक्षा बहुत ज्यादा पत्रकार हैं। सबसे बड़ी बात है इंसान होना और मानवीय गुणो से लैस होना । यही किसी व्यक्ति की सबसे बड़ी खासियत है । मानवीय संवेदना के कारण वे काफी चर्चित थे । उनका दरवाजा हर किसी के लिए खुला मिलता था। हर किसी की बात सुनते समझते थे और जहाँ तक मदद होता था करने को तत्पर रहते थे। यही कारण था कि उनका व्यक्तित्व हमें आजीवन आकर्षित करता रहा। लक्ष्मीकांत मिश्र जी पूरे मुंगेर में बाबा के नाम से चर्चित थे, उसका व्यक्तित्व इतना शालीन, शिष्ट और गरिमापुर्ण था कि उन्हें हर जगह सम्मान मिलना था।गत् वर्ष जिला प्रशासन द्वारा भी आचार्य मिश्र को सम्मानित किया गया।आचार्य लक्ष्मी कांत मिश्र की प्रथम पुण्यतिथि पर सुचना व जनसर्म्पक कार्यालय(मुंगेर) में स्मृति समारोह का आयोजन परमार्चाय स्वामी निरंजनानंद सरस्वती की अध्यक्षता में किया गया। जिसमें सर्वप्रथम स्वामी सरस्वती ने आचार्य मिश्र जी की स्मृति में मोहगनी का वृक्षारोपण किया, वही जिलापदाधिकारी कुलदीप नारायण ने मिश्र जी की तस्वीर पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पण की। समारोह का संचालन राजीव कुमार सिंह कर रहें थें।

परिवार न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जितेन्द्र कुमार ने अग्रसर स्मारिका का लोकार्पण किया। वही आचार्य लक्ष्मी कांत मिश्र के व्यक्तित्व पर आयोजित संगोष्ठी मै वरिष्ठ पत्रकार प्रो0 ओम प्रकाश साह प्रियम्वद ने विषय प्रवेश करते हुए कहा कि आचार्य मिश्र की पहचान एक ख्यातिलब्ध पत्रकार यशस्वी संपादक, निंबधकार  तथा निर्भिक वक्ता के रूप मे रही, यदि यह कहा जाये कि उन्होने पत्रकारिता को एक नूतन तथा अभिनव शैली को जन्म दिया तो कोई अतिशयोक्तिन होगी। इन्होने अपने पत्रकार जीवन के 45 संस्मरणात्मक निंबध लिखे जो ’यादो का आईना’ में संकलित हैं। इनका व्यक्तित्व कई प्रसंगो में जर्नलिज्म के कई रूप में उभरकर आता था और तब वे एक गाईड की भांति दिखते थे। वे बिहार राज्य संवाददाता संघ के अध्यक्ष, मुगेंर जिला हिन्दी साहित्य सम्मैलन के अध्यक्ष पूर्वाचल भारत सेवक समाज तथा पूर्वाचल सदाचार समिति तथा मैथिल परिषद मुगेंर के अध्यक्ष रहे, उन्होने जीवन भर स्मरण राज्य और मुफसिल संवाददाता के लिए संघर्ष किया जो भुलाया नहीं जा सकता मिश्र जी कहा करते थे कि पत्रकार को किसी प्रकार के दबाव और धमकियों के आगे झुकना नही हैं तभी लोकतंत्र की रक्षा हो सकेगी। उनका व्यक्तितत्व पत्रकारिता का एक संस्थान बन गया था।

जितेन्द्र कुमार ने कहा कि मेरा संपर्क मिश्र जी से नही हो पाया किन्तु मालूम हुआ कि वे आजीवन एक पत्रकार एवं समाजसेवी के रूप में जनकल्याण तथा राष्ट्र सेवा के प्रति समर्पित रहें। उनकी विचार शैली सादगी तथा उच्च विचारो की चर्चा से मन प्रसन्न हो पड़ता हैं। मृदुला झा ने कहा कि मिश्र जी निर्भिक तथा वेवाक लिखने वाले पत्रकार थे। मिश्र जी एक आकर्षक व्यक्तित्व के स्वामी थे ।पत्रकार अवधेश कुवँर ने कहा कि मिश्र जी भारतीय संस्कृति और राष्ट्र भाषा के सच्चे पश्रधर थे,प्रो0 शिवरानी ने कहा कि मिश्र जी स्वभाव से साहित्यिक थे। जिसे काल ने पत्रकार बनाया, वे बड़े विद्वान,अध्येता और श्रेष्ठ चिंतक थें, दिमाग सुपर कम्प्यूटर था जो सुन लिया वह याद रहता । प्रमंडलीय आयुक्त एस0 एम0 राजू का लिखित संदेश था आचार्य लक्ष्मीकांत मिश्र हिन्दी पत्रकारिता में अपने योगदान के लिए सर्वदा जाने जायेगें। उन्होनें मूल्यो की पत्रकारिता में पारदर्शिता, स्पष्टवादित, निर्भिकता के साथ संवेदनशीलता उनके व्यक्तित्व में समाहित था। वही जानेमाने स्वतंत्र पत्रकार कुमार कृष्णन ने अपने संदेश द्वारा श्रद्वांजलि अर्पित करते हुए कहा कि आचार्य लक्ष्मीकांत मिश्र बिहार के पत्रकारिता के शीर्ष स्तम्भ थे जिन्होनें आजिवन पत्रकारिता के मूल्यों का निर्वहन किया और उसकी गरिमा को कायम रखा। जिलापदाधिकारी कुलदीप नारायाण ने कहा कि पत्रकारिता एक कठिन कार्य हैं, लेकिन मिश्र जी ने जिस प्रकार अपने जीवन को पत्रकारिता के लिए जिया वह सराहनीय हैं, मिश्र जी के नही रहने से कुछ वैक्यूम सा हो गया हैं, उन्होने मिश्र जी को भीष्म पितामह बताया। इस अवसर पर उदगार व्यक्त करते हुए पूर्व सांसद ब्रहमानंद मंडल, राजकुमार सरावगी, राजीव सिहं स्वामी शंकरानंनद जी, काशी प्रसाद राजगढ़िया,शिक्षक नेता नवल किशोर सिहं आदि उल्लेखनीय हैं। मिश्र जी की पुत्री इंदु मिश्र ने कहा कि पिता जी बराबर कहा करते थे कि पत्रकारो को हमेशा यह ध्याण रखना चाहिए पाठक भी विद्वान और विचारक होते हैं । वे सरल और शालीन थें और अपनी संतानो को शालीन बनाया

अध्यक्ष पद से उदगार व्यक्त करते हुए परमार्चाया स्वामी निरंजनानंद सरस्वती ने कहा कि आचार्य लक्ष्मीकांत मिश्र जन्म से ही अपने साथ अच्छे संस्कार लेकर आए थे जिससे वे ख्याति अर्जित कर सकें। संन्यासी ब्रहम चैतन्य (श्री लक्ष्मी कांत मिश्र) श्री स्वामी सत्यानन्द सरस्वती जी के निकट प्रियजनों में एक थें 60-70 के दशक में श्री स्वामी जी जब भी भारत में योग सम्मेलनो में कहीं जातें तो श्री लक्ष्मीकांत जी को साथ ले जाते थें। एक अति सामान्य परिवार से आने पर भी श्री मिश्र जी ने पत्रकारिता में कभी सत्य और न्याय से समझोता नही किया । मुंगेर मिश्र जी के प्रति कृतज्ञ हैं। शिवगुरू धाम के स्वामी अनुरागानंद जी ने कहा कि लक्ष्मीकांत मिश्र एक महान पत्रकार के साथ-साथ महान इंसान भी थें । । बिहार समाचार के पूर्व संपादक सह जन संर्पक विभाग के उपनिर्देशक डॅा0 रामनिवास पाण्डेय ने धन्यवाद ज्ञापन के दौरान कहा कि आचार्य मिश्र जी अपने आप में पत्रकारिता की पाठशाला बन गये थें। मूर्धन्य पत्रकार मिश्र जी एक निर्भीक पत्रकार के साथ बहुआयामी व्यकिततत्व के समादरणीय व्यक्ति थें बिना झुके मूल्यों की पत्रकारिता के संबल से वे सदैव अपने धर्म पर अडिंग रहें। कई समाचार पत्रो के संवाददाता स्तंभकार के साथ ‘अग्रसर’ साप्ताहिक का संपादन करतें हुए मिश्र जी आजीवन हिन्दी पत्रकारिता की सेवा करते रहें। उनकी कमी तो रहेगी पर उनके द्वारा स्थापित मूल्यों को यादकर उन्हे सदैव जीवित रखा जा सकता हैं। पुण्यतिथि के मौक पर पत्रकार नरेश चन्द्र राय राणा गौरी शंकर,चन्द्रशेखरम्,अरूण कुमार शर्मा, दिपक विश्वास,सैफ,अभिषेक सोनी, चिक्कू कुमार, प्रवीण झा,सुनिल कु0 गुप्ता जख्मी,प्रंशात कुमार, संजय कुमार,कंचन शर्मा, सुब्रत कुमार सिंह,अधिवक्ता प्रदीप अनुपम, अनिरूद्व सिन्हा, राजेश जैन, शिव कुमार रूंगटा, निर्मल जलान सहित शहर के साहित्यकार व गणमान्य लोग शमिल थे।      


सज्जन कुमार गर्ग
द्वारा हरिश्चन्द्र गर्ग
सदर बाजार मारवाड़ी मोहल्ला
पोस्ट-जमालपुर
जिला-मुंगेर
मो0-09931554140
garg.sajjan@gmail.com

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