Latest Article :
Home » , , » संजीव निगम की दो पद्य रचनाएं

संजीव निगम की दो पद्य रचनाएं

Written By Manik Chittorgarh on शनिवार, अक्तूबर 27, 2012 | शनिवार, अक्तूबर 27, 2012

       [१]
कुछ तो कोमल गीत ,
मैंने भी लिखे हैं,
पर सुने तुमने नहीं, 
क्या फायदा है !......

कागज़ों पर जब उतर आती हैं तो,
बिन ज़बां के बोलने लगती हैं वो,
अनकही बातों को शब्दों में समेटे,
कुछ तो भावुक पत्र , मैंने भी लिखे हैं,
पर पढ़े तुमने नहीं, 
क्या फायदा है!.......

शब्द के बंधन फिसलते जा रहे हैं.,
भाव लेकर अर्थ सम्मुख आ रहे हैं,
प्रेम के पन्नों में अपनी चाह के ,
कुछ तो सूखे फूल मैंने भी रखे हैं,
पर दिखे तुमको नही,
 क्या फायदा है !.......

फिर भी कुछ है जो कहा जाता नहीं,
मौन रह कर पर सहा जाता नहीं,
एक हलकी सी छुअन, जिसे बोल डाले,
कुछ तो मीठे स्पर्श , मैंने भी रखे हैं,
पर छुए तुमने नहीं, क्या फायदा है !
कुछ तो कोमल गीत ,
मैंने भी लिखे हैं,
पर सुने तुमने नहीं, 
क्या फायदा है !

  [२] 
शब्द तुमने हैं पढ़े ,और 
बोले अनगिनत.
सूक्ष्म सूत्रों की करी हैं ,
व्याख्याएं अनवरत,
हाथ की संकेत भी हैं,
नयन की भाषा अनत,
फिर भी तुम में भावना है, प्रेम है ,
कैसे ये मानूँ?
मौन की भाषा , पढ़ो तो जानूं.
पुस्तकों का ज्ञान है ,
तीरों भरे तरकश समान ,
और  तुम इतनी पढ़ी हो ,
इतना बड़ा है तुमको ज्ञान ,
तर्क से सिद्ध कर देती हो कि 
प्यार होता है महान,
दिल से इसे सच मानती हो
कैसे ये मानूँ ?
मौन की भाषा पढ़ो तो जानूं .....
दिल विवादित क्षेत्र है,
वादी कई हैं.
ये परिभाषाएं , नए युग ने 
गढ़ी हैं.
मन में कोई आज है 
तो कल नहीं है.
ऐसे सोचों से अलग होगी 
कैसे ये मानूँ?
मौन की भाषा पढ़ो तो जानूं


संजीव निगम 

हिंदी के चर्चित रचनाकार.  कविता, कहानी,व्यंग्य लेख , नाटक आदि विधाओं में सक्रिय रूप  से  लेखन कर रहे हैं. अनेक पत्रिकाओं-पत्रों में रचनाओं का लगातार प्रकाशन हो रहा है. रचनाएं कई संकलनों में प्रकाशित. कई सम्मान प्राप्त.कुछ टीवी धारावाहिकों,18  कॉर्पोरेट फिल्मों का लेखन.आकाशवाणी के विभिन्न केन्द्रों से 16 नाटकों का प्रसारण.

मूलतः दिल्ली निवासी पर अब मुंबई में स्थायी निवास. यहाँ की कई साहित्यिक व सामाजिक संस्थाओं से जुड़े हुए.एक राष्ट्रीयकृत बैंक के मुख्य प्रबंधक [मार्केटिंग, प्रचार व जनसंपर्क ] के  पद से स्वेच्छा से त्यागपत्र देकर अब सक्रिय रूप से स्वतंत्र लेखन. विज्ञापन जगत से जुड़े हुए. जनसंपर्क  व विज्ञापन विशेषज्ञ 

डी - २०४,संकल्प-२,पिम्परिपाडा,
फिल्म  सिटी रोड,
मलाड [पूर्व], मुंबई-४०००९७. 
ई -मेल :sanjiv_nigam@yahoo.co.in

Share this article :

2 टिप्‍पणियां:

'अपनी माटी' का 'किसान विशेषांक'


संस्थापक:माणिक

संस्थापक:माणिक
अपनी माटी ई-पत्रिका

सम्पादक:जितेन्द्र यादव

सम्पादक:जितेन्द्र यादव
अपनी माटी ई-पत्रिका

सह सम्पादक:सौरभ कुमार

सह सम्पादक:सौरभ कुमार
अपनी माटी ई-पत्रिका

यहाँ आपका स्वागत है



ज्यादा पढ़ी गई रचना

यहाँ क्लिक करके हमारी डाक नि:शुल्क पाएं

Donate Apni Maati

रचनाएं यहाँ खोजिएगा

हमारे पाठक साथी

सम्पादक मंडल

साहित्य-संस्कृति की त्रैमासिक ई-पत्रिका
'अपनी माटी'
========
प्रधान सम्पादक
सम्पादक
सह सम्पादक
तकनिकी प्रबंधक
========
संपर्क
apnimaati.com@gmail.com
========

ऑनलाइन

Donate Us

 
Template Design by Creating Website Published by Mas Template