Latest Article :
Home » , , , » आगे से 'कथा' नियमित निकलती रहेगी

आगे से 'कथा' नियमित निकलती रहेगी

Written By Manik Chittorgarh on रविवार, अक्तूबर 28, 2012 | रविवार, अक्तूबर 28, 2012


पता
798, 
बाबा खड़ग सिंह मार्ग

नई दिल्ली-110001. 
-मेल : editor.katha@yahoo.com 
'कथा' की स्थापना सनृ 1969 में हुई थी। नई कहानी आन्दोलन के अग्रणी कथाकार मार्कण्डेय इसके संस्थापक थे। वर्ष 2010 तक यह पत्रिका मार्कण्डेय के सम्पादन में लगातार निकलती रही। लेकिन जब मार्कण्डेय जी 2010 में इस दुनिया से विदा हो गए, उनकी दोनों बेटियाँ डा. स्वस्ति सिंह और सस्या ने मिलकर 2011 में एक संस्मरण अंक निकाला था।

मार्कण्डेय की बड़ी बेटी डा. स्वस्ति सिंह स्वयं तो एक डॉक्टर हैं और वो भी पूर्वी उत्तरप्रदेश की एक चचित डॉक्टर। व्यस्तता इतनी कि अपने-अपनों से भी बात करने की फुर्सत नहीं। फिर भी, शायद यह रगों में दौड़ते रहने वाले उस तत्व का ही कमाल है कि चौबीसों घंटे पेशेंट और सीजर की बात करने वाली एक महिला डॉक्टर साहित्य में इतनी रूचि लेती है और 'कथा' किस तरह आगे निकलती रहे, इसपर सोचती रहती है।मार्कण्डेय की छोटी बेटी सस्या एक कलाकार हैं, हालांकि हैं तो विज्ञान की छात्रा लेकिन कथा का कवर बनाते हुए वे पूरी तरह से कलाकार दिखने लगती हैं और तब यह विश्वास और भी पक्का हो जाता है कि ज्यादातर स्थितियों में विज्ञान पढ़ने वाले छात्र ही अधिक कलात्मक होते हैं, अपेक्षाकृत साहित्य के छात्रों के !

अब मार्कण्डेय तो इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन पत्रिका अबाध चल रही है। इस वर्ष मई, 2012 में 'कथा' पत्रिका का एक विशेषांक मीराँबाई पर केन्द्रित होकर आया है। इसका सम्पादन हिन्दी के युवा कथाकार अनुज ने किया है। 'हंस', 'नया ज्ञानोदय', 'पाखी', 'परिकथा', 'इंडिया टुडे', 'शुक्रवार', 'अहा जिन्दगी', 'दैनिक जागरण', 'दैनिक भाष्कर', 'लोकमत' आदि लगभग सभी महत्वपूर्ण पत्र-पत्रिकाओं ने इसकी समीक्षाएँ प्रकाशित कीं और इसकी भूरि-भूरि प्रशंसा की हैं।आगे से 'कथा' नियमित निकलती रहेगी और इसका सम्पादन कथाकार अनुज ही करेंगे। इसका सम्पादकीय पता होगा : 798, बाबा खड़ग सिंह मार्ग, नई दिल्ली-110001. -मेल : editor.katha@yahoo.com आप सब इस ऐतिहासिक साहित्यिक पत्रिका को अपना नैतिक सहयोग दे सकते है

जयप्रकाश मानस
एफ-3, छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल,
आवासीय परिसर पेंशनवाड़ा, विवेकानंद नगर,
रायपुर, छत्तीसगढ़-492001
(मोबाइल-94241-82664)

उनका पूरा परिचय यहाँ पढ़ा जा सकता है.


Share this article :

2 टिप्‍पणियां:

  1. पत्रिका के सुखद भविष्य के लिए शुभकामनायें! क्या पत्रिका ऑन लाइन है?

    उत्तर देंहटाएं

'अपनी माटी' का 'किसान विशेषांक'


संस्थापक:माणिक

संस्थापक:माणिक
अपनी माटी ई-पत्रिका

सम्पादक:जितेन्द्र यादव

सम्पादक:जितेन्द्र यादव
अपनी माटी ई-पत्रिका

सह सम्पादक:सौरभ कुमार

सह सम्पादक:सौरभ कुमार
अपनी माटी ई-पत्रिका

यहाँ आपका स्वागत है



ज्यादा पढ़ी गई रचना

यहाँ क्लिक करके हमारी डाक नि:शुल्क पाएं

Donate Apni Maati

रचनाएं यहाँ खोजिएगा

हमारे पाठक साथी

सम्पादक मंडल

साहित्य-संस्कृति की त्रैमासिक ई-पत्रिका
'अपनी माटी'
========
प्रधान सम्पादक
सम्पादक
सह सम्पादक
तकनिकी प्रबंधक
========
संपर्क
apnimaati.com@gmail.com
========

ऑनलाइन

Donate Us

 
Template Design by Creating Website Published by Mas Template