''सुल्तानपुर की नई उपज डॉ डी.एम.मिश्र हैं।''- नरेश सक्सेना - अपनी माटी ई-पत्रिका

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका('ISSN 2322-0724 Apni Maati')

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''सुल्तानपुर की नई उपज डॉ डी.एम.मिश्र हैं।''- नरेश सक्सेना

वरिष्ठ कवि डॉ डी.एम.मिश्र के काव्य संग्रह इज्जत पुरम के लोकार्पण और संगोष्ठी में महावीर इन्टर कालेज लखनऊ के परिसर में दिग्गज साहित्यकार जुटे। प्रख्यात कथाकार शिवमूर्ति ने कृति का विमोचन करते हुए कहा कि यह अपने समय के नये सवालो को दागती है तो अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ कवि नरेश सक्सेना ने कहा कि सुल्तानपुर जैसे छोटे शहर से आज तक बड़े-बड़े साहित्यकार निकल रहे हैं उसी कड़ी में कवि डी.एम.मिश्र को देखा जा सकता है। सक्सेना ने आगे कहा कि यह कृति स्त्री संवेदनाओं का दस्तावेज भी है और खुला चिट्ठा भी।

प्रख्यात आलोचक सुशील सिद्धार्थ ने कहा कि यह एक लम्बी कविता है। स्वभाव से कवि डी.एम.मिश्र ने लीक से हटकर इस जरुरी कृति की रचना की। लोगो के सामने धीरे-धीरे इस कृति का सच अभी और भयावह रुप में आयेगा। समकालीन सरोकार के प्रधान सम्पादक सुभाष राय ने कहा कि कवि होने के साथ अच्छा आदमी होना जरुरी है। इसीलिए डा0 मिश्र अच्छे कवि है। उनकी कई कृतियों को मैने पढ़ा है। मै उनकी ज्यादातर रचनाओ से संतुष्ट हूँ । निष्कर्ष पत्रिका के सम्पादक डा0 गिरीश चन्द्र श्रीवास्तव ने श्री मिश्र की कविता यात्रा का लम्बा व्रतान्त सुनाया और कहा कि सन्तोष की बात यह है कि उनकी कविताओं में लगातार धार आ रही है। समकालीन सरोकार पत्रिका के सम्पादक हरे प्रकाश उपाध्याय ने आधार वक्तव्य दिया तो सहमति/असहमति के बीच कृति पर जोरदार चर्चा चली जिसे प्रख्यात कथाकार रजनी गुप्त ने यह कहते हुए आगे बढ़ाया कि पुरुषो के दोहरे मापदण्ड की दृष्टियां नारी के लिए कितनी घातक हैं। इस कृति में इसे कई स्थलो पर देखा जा सकता है। 

वरिष्ठ लेखिका सुशीला पुरी ने कविता की बनावट, उसकी भाषा एवं शिल्प की तारीफ की। इस महत्वपूर्ण संगोष्ठी में डा0 अनीता श्रीवास्तव सम्पादक रेवान्त पत्रिका, वीरेन्द्र सारंग, लमही पत्रिका के सम्पादक विजय राय, ऊषा राय, रवीन्द्र प्रभात, डा0 शैलेन्द्र श्रीवास्तव, विमांशु दिव्याल, दयानन्द पाण्डेय, विजय राय एवं संतोष कुमार पाण्डेय, सुधीर कुमार सिंह, डा0 सुरेश, अरुण सिंह, सम्पादक इण्डिया इनसाइड, मन्जू शुक्ला, विनीत कुमार आदि बड़े-बड़े साहित्यकार मौजूद थे। गोष्ठी का संचालन ज्योत्सना पाण्डेय ने किया। आभार कवि डा0 डी0एम0 मिश्र ने व्यक्त किया।

4 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि-
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (25-11-2012) के चर्चा मंच-1060 (क्या ब्लॉगिंग को सीरियसली लेना चाहिए) पर भी होगी!
    सूचनार्थ...!

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  2. इतना पुराना पब्लिेकेशन मगर जानकारी मुझे आज हुई गूगल पर एकऔर सर्च के दौरान । आभार अपनी माटी मैगजीन

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  3. आगे भी मैं आपके इस स्‍नेह का हकदार बना रहना चाहता हूॅ

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  4. आदरनीय कवि डीएम मिश्र जी
    किसी परिचय के मोहताज़ नहीं है. आप गजल के सशक्त हस्ताक्षर है. आप की हरेक गजल उम्दा होती है. जिसे पढ़ने के बाद हरेक पाठक "वाह" कर उठता है.
    बधाई आप को.
    आप का साथी

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