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डा. विमला भंडारी होने का अर्थ

Written By Manik Chittorgarh on सोमवार, नवंबर 26, 2012 | सोमवार, नवंबर 26, 2012


राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, बीकानेर
ने वर्ष 2012-13 के लिए विभिन्न पुरस्कारों के अनुसार इस वर्ष का 
राजस्थानी बाल साहित्यकार पुरस्कार 
विमला भण्डारी को इसी पुस्तक पर मिला है।


विमला भंडारी


कहानीकार, 
इतिहासकार,
बाल साहित्यकार
भंडारी सदन, पैलेस रोड, 
सलूम्बर-313027
    • 9414759359Mobile
    • 2906230695Mobile
डा. विमला भंडारी हिन्दी एवं राजस्थानी की स्थापित लेखिका है। उन्होंने बालसाहित्य और किशोर साहित्य के अलावा इतिहास लेखन में भी अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है। उनकी पुस्तक ‘सलूम्बर का इतिहास’ को इतिहास की प्रमाणित पुस्तक की मान्यता मिली है। कृति ‘अणमोल भेंट’ किशोर कथाओं (बालकथा भी कह सकते हैं) का संग्रह है। इसमें ग्यारह कहानियां है। इनमें किसी कहानी का शीर्षक अणमोल भेंट नहीं है। सभी कहानियां ही अणमोल हैं।

‘आ धरती मीठा मोरा री’ कहानी में संस्कृतियों में टकराव है। भारतीय संस्कृति की गहरी जड़ों ने धनसंपन्न अमेरिकी संस्कृति को झुकने को मजबूर कर दिया है। इस कहानी की एक और विशेषता भी है कि यह पंजाबी भाषी परिवार पर आधारित है। यह उस राष्ट्रीय एकता का स्वर भी है कि एक प्रांत में दूसरे प्रांत से लोगों को पराया या बाहरी न समझा जाए। कुछ कहानियां यथा ‘उदैपुर री सैर’ और ‘समझग्यो स्टीफ न’ कहानी के साथ ही यात्रा संस्मरण का आनन्द भी देती है और बुजुर्गों का सम्मान क रना भी सिखाती हैै। ‘जस जसो नाम’ आविष्कार की कहानी सुनाती है। हां,  इस कहानी में ‘अध्यापिका जी’ सम्बोधन हिन्दी में होते हुए भी न हिन्दी का लगा न राजस्थानी का। 

‘मुसीबत सूँ मुकाबलों’ साहस और धैर्य रखने की शिक्षा देती है तो ‘वाह रे दीनू’ पर्यावरण रक्षा का संदेश दे रही है। ‘रामी आखां’ में शराब का तांडव है। जो लोग चाहते है कि उनके बच्चे शराब के अभिशाप से दूर रहें उन्हें पहले खुद को उससे दूर रहने का तप करना होगा। इन कहानियों की भाषा और विषय वस्तु किशोरों की अपेक्षा बालपाठकों के नजदीक है। 


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