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भीलवाड़ा में हुआ चित्रकारों का संगम

Written By Manik Chittorgarh on रविवार, नवंबर 25, 2012 | रविवार, नवंबर 25, 2012

 भीलवाड़ा  

भीलवाड़ा के सूचना केन्द्र में आयोजित प्रथम राज्य कला प्रदर्शनी में राज्य भर से 97 कलाकारों की लगभग 170 कलाकृतियाँ प्रदर्शित की गई, जिनमें से 15 कलाकारों को पुरस्कृत किया गया। आकृति कला संस्थान एवं एल.एन.जे. ग्रुप के संयुक्त तत्वावधान में सूचना केन्द्र में पीडब्ल्यूडी मिनिस्टर भरतसिंह ने राज्य प्रदर्शनी का उद्घाटन और आयोजक कैलाश पालिया, अध्यक्ष श्यामसुन्दर राजानी सहित, संस्था प्रतिनिधि, कलाकार एवं गणमान्य लोग के साथ अवलोकन किया। 

कोटड़ी कस्बा निवासी अफसाना मंसूरी, आसींद कस्बा निवासी राजेंद्रकुमार शर्मा, कपासन की दीपशिखा वैष्णव, भीलवाड़ा निवासी रामेश्वरलाल जीनगर, सत्यनारायण सोनी, प्रधानाध्यापक गोपाल वेष्णव व श्रीसोजीराम नौलखा, उदयपुर के निर्मल यादव, राकेश शर्मा ‘राजदीप’ व संदीप कुमार मेघवाल,बेगूं (चितौड़गढ़) के किशन शर्मा व घनश्यामसिंह सोंलकी, अजमेर के कपिल खन्ना, जयपुर के स्टूडेंट गजेंद्र कुमावत, को 10 ज्यूरी और 5 स्मृति पुरस्कारों से नवाजा गया।

बून्दी से भी दो कलाकारों की कृतियों को पुरस्कृत किया गया। बून्दी महाविद्यालय में व्याख्याता व चित्रकार जयपुर निवासी डॉ. मणि भारतीय के दो कोलाज तथा बून्दी सीनीयर स्कूल के कला व्याख्याता पंकज सिसोदिया के दो लेण्डस्केप पर पांच-पांच हजार के नकद पुरस्कार, प्रमाण पत्र व मोमेण्टो देकर सम्मानित किया गया। 23 से 25 नवम्बर 2012 तक आयोजित राज्यस्तरीय प्रदर्शनी में डॉ. ललित भारतीय, ऐनिमेटर अभिलाषा भारतीय के साथ-साथ बून्दी महाविद्यालय के छात्र देवराज बैरवा, व आयशा हुसैन तथा जयपुर से रमेश भारतीय की कृतियाँ भी चयनित कर प्रदर्शित की गई है। 

प्रदर्शनी के उद्घाटन के बाद महाराणा प्रताप सभागार में आयोजित राष्ट्रीय कलावार्ता में प्रसिद्ध कला समीक्षक एवं निर्माता निर्देशक विनोद भारद्वाज, अजमेर सम्भागीय आयुक्त किरण सोनी गुप्ता, राष्ट्रीय कलाकार श्याम सुन्दर कालरा व एस.एन.बेलेकर ने ‘‘आर्ट एज ए फुल टाईम केरियर’’ पर अपने विचार व्यक्त किये। विनोद भारद्वाज, ने कहा कि कला को लेकर धारणा बदली है। अभिभावक स्वयं चाहने लगे हैं कि बच्चा कला विधाओं से जुडे़। वार्ताकारों का विचार था कि ग्लोबलाइजेशन आर्ट विधाओं के लिए वरदान है। आर्ट को कॅरियर के रूप में अपनाकर काफी नाम और धन कमाया जा सकता है। कलाकार परंपरा को जीवित रखते हुए आर्ट को आधुनिकता में समेटें। 

राष्ट्रीय कला वार्ता के विशिष्ट अतिथि रिजु झुनझुनवाला प्रबन्ध निदेशक एल.एन.जे ग्रुप थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता राजस्थान ललित कला के अध्यक्ष प्रोफेसर भवानी शंकर शर्मा ने कहा कि आर्ट कम्यूनिकेशन का सशक्त माध्यम है। ट्रेडिशनल टेक्नीक की जानकारी कलाकार को होनी चाहिए। क्रफ्ट में कलाकार नयापन दे। पेंटिंग इनवेस्टमेंट है। कलाकार इसमें अच्छा कॅरिअर बना सकता है। कार्यक्रम में चित्रकला, मूर्ति कला आदि विधाओं के कलाकार मौजूद थे।



डॉ. ललित भारतीय

वर्तमान में बूंदी,राजस्थान राजकीय कोलेज 
में चित्रकला के असोसिएट प्रोफ़ेसर 
और 
स्पिक मैके के वरिष्ठ कार्यकर्ता,
गीतकार 
के रूप में भी जाने जाते हैं.

lalitbhartiya@gmail.com
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