साहित्यिक त्रैमासिक 'संवदिया ' का युवा कविता विशेषांक - अपनी माटी ई-पत्रिका

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका('ISSN 2322-0724 Apni Maati')

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साहित्यिक त्रैमासिक 'संवदिया ' का युवा कविता विशेषांक


‎'संवदिया' का बहुप्रतीक्षित

 'युवा हिंदी कविता अंक'

 अतिथि संपादक 

( ‘गीतांजलि के हिन्दी अनुवाद’ 
शीर्षक से एक आलोचना पुस्तक के लेखक हैं ,साथ ही हिन्दी के युवा कवि, संपादक एवं आलोचक हैं)

साहित्‍य अकादेमी,नई दिल्‍ली
मो -9868456153
ई-मेल:-devendradevesh@yahoo.co.in

इसमें 91 युवा कवियों की कविताऍं शामिल हैं। 

साथ ही वर्तमान समय में हिंदी कविता की चुनौतियों पर  जितेन्द्र श्रीवास्तव 

का आलेख तथा कुछ वरिष्‍ठ कवियों की टिप्‍पणियॉं शामिल हैं।


मूल्य :-40/-

पता:-

संपादक 'संवदिया'

संवदिया प्रकाशन, 

जयप्रकाश नगर, वार्ड नं. 7

अररिया 854311 (बिहार), मो. 0993223187

4 टिप्‍पणियां:

  1. ''जब सौ मासूम मरते होंगे, तब एक कवि पैदा होता होगा।'' उक्‍त अंक में वरिष्‍ठ हिंदी कवि चंद्रकांत देवताले ने हिंदी कविता की चुनौतियों पर टिप्‍पणी करते हुए यह बात लिखी है। विमर्श में शामिल अन्‍य कवि हैं : विश्‍वनाथ प्रसाद तिवारी, अशोक वाजपेयी, लीलाधर जगूड़ी, नंदकिशोर आचार्य, राजेश जोशी, उदय प्रकाश, अरुण कमल, मदन कश्‍यप, अनामिका, निरंजन श्रोत्रिय, अरविंद श्रीवास्‍तव और नीलेश रघुवंशी।

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  2. अग्रिम शुभकामनाएं ..बंधुवर देवेश जी को, अंक की प्रतीक्षा रहेगी।

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  3. ये अंक कब तक मिलेगा, और मैं बंगलौर में इसे किस प्रकार खरीद सकता हूँ..

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  4. युवाओं के चिंतन के प्रति सजग है संवदिया।

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