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दिल्ली रेप केस-इस बहाने कुछ दूजे सन्दर्भ

Written By Manik Chittorgarh on सोमवार, दिसंबर 24, 2012 | सोमवार, दिसंबर 24, 2012


’’महिला हिंसा विरोध सम्मेलन’’ 
 सहारनपुर, उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश के जनपद सहारनपुर स्थित जनमंच-रोटेरी हाल में दिनांक 28 अक्टूबर को विकल्प सामाजिक संगठन, दिशा सामाजिक संगठन व ज्ञान गंगा शिक्षा समिति द्वारा ‘‘महिला हिंसा विरोध सम्मेलन’’ का आयोजन किया गया। जिले में हो रही सिलेसिलेवार महिला व बालिका हिंसा की तमाम घटनाओं के उपर शहर, प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर की महिला संगठनों, जनसंगठनों, सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवी व अन्य प्रगतिशील ताकतों द्वारा सरकार व प्रशासन को चेताने के लिये इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया जो कि काफी प्रभावशाली रहा व इस कार्यक्रम से महिला हिंसा से लड़ने के लिए सामूहिक प्रयास की रणनीति बनाई गई। इस कार्यक्रम में पीड़ित बालिकाओं की मांओं ने पूरे सभागार को झंझोड़ कर रख दिया व सरकार व प्रशासन को उनके साथ हुए अन्याय के खिलाफ कड़ी चुनौती दी। इस कार्यक्रम को लेकर प्रिंट व इलैक्ट्रीक मीडिया दोनों ने कुछ कवरेज किया जिसका हम धन्यवाद करते हैं।

इसलिए हमने यह जरूरी समझा कि इतने संवेदनशील मुददों पर जो बहस हुई व रणनीति बनी वह सभी बातें समाज के सामने विस्तार से आनी चाहिए। जिस तरह से हमनें इस कार्यक्रम से पहले एक पर्चा निकाला जिसमें हमनें सहारनपुर में हो रही बालिका व महिला हिंसा के आंकड़े दिए उससे ज़िले की सभी संवेदनशील ताकतों द्वारा पढ़ कर उनका विश्वास बढ़ा चूंकि यह सब विशलेषण और रिपोर्ट अखबारों में भी पाठकों को नही पढ़ने में मिलती है। जबकि अखबारों में अन्याय, अत्याचार और हिंसा की खबरों को जिस तरह से परोस कर दिया जाता है उससे आम मानस में डर, निराशा, घबराहट, अविश्वास पैदा हो रहा है। सभी खासतौर पर महिलाए अपने आप को असहाय व असुरक्षित महसूस कर रहे हैं जिससे दबंगों व माफियाओं का हौसला बढ़ता जा रहा है और यह असामाजिक तत्व व दबंग अपना फन उठाये पूरे ज़िले में नंगे हो कर घूम रहे हैं। यह कोई बड़ी बात न होगी अगर यह घटनाए जातिगत और साम्प्रदायिक तनाव में तबदील हो जाए। वैसे भी सहारनपुर काफी संवेदनशील इलाकों में जाना जाता है, और इस तरह की घटनाओं की रोकथाम न किए जाने से यह शंका उभरती है कि यह जातिगत व साम्प्रदायिक तनाव को पनपाने की ही कोशिश है। 

यह अपराधी तत्व सहारनपुर जैसे शहर को बदनाम करने में कोई कोर-ओ-कसर नहीं छोड़ रहे हैं। इसलिए इस कार्यक्रम की पूरी रिपोर्ट हम इस पर्चे के माघ्यम से लोगों तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि आम जनता भी अपनी जिम्मेदारीयों को समझे व महिला हिंसा को रोकने में महत्वपूर्ण सहयोग करे।

सहारनपुर में पिछले छह महीने में लगातार बालिकाओं व महिलाओं के साथ दिल दहला देने वाली ऐसी दर्जनों घटनाए हुई जिसे जब जोड़ कर देखा गया तो पाया गया कि यह महिला शिक्षा, उनके अधिकारों व उनकी आज़ादी के प्रति एक सुनियोजित हमला   है । यह हमले खास तौर पर ग़रीब वर्गो की महिलाओं और बच्चीयों के साथ हो रहे हैं जो कि अपने आप में काफी चिंता का विषय है। इस हिंसा के खिलाफ ठोस रणनीति बनाने के लिए यह सम्मेलन जो कि बाद में जनसुनवाई के रूप में परिवर्तित हो गया का आयोजन किया गया। सबसे अच्छी बात यह रही कि इस सम्मेलन में ज़िले से लेकर राज्य व राष्ट्रीय स्तर के जनसंगठनों, महिला संगठनों, संस्थाए, बुद्धिजीवी वर्ग, प्रगतिशील ताकतें, प्रमुख राजनैतिक, अध्यापक व अधिवक्ता हस्तियां एक ही मंच पर इस हिंसा के विरोध में खड़े नज़र आए। 

इस सम्मेलन में 1000 से भी उपर महिलाओं और पुरूषों ने भाग लिया जो कि विभिन्न संगठनों से थे जिसमें प्रमुख तौर पर विकल्प सामाजिक संगठन, दिशा सामाजिक संगठन, ज्ञान गंगा शिक्षा संमिति, घाड़ क्षेत्र महिला मोर्चा, ग्रामीण मज़दूर यूनियन, परचम, आल इंड़िया वूमन कांनफ्रेस, जनवादी महिला समिति, सी0पी0आई0एम, नारी संसद, वनग्राम भूअधिकार मंच, सेवार्थ फाअउडेंशन, सहेली, दलित महिला आन्दोलन, एक्शन इंड़िया, वूमन अगेंस्ट सैक्सूयल वायलेंस (दिल्ली), संगठनों के साथ साथ जिले के जाने माने अधिवक्ता जैसे शागुफता खान, विभिन्न राजनैतिक पार्टीयों के सदस्य जैसे शकुन्तला देवी, पूर्व मंत्री संजय गर्ग, व प्रोफेसर प्रो0 सुरेन्द्र निश्चल आदि ने शिरक्त की। अन्य जिलों जैसे खीरी, सोनभद्र, पीलीभीत, बहराईच, चित्रकूट एवं उत्तराखंड़ से देहरादून, हरिद्वार, उधमसिंह नगर से भी सैंकड़ों महिलाओं ने इसमें भाग लिया। इसके अलावा जहां जहां पर बालिकाओं पर हमले हुए जैसे जमालपुर, चकसराय, हकीमपुरा, सरसावा, डांकोवाली, चन्देना, घाड़ क्षेत्र, युवा लड़कीयों व लड़कों आदि से सैकड़ों की संख्या में इस सम्मेलन में भाग लिया। 

कार्यक्रम की शुरूआत महिला मुददों एवं हिंसा पर काम करने वाली जुझारू महिला साथी भारती राय को श्रद्धांजलि दे कर हुई जिन्होंने सहारनपुर ज़िले के अति पिछड़े इलाके घाड़ क्षेत्र में महिलाओं के जंगल, भूमि स्वास्थ व महिला हिंसा के मुददों पर काफी काम किया व बाद में उत्तर प्रदेश के स्तर पर भी दलित,आदिवासी व श्रमजीवी महिलाओं के सम्पति के अधिकारों व सामुहिक संसाधनों पर महिलाओं के मालिकाना हक को लेकर मुहिम छेड़ी। पिछले वर्ष भारती की लम्बी बिमारी के बाद देहांत हो गया था, भारती राय को श्रद्धांजलि सोनभद्र से आई वरिष्ठ महिला साथी शांता भटटाचार्य द्वारा दी गई,  जिन्होंने भारती राय का जीवन परियच दिया और नारी शक्ति जिन्दाबाद के ज़ोरदार नारे लगा कर उनको याद किया।

पाकिस्तान की बहादुर छात्रा मलाला युसूफजई द्वारा तालिबान जैसी क्रूर शासन को चुनौती दे कर पूरे विश्व में महिला शिक्षा की प्रतीक, को बेहद ही गर्व से पूरे सम्मेलन में सम्मान दिया गया व उनकी सलामती की दुआए सभी द्वारा खड़े हो कर की गई। मलाला इस समय ब्रिटेन के एक हस्पताल में मौत से जुझ रही है। उनकी सलामती की दुआ दिशा संगठन की रश्मि सिंह द्वारा पढ़ी गई। इसी तरह सहारनपुर की भी एक बहादुर 9 वर्षीय बच्ची लक्ष्मी जिसने अपने बादी समाज की परम्पराओं से हट कर पढ़ने का संकल्प तो लिया लेकिन स्कूल में प्रधानाचार्य व अध्यापकों के भेदभाव व उत्पीड़न के चलते वह 2010 में आत्महत्या करने पर मजबूर हुई, सम्मेलन में उसकी इस दर्दनाक मौत पर दुख व्यक्त किया और शिक्षा के लिए अनवरत संघर्ष करने के लिए आवहान किया गया। लक्ष्मी का जीवन परिचय व उसके संघर्ष से उसकी हत्या का सफर सक्रीय सामाजिक कार्यकर्ता कौशल रानी द्वारा दिया गया।

इन तीनों प्रतीकों को याद करते हुए पूरे सम्मेलन में जैसे एक उमंग सी भर आई व नारों की गूंज से पूरा वातावरण आत्मविभोर सा हो गया, जिसका असर पूरे सम्मेलन में अंत तक छाया रहा। कार्यक्रम की विषय प्रस्तुति संघर्षशील सामाजिक कार्यकर्ता रोमा द्वारा की गई व संचालन कौशल रानी एवं रश्मि सिंह द्वारा किया गया। इस सम्मेलन के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल की मौजूदगी थी।

इस सम्मेलन में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय पुलिस प्रशासन की मानसिकता पर रही जो कि एक सहारनपुर के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के बयान से जुड़ा था जो उन्होंने अपने कार्यालय में आयोजकों को दिए थे। देवबंद  की 14 वर्षीय मुस्लिम समुदाय की छात्रा को स्कूल जाते वक्त कुछ लड़को द्वारा जबरदस्ती बायस होस्टल लेजाकर उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया और बाद में अश्लील एमएमएस बनाये गये। इस पर पुलिस अधिकारी का बयान था कि यह लड़की खुद ही हास्टल गई थी व चरित्र की सही नहीं थी। प्रशासन की इस मानसिकता व दोनों पक्षों के बीच इन जघन्य अपराधों में समझौता कराने की मानसिकता को लेकर आयोजकों ने अधिकारीयों को इन अपराधों का बढावा देने का दोषी ठहराया व उनकी निंदा की। पुलिस, अपराध की वजह और रोकथाम से ज्यादह इन मामलों में समझौता करा कर मामले को रफा दफा करने की ही कवायद करती है व मोटी रकम कमा कर इन अपराधों को और भी बढ़ावा देती है, चूंकि यह सब मामले वंचित समुदाय व विशेष ग़रीब व जाति से जुड़े होते हैं। कार्यक्रम के परिचय में इन सब बातों को मजबूती से उल्लेख किया गया व बाद में सभी वक्ताओं ने इस मानसिकता का विरोध किया गया।

कार्यक्रम के परिचय के बाद पीड़ित बालिकाओं के माताओं द्वारा उनके साथ हुए दुर्व्यवहार की दर्दविदारक व झंझोड़ कर रख देने वाली प्रस्तुति की गई। यह शायद किसी को उम्मीद नहीं थी कि बलात्कार व हत्या की शिकार मीनू, शागुफता, सपना, तानया, चन्देना की महिलाए की माताए इस तरह के मंच पर हिम्मत से बोल पाएगी।  इससे पहले इन्हें सभी ने सलाह दी कि इन मामलों पर या तो समझौता कर लें या फिर चुप्पी साध लें। लेकिन सम्मेलन में जिस तरह से शुरू से माहौल बना उसने इन माताओं को बोलने की हिम्मत मिली व उन्होंने जो बोला उससे सभी के दिलों से आह निकल आई। उनकी बात सुन कर लगा कि शायद उन्हें अपनी व्यथा कहने के लिए कहीं भी मौका नहीं दिया गया और न ही उन्हें सुना गया। उन्होंने अपने मन के गुब्बार को निकाल कर पूरे सम्मेलन में एक आग सी पैदा कर दी। गौर तलब है कि यह माताए जरूर रो-रो कर न्याय की गुहार कर रही थी लेकिन किसी से भीख नही मांग रही थी बल्कि उनकी जुबान पर आत्मविश्वास से इस अन्याय से लड़ने व अपनी बच्ची को न्याय दिलाने की चुनौती भी थी। तानया की मां ने कहां कि जब तक उनकी फूल सी बच्ची को न्याय नहीं मिलेगा तब तक चैन से नहीं बैठेगी और इसी तरह से मीनू की मां ने भी कातिलों को चुनौती दी जिन्होंने उसकी बेटी को गांव के पास ही खेत में बलात्कार कर हत्या कर दी थी। सम्मेलन कक्ष में शायद कोई ही ऐसा व्यक्ति होगा जो इन माताओं की चीख की पुकार सुन कर न रोया होगा, यहां तक कि वहां तैनात पुलिस बल की आंखों में भी आंसू थे। इन वक्तयों को सुन कर सभी को लगा कि यह मामला अति गंभीर है और अगर समय रहते इस पर कोई ठोस कार्यवाही न हुई तो स्थिति विस्फोटक हो सकती है।

पीड़ित पक्ष द्वारा अपने बयानों के रखने के बाद इस स्थिति से निपटने के लिए किस प्रकार की रणनीति को अपनाया जाए इस पर सभी संगठनों एवं बुद्धिजीवी वर्ग ने अपने वक्तव्य दिये। इन सभी मामलों में दस्तावेज़ीकरण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले मास्टर विरेन्द्र कुमार ने दस्तावेज़ीकरण किए हुए कुछ और भी इसी तरह के गंभीर मामले रखे और प्रस्तुत हुए मामलों के बारे में दस्तावेज़ीकरण करने के दौरान हुए अपने अनुभवों को बयान किया। उनके बाद जाहन्वी तिवारी, रजनी तिलक, शांता भटटाचार्य, डा0 कुदस्या अंजुम, सरोज वर्मा, राधा मिश्र, गंगा आर्य, फातिमा बी, सोकालो देवी, नबादा देवी, संजय गर्ग, डा0 सुरेन्द्र निश्चल, शकुन्तला देवी, शागुफता खान, मंजू पचौरीया, मास्टर विरेन्द्र, शबनम, सुरेखा, तारा , कल्पना, के0एन तिवारी, अशोक चौधरी ने बेहद ही पुरज़ोर तरीके से अपने वक्तवयों से अपने गुस्से का इजहार किया और सरकार व प्रशासन को चंेतावनी दी कि अगर इस तरह की घटनाओं पर रोक नहीं लगी तो एक महीने के अंदर महिलाएं जुझारू आन्दोलन शुरू करेगी।

इन मामलों पर तैयार मुख्यमंत्री को सम्बोधित 11 सूत्रीय मांगपत्र लेने के लिए प्रशासन को सूचना भेजी गई लेकिन प्रशासन द्वारा रविवार की छुटटी का बहाना बनाया जाने लगा। इस पर आयोजकों ने प्रशासन को चेतावनी दी अगर उनका कोई अफसर मांगपत्र को लेने नहीं आता है तो सभी महिलाए जिलाधिकारी के घर की और कूच करेगीं। इस पर प्रशासन फौरन सक्रीय हुई व सदर तहसीलदार को ज्ञापन लेने के लिए भेजा गया। तहसीलदार को कम से कम डेढ़ घंटा सम्मेलन की कार्यवाही को सुनाया गया व आखिर में उनका वक्तवय लिया गया। उन्होंने इस बात को स्वीकार किया कि उनके नौकरी के समयकाल में उन्होंने आज तक महिलाओं में इतना गुस्सा नहीं देखा व वे भी इस तरह की घटनाओं से काफी चिंतित हैं व इस ज्ञापन को वे मुख्यमंत्री तक वाया जिलाधिकारी के पहुंचाने का काम करेगें।

मुख्य रूप से यह मांग की गई कि महिला हिंसा की किसी भी प्रकार की घटना अब सहारनपुर में नहीं घटनी चाहिए इसके लिए सरकार व प्रशासन जागरूकता कार्यक्रम चलाए। सभी हिंसा के मामले जिनकी सूची सौंपी गई है उस पर निष्पक्ष जांच कर दोषीयों पर कड़ी से कड़ी कार्यवाही की जाए। व बालिकाए जो कि इस हिंसा की शिकार होने की वजह से स्कूल नहीं जा पा रही है उन्हें सरकार आर्थिक मदद देकर मुफत में शिक्षा उपलब्ध कराए। अंत में इस सम्मेलन को समाप्त करते हुए तमाम संगठनों ने यह प्रस्ताव लिए कि 

महिला हिंसा का कोई भी मामला चाहे वो समाज में हो या घर में उस पर हम लोग संगठित और सशक्त विरोध करेंगे। इसलिये समाज से ही इस हिंसा को समाप्त करने के लिये शिक्षा का प्रसार, महिलाओं के सम्मान, आजा़दी एवं अधिकारों की जागरूकता एवं महिला सशक्तीकरण के तमाम कार्यक्रमों को हम सभी के द्वारा मिल कर किया जायेगा।

समाज में अन्याय को खत्म करने के लिये नारी और विशेष रूप से बालिकाओं को सशक्त करना व मजबूत करने के प्रस्ताव ।

महिला हिंसा सामाजिक, साम्प्रदायिक, जातिगत, राजसत्ता व घरेलू हिंसा पर सामाजिक तौर पर भी हम सभी मिल कर ‘‘महिला परामर्श केन्द्र‘‘ की स्थापना का प्रस्ताव लेते है। अगर एक महीने के अंदर सरकार द्वारा इन महिला हिंसा के मामलों में कोई ठोस कार्यवाही नहीं करती है तो हम सहारनपुर से लेकर पूरे प्रदेश में महिला विरोधी मानसिकता व हिंसा के खिलाफ धरना प्रर्दशन करेगें। कार्यक्रम के अंत में मलाला के सम्मान और लक्ष्मी व अन्य मृत लड़कीयों की याद में कार्यक्रम के आखिर में मोमबत्ती जला कर उन्हें सम्मान दिया गया व उनके सहास को सलामी दी गई।

सम्पर्क: 
  • रोमा ( 9415233583), 
  • कौशल रानी ( 9412480386), 
  • जान्हवी तिवारी (9719201406), 
  • सुरेशो (9758840448), 
  • अशोक चौधरी (9412231276),       
  • के0एन तिवारी (9412232835)

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