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अत्यधिक शोर से बहरापन, नंपूसकता तथा गर्भपात

Written By Manik Chittorgarh on बुधवार, दिसंबर 05, 2012 | बुधवार, दिसंबर 05, 2012

उदयपुर 

4 दिसम्बर 2012 अत्यधिक प्रकाश और तेज ध्वनि का मानव तथा वन्य जीवों पर घातक प्रभाव पडता है। विभिन्न आयोजनों एवं उत्सवों में बढतों प्रकाश की चकाचौंध और म्यूज़िक प्रकृति के दोनों जीवों के लिये घातक है। उक्त विचार वन्यजीव एवं पक्षी विशेषज्ञ डॉ. सतीश शर्मा ने डॉ. मोहनसिंह मेहता मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा आयोजित वृहत संवाद में व्यक्त किये। डॉ. शर्मा ने आगे कहा कि टॉवर, मोबाईल तथा पटाखों की तरंगों से मानव के साथ ही पक्षियों के अण्डों के लियें सर्वाधिक नुकसान देय है। पटाखों से निकलने वाली गैस मनुष्यों तथा वन्य जीवों के श्वसन तंत्र पर घातक प्रभाव डालती है। 

वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो. एस.बी.लाल ने बताया कि अमेरिका के शिकागों शहर के निकट स्थित हवाई अड्डा के आस-पास की गयी सर्वे जिसे ’’इफेक्ट ऑफ नोईस पोल्युशन आन पिपल्स हेल्थ’’ जो शिकागों सिंड्रोम नाम से प्रसिद्व है, में बतलाया गया है कि अत्यधिक शोर/ध्वनी से बहरापन, नंपूसकता तथा गर्भपात  भी हो सकता है। प्रो. लाल ने कहा कि यह चिन्तनीय है कि विद्यालयों में पर्यावरणीय समस्याओं को तो पढाया जाता है किन्तु समाधान पर कोई चर्चा नहीं होती। मेलडीमाता मन्दिर के महन्त स्वामी विरमदेन ने कहा कि धर्म की आड में हा रही है पर्यावरणीय क्षति को रोकनें की जरूरत है। उन्होनें झीलों में मुर्ति/पुजा सामग्री के विसर्जन को तुरन्त रोकनें की आवश्यकता पर जोर दिया। 

झील हितेषी मंच के हाजी सरदार मोहम्मद एवं प्रकाश तिवारी ने झीलों में कचरा डालनें पालों पर कठोर दण्डात्मक कार्यवाही की आवश्यकता पर जोर दिया। चान्दपोल नागरिक समिति के तेजशंकर पालीवाल तथा ज्वाला जन विकास संस्थान के भंवरसिंह राजावत तथा बसन्तिलाल कुकडाने झीलों में तेज रफ्तार की नोकाओं को प्रवासी पक्षियों के आश्रय में खलल बतलाया। पूर्व मत्स्य विभाग के निदेशक ईस्माईल अली दुर्गा ने बताया कि उदयपुर की झीलों में काफी समय से मत्स्य प्रजजन विभिन्न कारणों से नहीं हो रहा है जो चिन्ताजनक है। 

बजंरग सेना के कमलेन्द्र सिंह पंवार, ने शहर में बढते वाहनों एवं तीन पहिया वाहनों में केरोसीन के उपयोग से वायु प्रदुषण पर चिन्ता व्यक्त की। संवाद का संयोजन करते हुए ट्रस्ट सचिव नन्दकिशोर शर्मा ने कहा कि पर्यावरण की दुरस्ती के लिये वैज्ञानिक समाधानों का प्रसार प्रचार तथा आम नागरिकों, युवाओं व बालकों में इसके घातक प्रभावों की जानकारी बढाना जरूरी है। संवाद में नूर मोहम्मद, सुशील कुमार, निरेन्द्र देलवाडिया, नितेश सिंह कच्छावा, धनराज वागेला, ओ.पी.माथुर, सोहनलाल तम्बोली आदि ने भी विचार व्यक्त किये। संवाद के अन्त में पर्यावरण सचिव स्व. वी.एस. सिंह तथा पूर्व प्रधानमंत्री इन्द्र कुमार गुजराल के निधन पर श्रद्धांजली अर्पित की गई। 

नितेश सिंह कच्छावा
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