‘हिंदी लेखन के क्षेत्र में अब स्‍त्रियों की आवाज़ अनसुनी नही: अष्‍टभुजा शुक्‍ल - अपनी माटी

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सोमवार, दिसंबर 10, 2012

‘हिंदी लेखन के क्षेत्र में अब स्‍त्रियों की आवाज़ अनसुनी नही: अष्‍टभुजा शुक्‍ल

रचना शर्मा के कविता संग्रह अन्‍तर-पथ का लोकार्पण

वाराणसी, 6 दिसंबर।

हिंदी लेखन के क्षेत्र में अब स्‍त्रियों की आवाज़ अनसुनी नही है। वे जीवन के विभिन्‍न क्षेत्रों की तरह विभिन्‍न विधाओं में अपनी सशक्‍त अभिव्‍यक्‍ति से लेखन के क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं। रचना शर्मा ऐसी ही कवयित्रियों में हैं जिन्‍होंने स्‍त्री की दुनिया को बारीकी से अपनी कविताओं में चित्रित किया है तथा हिंदी कविता के क्षेत्र में मजबूती से पदार्पण किया है। ये बातें आज हिंदी के जाने माने कवि अष्‍टभुजा शुक्‍ल ने पराड़कर स्‍मृति भवन में कवयित्री रचना शर्मा के पहले कविता संग्रह अन्‍तर पथ  का लोकार्पण करते हुए कहीं। उन्‍होंने कहा कि रचना शर्मा की कविताऍं बताती हैं कि स्‍त्रियॉं जमाने की चाल से अपनी चाल मिलाते हुए दुनिया को लगातार मानवीय बनाने के कार्य में संलग्‍न है। उन्‍होंने रचना शर्मा की कविताओं में व्‍यक्‍त पीड़ा, आह्लाद और जीवन के छोटे-छोटे सुखों से बनने वाले बड़े संसार की चर्चा की तथा कई कविताओं का प्रभावी विश्‍लेषण किया। उन्‍होंने कहा कि संस्‍कृत साहित्‍य के संस्‍कार भी रचनाशर्मा की रचनाओं में परिलक्षित होते हैं, यह संस्‍कृत की ज़मीन से जुडे होने के नाते स्‍वाभाविक ही है।रचना शर्मा ने इस अवसर पर अपनी लोकार्पित काव्‍यकृति से कई रचनाओं का भावपूर्ण पाठ किया।

अध्‍यक्षता करते हुए काशी हिंदू विश्‍वविद्यालय के पूर्व संस्‍कृत विभागाध्‍यक्ष प्रो.विश्‍वनाथ भट्टाचार्य ने कहा कि रचना शुरू से ही रचनात्‍मक प्रतिभा का परिचय देती रही हैं। उन्‍होंने प्रसन्‍नता जाहिर की कि संस्‍कृत की प्रतिभाएं जब हिंदी में तैयारी के साथ उतरती हैं तो एक नए रचनात्‍मक लोक का उदय होता है। उन्‍होंने रचना शर्मा की कविताओं का संदर्भ देते हुए कहा कि रचना ने भारतीय स्‍त्री के उदात्‍त मन को वाणी दी है। विशिष्‍ट अतिथि एवं सोच विचार पत्रिका के संपादक जितेन्‍द्रनाथ मिश्र ने रचना को उदीयमान कवयित्री की संज्ञा दी तथा कहा कि हिंदी कविता को रचना शर्मा से बहुत आशाएं हैं।

आज की हिंदी कविता और रचना शर्मा की कविताओं की आंतरिक अनुभूति पर अपने विषय प्रवर्तन में कवि-आलोचक डॉ.ओम निश्‍चल ने कहा कि कविता में यों तो लिंग भेद नहीं है फिर भी स्‍त्रियों का रचना संसार आज बेहद कल्‍पनाशील और समाज की वास्‍तविकताओं को उजागर करने वाला है। परिदृश्‍य में स्‍थापित अनेक कवयित्रियों का उल्‍लेख करते हुए उन्‍होंने कहा कि जहॉं पहले रचनात्‍मक परिदृश्‍य में स्‍त्रियां बहुत कम भागीदारी करती थीं, आज वे रचना की ओर तेजी से उन्‍मुख हुई हैं। रचना शर्मा इस क्षेत्र में तेजी से पहचान बनाने वाली कवयित्री हैं जिनका मुहावरा आज भले ही समकालीन कवयित्रियों से थोड़ा अलग हो किन्‍तु रचने की निष्‍ठा और अभिव्‍यक्‍ति को निरंतर पैना बनाने की चेष्‍टा उनमें भरपूर है।

रचना शर्मा के कविता संसार पर बोलते हुए काशी विद्यापीठ की कला संकाय की अध्‍यक्ष प्रो.मंजुला चतुर्वेदी ने इन कविताओं को स्‍त्री-मन का आईना बताया तथा कहा कि इन्‍हें पढते हुए हर स्‍त्री अपनी भावनाओं की लहरों में संतरण करेगी। इस अवसर पर आज के स्‍त्रीसमय पर विचार व्‍यक्‍त करते हुए काशी प्रतिमान के संपादक डॉ.सुरेश्‍वर त्रिपाठी ने कहा कि आज फेसबुक, इंटरनेट एवं अभिव्‍यक्‍ति के आधुनिकतम प्रसार माध्‍यमों के कारण स्‍त्रियां तेजी से लेखन में अग्रसर हुई हैं तथा वे वैचारिक विषयों में गहराई से हिस्‍सेदारी कर रही हैं। उन्‍होंने रचना शर्मा की कविताओं के प्रति आश्‍वस्‍ति जाहिर करते हुए उन्‍हें भविष्‍य की एक परिपक्‍व कवयित्री बताया। समाजसेवी घनश्‍याम तिवारी ने इन कविताओं की मानवीय पृष्‍ठभूमि को जीवन के सतत उन्‍नयन में उपयोगी बताया । इस अवसर पर अन्‍य वक्‍ताओं में प्रो.युगल किशोर मिश्र, डॉ. झूरी,राजीव द्विवेदी एवं डॉ.वी पी तिवारी ने भी अपने विचार व्‍यक्‍त किए। समारोह में दानिश, केशव शरण, डॉ.अत्रि भारद्वाज,डॉ. रामाधीन शुक्‍ला,डॉ.श्रीनिवास ओझा, श्री दीनानाथ झुनझुनवाला,डॉ.विमला चरण पांडेय, प्रो.तोमर, श्री राजेशअग्रहरि, डॉ.रामाधीन शुक्‍ला, कलाकार महेश खन्‍ना, डॉ.आत्‍मप्रकाश, डॉ.दिनेश चंद्र,डॉ.आर के शर्मा, आलोक विमल एवं सैकड़ों की संख्‍या में गणमान्‍य नागरिक, विद्वतजन व पत्रकार उपस्‍थित थे। धन्‍यवाद ज्ञापन पिल्‍ग्रिम्‍स पब्‍लिशर्स के श्री रामानंद तिवारी ने किया। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन सुपरिचित कवि-आलोचक डॉ.ओम निश्‍चल ने किया। 

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