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''मसल कर फूल हाथों से चमन की बात करते हो'' Vaya बूंदी,राजस्थान

Written By Manik Chittorgarh on मंगलवार, दिसंबर 25, 2012 | मंगलवार, दिसंबर 25, 2012


''इण्डिया गेट पर कैसा है मोसम का 'बे' हाल......’’
  
हिंदी साहित्य समिति की और से बूंदी में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमे वर्तमान परिस्तिथियों पर एक से बढ़कर एक रचनाओं ने अभिभाषक भवन को गुंजायमान कर दिया. मुख्य अतिथि पुरुषोत्तम पंचोली ने दीप जलाकर गोष्टी का आरंभ किया. अध्यक्ष और हाइकू कविता में सिद्धहस्त रामस्वरूप मूंदड़ा ने समिति के इतिहास और उद्देश्यों पर प्रकाश डाला और ''मसल कर फूल हाथों से चमन की बात करते हो'' जैसी सामयिक और सरस रचनायें सुनाई. विशिष्ट अतिथि डॉक्टर ललित भारतीय ने देहली विक्टिम पर अपनी नवीन आधुनिक कविता ''इण्डिया गेट पर कैसा है मोसम का 'बे' हाल... तापमान है बाहर १० डिग्री....अन्दर लगी हुई आग'' को ओजपूर्ण शैली में सुनाकर सबको प्रभावित किया. विशिष्ट अतिथि डॉक्टर मणि भारतीय ने बुलंद आवाज में ''जलाये दिए पर जलाये कहाँ  है मेरे गाँव अब तक अँधेरे पड़े हैं '' सुनाई.

हाडोती के वरिष्ठ कवि देशबंधु दाधीच ने काव्य गोष्ठी का सञ्चालन किया और कन्या भ्रूण हत्या पर सारगर्भित रचना सुनकर भाव विभोर कर दिया. गुलाब पंचाल ने ''दो कनक कटोरा झलक भरे'' , भवानंद निषाद ने ''जो दिखता है वो लिखते है जो चुभता है वो लिखते है'' , रियाजुद्दीन ने ''खंजर को कुंद कर सके वो सर खरीद लीजिये'' पीयूष पाचक ने ''बजा दो वही बंशी की तान'', हरक भंसाली ने ''बुद्धिजीव भी बुद्धिहीन हो गए भ्रष्ट आचरण में लीन हो गए'' ,आर एन राठोर ने ''क्या करेंगे इसे सपने देखकर'', विजयशंकर भुत्तन ने ''गाँधी सुभाष भगत सिंह बिस्मिल राजगुरु आजाद बनकर दिखलाओ'' और प्रकाश कसेरा ने ''लौटना नहीं सरहदों पर जाने दीजिये काफिले वतन के सजाने दीजिये'' कवितायेँ सुनाकर काव्य गोष्ठी को नई परिभाषाएं दी.

तीन घंटे चली इस काव्य गोष्टी में चन्द्रदत्त तृषितजे पी त्रिपाठी, नेमीचंद, चंद्रू चंद्राकर, द्वारिका प्रसाद, रवि प्रकाश ने भी अपनी कवितायेँ पढ़कर दर्शको को तालियाँ बजाने पर मजबूर कर दिया
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