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''भारत की तरह काहिरा में वर्गभेद दिखाई नहीं देता''-डा. खगेन्द्र ठाकुर

Written By Manik Chittorgarh on शुक्रवार, जनवरी 11, 2013 | शुक्रवार, जनवरी 11, 2013


बिहार प्रगतिशील लेखक संघ की ओर से वरिष्ठ आलोचक डा. खगेन्द्र ठाकुर की पछत्तरहवीं  वर्षगाँठ  के अवसर पर एक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस मौके पर उन्होंने अपनी काहिरा (मिस्र) यात्रा के अनुभव सुनाये। डा. ठाकुर ने यात्रा वृतांत सुनाते हुए कहा कि वहां ‘एफ्रो एशियाई राइटर्स यूनियन’ की तरफ से हम गये थे । वहां बीस देशों के साथी आये थे। वहां मिस्त्र में आजादी के बाद काफी परिर्वतन हुए हैं। कॊमनवेल्थ से मिस्त्र अलग रहा जिसके कारण वहाँ अंग्रेजी  भाषा का वर्चस्व समाप्त हो गया। क्रिकेट की जगह फुटबाल में लोगों की दिलचस्पी है। साथ ही कई अन्य परिवर्तन स्पष्ट परिलक्षित होते हैं। डा. ठाकुर ने आगे कहा कि वहाँ आज परिर्वतन की हवा तेज बह रही है। उस हवा को भारत में भी बहनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की तरह वहाँ वर्गभेद दिखाई नहीं देता जबकि वहाँ की सभ्यता पाँच हजार साल पुरानी है। 

इस अवसर पर बिहार प्रलेस के अध्यक्ष डा. ब्रज कुमार पाण्डेय ने डा. खगेन्द्र ठाकुर के बहुआयामी पक्ष पर प्रकाश डाला। उन्होंने ठाकुर को एक लेखक के अलावा द्रष्टा, चिंतक और आचार्य भी कहा। इस अवसर पर डा. खगेन्द्र ठाकुर को पुष्प गुच्छ और अंगवस्त्र देकर सम्मानित भी किया गया। डा. ठाकुर ने यात्रा वृतांत के क्रम में लिखी अपनी दो कविताएं - ’हवाई अठ्ठा’ एवं ’पिरामिड’ का पाठ किया। कार्यक्रम में आरा से प्रकाशित ‘देशज’ एवं खगडि़या से प्रकाशित ‘अवाम’ पत्रिका के नये अंको का लोकार्पण भी किया गया। 

केदार भवन, अमरनाथ रोड के सभागार  में आयोजित इस कार्यक्रम में बिहार के विभिन्न जिलों और क्षेत्रों से आये लेखकों, कलाकर्मियों, सांस्कृतिकर्मियों की भारी भीड़ थी। कार्यक्रम को बिहार प्रलेस के महासचिव राजेन्द्र राजन कथाकार संतोष दीक्षित, कवयत्री पूनम सिंह, रानी श्रीवास्तव, कवि शहंशाह आलम, अरविन्द श्रीवास्तव, राजकिशोर राजन, अरुण शीतांश, रमेश ऋतंभर, डा. धर्मेन्द्र कुंवर, जनार्दन मिश्र, दशरथ प्रजापति, कृष्ण कुमार, विभूति कुमार, संतोष श्रेयांश, रामयतन यादव , महेन्द्र नारायण पंकज आदि ने भी संबोधित किया। 
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