राष्ट्रीय मतदाता जाग्रति दिवस - अपनी माटी

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शुक्रवार, जनवरी 25, 2013

राष्ट्रीय मतदाता जाग्रति दिवस


राष्ट्रीय मतदाता जाग्रति दिवस 
उदयपुर। 25 जनवरी 2013। 

प्रजातन्त्र में मताधिकार सबसे अधिक महत्वपुर्ण है तथा नागरिकों के सरकार से जुडने का माध्यम है। पश्चिमी देशों में मताधिकार लम्बी लड़ाइयों का परिणाम रहा है किन्तु भारत में सभी वयस्क नागरिकों को यह अधिकार संविधान के लागु होने के साथ ही मिल गया। उक्त विचार राजनीति शास्त्र के पूर्व विभागाध्यक्ष एवं कोटा वि.वि. के निदेशक प्रो. अरूण चतुर्वेदी ने डॉ. मोहनसिंह मेहता मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा आयोजित ‘‘राष्ट्रीय मतदाता दिवस वार्ता’’ में व्यक्त किये। प्रो. चर्तुर्वेदी ने आगे कहा कि हमारा मतदाता हर प्रकार के अभाव व वंचनाओं से ग्रसित है और इसके आगे हर तरह के प्रलोभन और चुनोतियॉ है जिसके प्रति मतदाता को हमेशा सजग व सचेत रहना पडेगा। 

लोक शिक्षण संस्थान के पूर्व निदेशक सुशील दशोरा ने कहा स्वन्तत्रता प्राप्ति के पश्चात वयस्क मताधिकार देकर नागरिकों को सम्मान व शक्ति दी। निरक्षर होते हुए भारतीय जन ने अपनी परिपक्वता अपने मताधिकार का प्रयोग कर सिद्व की है। इसलिए हमारा गणतन्त्र आज सफल है।  विद्याभवन पोलीटेक्नीक के प्राचार्य अनिल मेहता ने कहा कि प्रजातंत्र की मजबुती स्थायीत्व और उसके दीर्घजीवी होने की कूंजी विवेकशील मतदाताओं के कंधे पर है। वर्तमान परिस्थिति में मतदाता को निजहित से उपर उठकर देश हित में मतदान करने की जरूरत है। समाजकर्मी तेजशंकर पालीवाल ने कहा कि आज के दिन हम यह प्रतिज्ञा ले कि सब निष्पक्ष जागरूक और हर प्रकार के प्रलोभनों से दूर रहकर मतदान करेंगे और प्रजातांत्रिक प्रक्रिया को अपने विवेक से आगे बढायेंगे। 

ट्रस्ट सचिव नन्दकिशोर शर्मा ने बतलाया कि लोकतंत्र की मजबूती  के लिए स्वार्थरहित होकर धर्म, मजहब, जाति-समुदाय से उपर उठकर संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों का निश्चित उपयोग भारतीय लोकतंत्र को मजबुती प्रदान करेगा। मतदाता दिवस पर सभी मतदाताओं को प्रजातंत्र की मजबूती के लिए अपनें नागरीक दायित्वों की पूर्ति के लिए मतदान करने एवं अन्य मतदाताओं को निर्भीक मतदान के लिए प्रेरित करना होगा तभी इस दिवस की सार्थकता होगी। संयोजन करते हुए युवा समाजशिल्पी नितेश सिंह कच्छावा ने कहा कि प्रजातंत्र को सफल एवं चीरस्थायी बनाने के लिए संविधान द्वारा प्रदत्त मतदान के अधिकार का उपयोग देशहित में करना चाहिए। 

नितेश सिंह कच्छावा

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