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कबीर कभी अकेले नहीं थे:डॉ पुरुषोत्तम अग्रवाल का घंटेभर उदबोधन

Written By Manik Chittorgarh on रविवार, जनवरी 27, 2013 | रविवार, जनवरी 27, 2013

(विभिन्न ब्लॉग और वेबसाईट पर चहल कदमी करते हुए हमें डॉ पुरुषोत्तम अग्रवाल की साईट पर ये अमोल वीडियो हमें मिला,सोचा आपके लिए साझा किया जाना चाहिए। ताकि कबीर जैसे फकीराना अंदाज़ को हम सभी ज्यादा गहरे में जान सकें।-सम्पादक )

 4 फरवरी 2011 को मुबई में दिए उदबोधन के अंश 
  1. कभी समय निकाल कर उन्हें भी सुने जो हिन्दी,अंगरेजी और संस्कृति नहीं जानते हैं। कभी भोजपुरी,मराठी और मैथिल बोलने वालों के पास कुछ समय बिताएं।
  2. ग्रामीण परिवेश जैसे ही माहौल के आसपास कहीं कबीर मिलते हैं। 
  3. कबीर के समय को फिर से देखा और पढ़ा जाना चाहिए। 
  4. कबीर की ऊँचाई थाह पाना वैसे बेहद कठिन हैं। 
  5. कबीर अपने विचारों के कारण हमेशा चर्चित ही रहे हैं।
  6. विडंबना तो ये है कि हम कबीर की कविता पढ़ने के पहले ही आलोचकों के विचार पढ़ लेते हैं। जो गलत है।
  7. किम्वदंतियों के शाब्दिक अर्थ में जाने के बगैर उनके निहितार्थ समझने की ज़रूरत है।
  8. कबीर जैसे लोग कभी भी हाशिये की आवाज़ नहीं कहे जा सकते हैं।
  9. अपने अनुभव और विवेक की कसौटी पर हमें सुनना और समझना चाहिए।
  10. गुंडागिरी से ज्यादा मुझे गुंडागिरी को वीरता माने जाने पर दुःख होता है।
  11. महात्मा गांधी जी कहते थे गुंडे आकाश से नहीं टपक पड़ते हैं।
  12. अपराध को सामाजिक स्वीकृति देना बड़ा पीड़ादायक है।
  13. कबीर के घर में 'प्रेम' केवल भावना नहीं है।
  14. इतिहास की अपनी राज्य सत्ता होती है।
  15. कबीर ने 'स्त्री' के बारे में भी बहुत कुछ गलत-सलत कहा है।
  16. कबीर केवल लठ्ठ लिए ही खड़े नहीं रहते थे।
  17. क्या आज के इस वैश्विक समय में 'प्रेम' की ज्यादा ज़रूरत है।
  18. कबीर बुनियादी तौर पर व्यक्तित्व की खोज के कवि हैं।





डॉ.पुरुषोत्तम अग्रवाल
कवि और लेखक 
संघ लोक सेवा आयोग के सदस्य 
लोकप्रिय विश्वविद्यालय जे.एन.यू से शिक्षित/दीक्षित हैं
साहित्य जगत का एक जानामाना नाम
'अकथ कहानी प्रेम की' नामक पुस्तक से भारी चर्चा में
मूल रूप से ग्वालियर के  हैं,फिलहाल मुकाम दिल्ली 
ई-मेल  

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