डॉ टी महादेव राव की दो कवितायेँ - अपनी माटी ई-पत्रिका

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका('ISSN 2322-0724 Apni Maati')

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डॉ टी महादेव राव की दो कवितायेँ

                          यह सामग्री पहली बार 'अपनी माटी डॉट कॉम' पर प्रकाशित हो रही है।



उंगलियाँ और सोच
उठती हैं जब तर्जनी
सामने वाले की मीन मेख निकालने
हमें इंगित करती हैं बची हुई तीन उँगलियाँ
तटस्थ अंगूठे के साथ
करने की बजाए हम अपना आत्म विश्लेषण, स्व-समीक्षा
देते हैं क्षणिक संतुष्टि केवल अपने अहम को
जो भर गया नकारात्मक सोच में
अंधकार की तरह मन मस्तिष्क में

निकलना होगा इस तिमिर से अहं को त्याग
तब तक हमारी कुंद सोच को
सामने वाले में दिखेंगी केवल गलतियाँ 
अपनी हजारों होने के बावजूद

अहम के बादलों से घिरे
सकारात्मक सोच के सूरज को
अपने मन से हटाना होगा
मस्तिष्क में स्वच्छ हवा भरनी होगी
तभी सूरज निकलेगा बाहर
खुद को तो प्रकाशित करेगा ही
बाहर भी भर देगा मानवीयता के उजाले को

अलग अलग दिशाओं में
संकेत करती उँगलियाँ
जब मिलकर अंगूठे के साथ
बनाएँगी मुट्ठी
भर देंगी एकता की अद्वितीय शक्ति
जो काम आएंगी नए लक्ष्य पाने में
नए क्षितिज को छूने में


पंचभूत और प्रकृति

प्रकृति और पर्यावरण का अब जाकर हमें हुआ आभास
जब मुश्किलों में आ पड़ी है सारे मानव जाति की सांस

किया है पंचभूतों का हमने सदा लापरवाही से प्रयोग
और कालिख से भर दिया हमने सुंदर नीला आकाश

जीव- प्राण - वायु को करके पूरी तरह प्रदूषित हमने
दूभर कर दिया हर जीवन और तोड़ दी हर आस

विषैले पदार्थों से भर दिया हमने सारे जल को भी
क्यों अपने ही स्वार्थ में हम भूल गए जीवों की प्यास

सस्य हरित धरती की उर्वरकता पर टंगा है प्रश्नचिह्न
ऐसे में कैसे कहें हम खुद को प्रकृति में खास

पंचेंद्रियों के सुख में हम भूले हर अस्तित्व को
करके तहस नहस सरल प्रकृति को,करें अट्टहास

अधिकार है हर जीव को जीने का हमारी तरह
यदि न रखें याद इसे हमें भूलेगा इतिहास


डॉ. टी.महादेव राव
सचि – सृजन

09394290204                              mahadevraot@hpcl.co.in
जन्म21 जून 1958
शि‍क्षा -एम.ए.पीएच.डी (हि‍न्‍दी)एम.ए.(दर्शनशास्‍त्र)।
कार्यक्षेत्र-
कवि‍तालघुकथाकहानीयोंलेखव्‍यंग्‍य तथा समीक्षा सभी विधाओं निरंतर रचनाएँ प्रकाशित। आकाशवाणीके रायपुरअम्‍बि‍कापुर एवं वि‍शाखपटनम केंद्रों से कार्यक्रमों की प्रस्‍तुति‍संयोजन व प्रति‍भागि‍ता। तेलुगु व अंग्रेजी कवि‍ताओं का हि‍न्‍दी अनुवाद वि‍वि‍धपत्र-पत्रि‍काओं में प्रकाशित। तेलुगु के वि‍चारोत्‍तेजक लेखों का संकलन हि‍न्‍दीमें अनूदि‍त एवं कश्‍मीर गाथा के रूप में प्रकाशि‍त। स्‍थानीय कवि‍यों कीकाव्‍य-गोष्‍ठि‍यों का आयोजन व संचालन। अक्‍तूबर 2002 में साहि‍त्‍यसंस्‍कृति‍एवं रंगमंच के प्रति‍ प्रति‍बद्ध संस्‍था सृजन का गठन एवं सचि‍व के रूप में निरंतरअनेक साहि‍त्‍यि‍क संगोष्‍ठि‍यों का आयोजन कि‍या ताकि‍ इस अहिन्‍दी क्षेत्र केहिन्‍दी साहि‍त्‍य प्रेमि‍यों को सशक्त  साहि‍त्‍यि‍क मंच मि‍ले।
प्रकाशित कृतियाँ-
जज्‍बात केअक्षर (गजल संग्रह)कवि‍ता के नाट्य-काव्‍यों में चरि‍त्र-सृष्‍टि‍ ( शोध प्रबंध)वि‍कल्‍प की तलाश में (कवि‍ता संकलन),चुभते लम्हे (लघुकथा संग्रह) के साथ साथ तेलुगु के वि‍चारोत्‍तेजक लेखोंका संकलन हि‍न्‍दी में अनूदि‍त एवं कश्‍मीर गाथा के रूप में प्रकाशि‍त।
संप्रति‍- हि‍न्‍दुस्‍तानपेट्रोलि‍यम कॉर्पोरेशन लि‍मि‍टेडवि‍शाख रि‍फाइनरी में उप प्रबंधक -राजभाषा केरुप में कार्यरत।

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