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मालवी नानी बारता (मालवी में लघु कथाएँ )/ राजेश एस. भंडारी "बाबु"

Written By Manik Chittorgarh on शनिवार, जनवरी 05, 2013 | शनिवार, जनवरी 05, 2013

                          यह सामग्री पहली बार 'अपनी माटी डॉट कॉम' पर प्रकाशित हो रही है।


 तमने नी मारी गम तो आंगने उबा जम
एक गाम में एक दुकानदार रेतो थोलछ्छोवैसे उको नाम तो लच्मिनारायण थो पण कई हे के हमारा मालवा में आखो नाम लेवा को रिवाज नी हे हम नाम बिगड़ी के ला हे जैसे बाबु के बबुडो ,राम के रामलो, एसेज लक्च्मी नारायण केलछ्छो”| दुकान कई उमे गाम की हर जरुरत को सामान मिलतो थो |जरुरत भी कई साबू सोडो ,बिटको मंजन ,बीडी ,तमाखू,नास्का, ने छोटों मोटो परचून को समान | साइकल को पंचर,गाम को लोग चद्दी,पाईजमा,काचली,पर्कुल,बंडी भीलछ्छो बनातो थो |गाम में शादी ब्याव में गैस बत्ती ने टेंट भी लगे देतो थो |

उकी बैरा थोड़ी घनी पड़ी लिखी थी ने घणी तेज टर्राट थी उके रोज सेर ली जाने की कोशिस करती रेती थी घूमने फिरने की शोकीन जो थी | एक कावा वा ““लाछाके ली के सेर जय री थी रास्ता में एक कुवा पे बैठी के दोई जाना सिरावानी करी रिया था के उनी बइरा का मन में पाप आयो ने उनेलछ्छोके कुवा में धक्को दी दियो ने गाम में पाछइ आई गी ने सब के बोली के वि तो बद्रीनाथ गया हे तीरथ करवा सारु | तोलछ्छोके तिरनों ऑतो थो तो तिरी के जैसे तेसे बायर निक्ल्यो ने घरे पोच्यो | उने एक सारु घर में कोई के कई णी कियो ने कोई के डाटयो भी नी | उनकी घर में शांति हुई गी ने थोडा दन में उका घरे एक सुन्दर सो छोरो हुयो |
लछ्छोखूब लाड से छोरा के राखतो ने राजी खुशी से घर रोज यो  गीत गातो :

हम ने मारी गम ,तो बेटा हवा तम ,
हम ने मारी गम ,तो बेटा हवा तम “,

सगळा लोग उस से पूछता के एको मतलब कई होय तो कोई के कई नी केतो पण उकी बइरा सब समजी जाती ने मनेज मनेज मन आदमी की इज्जत करती |क्योकि उके मालम थो के कुवा में धक्क्को देवा का बाद भी उणा आदमी ने गम खाई (सहन कार्यों ,धेर्य राख्यो ) जी को नतीजो हे के सब ठीक हुई ग्यो हे |

टेम बीतने लाग्यो ने छोरो की उमर बडवा लगी |छोरा की संगत गाम का खराब छोरा होन का साते हुई गी | उके पैसा कोड़ी की तो कई दिक्कत थी नी एक सारु उको हाथ खर्चा करने में भी चलने लागियो | अबे छोरो बिगड़ी ग्यो ने दारु पीवा लागी ग्यो ने रोज गाम का आवारा छोरा होन का साते रोज नवा नवा उतापा करवा लगी ग्यो |जुवा ,सटटा में पैसो बर्बाद करवा   लागी  ग्यो |उकी माँ ने छाने छाने पैसा दी दी के उकी आदत बिगाडी दी |“लछ्छोउके खूब सम्जातो पण उकी माँ का लाड प्यार ने छाने छाने पैसा दी दी के उको दिमाग खराब करी दियो| “लछ्छोउके रोज सम्जातो ने रोज घर का बाहर बेठी के गातो :

हम ने मारी गम ,तो बेटा हवा तम ,
हम ने मारी गम ,तो बेटा हवा तम “,

पण  उणा छोरा के कई समज में णी आई री थी ने दने दन वो और बिगड तो जय रियो थो |रोज नवा नवा उतापा करतो ने दारू पीतो ने जुवा सटटा में खूब पैसा खराब करतो रियो |आवारा छोरा होन भी उका पैसा सारु रोज उका आगे पाछे फिरता रेता ने पैसा खरच करवा का नवा नवा रास्ता उके बताता |एक दन उने गाम की एक छोरी से कुकर्म करी ड्यो ने उका बाप ने पुलिस के खबर करी दी अबे पुलिस आई गी
नेलछ्छोखूब दुखी हुयो ने गावा लागियो :

हम ने मारी गम ,तो बेटा हवा तम ,
हम ने मारी गम ,तो बेटा हवा तम “,
अबे तमने नी मारी गम तो आग्ने उबा जम “||

  जम (पुलिस ) थारे जेल ली जावेगा | जो गानों हु गातो थो उको मतलब हे के जदे थारी माँ ने म्हारे कुवा में फेकी दियो तो भी म्हने गम खाई (धेर्य राख्यो ) जीको नतीजो यो हुवो के तम हमारा बेटा हुवा  पन तमने गम नी खइ (धेर्य णी राख्यो ) तो नतीजो सामने हे जम (पुलिस ) घर का बाहर उबी हे जो तमके अबे जेल में बंद करेगी |
  
भादरियो

उका बाप ने उको नाम बड़ा लाड़  से नाम कुवर बहादुर सिंग ठाकुर राख्यो थो | कुवर बहादुर सिंग ठाकुर के आखा गाव का लोग भादरियो केता था| हमारा मालवा मे आखो नाम लेवा को रिवाज नी हे | हम नाम बिगाड़ी केज लेवा हा | जैसे बाबू के बाबूडो ,राजेश के राजेषो ,राम के रामलो,गिरीश के गिरिसो | भादरिया को नाम भी एसेज पडियो | घर मे ने नातेदारी मे भी भादरियो केवावा लागि ग्यो| जदे उको ब्याव हुओ तो उका सासरा का लोग भी उके भादरजी केवा लागिग्या | बहादुर सिंग तो स्कूल की दूसरी कक्छा  तक चल्यो आगे भनवा को तो सवालज पेदा ने होतो |

भादरियो आखा गाव मे भोलो भालो मान्यो जातो थो ने आखा गाव का लोग उके लाड़ करता थाबडो हुयो तो उका बाजी ने उके 10-15 भेस खरीद दी आबे उनके चरावा को, नवाने धोवाने को, चारो बाटो करवा को ,दूध काडवा को, दूध मापने को, सागलो काम भादरिया के सोपी दियो ने खुद हतई  मे बैठी के चिलम सुते  | बापडो सवेरे 4 बजे से उठतो ने बाटो मेलातो ने भेस होन को दूध काडतो ने बंदी वाला के नापतो | दूधवालो चाय जदे मावा के कड़ाई ली  के बेठि जातो ने बिचारा भादरियो का पैसा काट देतो फिर भी भादरियो सबेरे से भेस छोड़ी के चरावा निकली जातो |उकी बाई उके सीरवणी कराती ने दफोर सारू गोल ने जुवार के रोटी ने लसन की मिर्ची एक कपड़ा मे बंधी के दई देती |बस फेर भादरियो ने वीभेस , गोया गोया ,काकड़ काकड़ , माल मे भेस चरातो | चार बजे फिर हे उज् दूध निकलवा को काम

एक दिंन पास का गाव से उको रिस्तो आयो | उका बा ने आव देख्यो ने ताव ने उको ब्याव पक्को करी दियो ने फिर बियाव को टेम  आयो | भादरियो बिचारो लाडी के देखवा सारू छटपटाई रियो थो |उणे धीरे से काकाजी से बोल्यो के काकाजी म्हारे एक बार छोरी के देखवा तो लेतो | काकाजी ने उके एसो डॅटीयो के बापडो फिर से बोली नी पायो |काई हम थारा सारू गेली छोरी लवागा |अरे तू एतरो बडो हुए गयो के हमारी बात नी सुनेगो ने तू एतरो बेसरम हुई गयो हे के छोरी देखवा जावेगो रिश्तेदारी में हमारी नाक कतवेगो , काई तू सेर सेआयो हे ,काई तू एम / बी करी  के आयो हे ,बाप दादा को नाम लाजवावेगो | डाट डपत करिके बिचारा के चुप कर दियो | पंद्रा दन पेला से उके लाडो बनाई दियो |खोल्या मे एक सुपारी को कॅटको छोटो सो सरोतो ,सॉफ ने दाख हमेसा रेती थी |

कोई भी मिलतो सुपारी कटवा लगी जातो | एक पीला रंग को कुरतो पूरा 14 दन तक पेरी राख्यो ,रोज हल्दी लगाई के वि कपड़ा पेरी लेतो |फिर उक उगलई के गोडा पे बेठायो ने माथा पे खोड्या को सेरो बान्ध्यो | आखा गांम् मे खाली पटेल बा का या  घोडो थो सगला ब्योव योज घोडो करतो थो | बारात मे 4-5 छकडा गया ,गांम् का जाण्या पिचानिया लोग ब्ररात मे गया | खूब दारू पी ने लादी लय के आई ग्या लाडाके नवी धोतीने नवी कमीज़ पेरीने बापडा का नवा जुता लानो तो भूलीग्या जुनी चमारी  पनी पेरी केज उका लग्न हुई ग्या नवी लाडी के सब अछो लागियो पर उके भदरिया को भेस च्ररावा को काम अच्छो नी लागियो लाडी 11किताब बणी थी |बापडो भदरियो दुखी रेवा लागियो उकी लाडी बोली के तमा तो भेस बेचो ने अपन तो सेर चला वा नोकरी मिली जावेगी आबे बापडो भदरियो परेशान काई करे सोच्यो के भेस बेची दी ने नोकरी नी मिली तो काई होगो |बड़ा बूड़ा की राय ली सबने समझायो के गेल्या भेस बेची के या लाडी थारा पाईसा खर्च हुई जावेगो फिर तूतो सड़क पे आई जावेगो | आबे भदरियो परेशान के काई करे | लाडी का केवा मे आई के भेस बेची दे तो काई मालम् नोकरी मिलेगी भी के नी

लाडी उके रोज टाचे | आबे भदरियो आई देखे तो कूवो ने आई देखे तो कराड | नी तो उको मन भेस चरावा मे लगे ने नी लाडी से बोले |आखा टेम सोचतो रेवे |आई उकी लाडी ने रंग दिखायो ने वा रोज हबेरे मोडी उठे ने काई काम ने करे | नी तो गोबर सोरे ने निज कंडा थापे |रोज नवी नवी चीज मांगेन्ररा द्नन्न तक एसोज़ चालतो रियो पर भदरिया ने नी तो भेस बेची ने नी घर छोड़यो | एक  दिंन माल म्पड़यो के उकी लाडी पास एक हली का छोरा का साथ भाग सेर भाग गई | भदरियो फिर से एक्लो  र्री  ग्यो | आई उका   को भी ब्योव हुई गयो |छोटा की लाडी बापडा भदरिया के रोटी भी नी दे | एसा मे भदरियो बीमार रेवा लगी ग्यो ने कमजोर हुई ग्योउनाज गाँव की एक छोरी  विधवाहुई गई थी जो हाली की छोरी थी | गाँव का पटेल ने दुई को ब्योव करायो ने दोई आबे  अपनी गिंदगी गुजरवा लागि ग्या |

 काम्बला को टुकड़ों

एक गाव में एक डोकरो रेतो थो | उका परिवार में एक छोरो उकी बाईरा ने एक पोतो ने एक पोती रेता था | जद तक डोकरो काम करतो रीयो सब मजा से चलतो रीयो | छोरा की बइरा खूब काम निकलवाई लेती थी बाबूजी बाबूजी करी के |एक दन डोकरा की तबियत खराब हुई गी | उके सेर का अस्पताल में भरति कार्यों ने ठीक हुई ग्यो पन उके घना पैसा लगी ग्या |घरे आने का बाद भी दवाई दारु पे खर्चो हुई रीयो थो |बुडा बाबा का खर्चा पे घर में तनाव रेवा लाग्यो | अबे उके ली के सब लोग  घरे तो आई ग्या पन उणा छोरा के उकी बईरा रोज ताना मारे ने घर का बिना काम का खर्चा सारु भी दबाव बनावे ने केवे के  सब पैसा तो बाप का इलाज में लगई दिया अबे हमारे ने छोरा छोरी के कई खिलाव्गा | छोरो परेशान रेवा लाग्यो , ने एक दन दोई धनि बइरा ने प्र्रोग्राम बनायो के इना बाजी के एक कम्बल में बाँधी के कई पहाड पे छोड़ी आवा |

वा जीतरा दन जीवेगा तो जीवेगा नी तो जानवर खाई जावेगा | ने उनने डोकरा का बांधने सरू एक कम्बल लाया | तो उकी बइरा बोली के आखो कम्बल क्यों खराब करो एका दो टुकड़ा करी लो आधा मेज काम हुई जावेगो | यो सब डोकरा को पोतो भी देखि रीयो थो | पोता ने आधो कम्बल को टुकडो ली लियो ने संदूक में बंद करी दियो | यो सब देखि ने दोई धनि बाइरा ने उससे पूछ्यो के नाना यो आधो कम्बल क्यों छिपई रीयो हे तो छोरो बोल्यो बापू जदे तम दोई जाना भी ऐसा हुई जव्गा तो फिर म्हारे भी तो कम्बल को टुकडो लगेगो तमारे बांधने सारु ,जदे हु कासे लवंगा नवो कम्बल ,इनाज काम्बला का टुकड़ा मेज तम दोई जाना के भी हु बाँधी के असेज पहाड पे छोड़ी के आवांगा | जो तम म्हरा दादा जी का साथै करी रिया हो उज तो हु भी तमारा साथै करूँगायो सुनी के दोई के साप सूंघी ग्यो ने अपनी गलती को एहसास हुवो |


राजेश एस . भंडारी "बाबु"

104, महावीर नगर, इंदौर

फ़ोन 9009502734
rb@indoreinstitute.com


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