कथनी, करनी और लेखनी में समान दिखे ‘वनमाली' - अपनी माटी ई-पत्रिका

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका('ISSN 2322-0724 Apni Maati')

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कथनी, करनी और लेखनी में समान दिखे ‘वनमाली'


वनमाली शताब्दी प्रसंग

अपने उसूलों और आदर्शों की बुनियाद पर काबिल शिष्यों की पीढ़ियों को सँवारने वाली गुरू विभूति के अक्स जब खंडवा के रंगमंच पर रौशन हुए तो इस दिलचस्प नजारे को निहारती आँखें श्रद्धा से नम हो उठीं। म.प्र. के शैक्षणिक-साहित्यिक अतीत में सुनहरा अध्याय जोड़ने वाले स्व. जे.पी. चौबे ‘वनमाली‘ के कहे, लिखे और जिये हुए अनुभवों का सार सँजोये भोपाल के नाट्य समूह ‘रंगशीर्ष‘ के अदाकारों ने लगभग डेढ़ घंटे की रोचक प्रस्तुति को एक जीवंत दास्तान की तरह पेश किया। वनमाली जन्मशताब्दी प्रसंग के निमित्त हुए ‘कर्मयोगी‘ नाट्य रूपक के इस विशेष मंचन के साक्षी बनने शिक्षा, संस्कृति, साहित्य और कला जगत के गणमान्य जनों के अलावा कलाप्रेमी  समुदाय भी गौरीकुंज सभागार में खिंचा चला आया। इस अवसर पर वनमाली सृजन पीठ और सांस्कृतिक पत्रिका ‘रंग संवाद‘ की ओर से स्व. चौबे के सहकर्मी रहे शिक्षकों का सम्मान उनके छात्रों ने किया।

सृजन पीठ के समन्वयक और ‘रंग संवाद‘ के संपादक विनय उपाध्याय ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि खंडवा वनमालीजी के पुरुषार्थी जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव था, जहाँ उन्होंने अपने शिक्षकीय जीवन का गौरवशाली वक्त गुजारा। उनकी स्मृति को स्थायी धरोहर बनाने के लिए खंडवा में रचनात्मक महत्व की कई गतिविधियों का विस्तार किया जाएगा। समारोह में श्री उपाध्याय द्वारा संपादित और डॉ. विद्यानिवास मिश्र से सम्मान पुरस्कृत पत्रिका ‘रंग संवाद‘ के नए अंक तथा वनमालीजी की धर्मपत्नी स्व. शारदा चौबे द्वारा संकलित पारंपरिक भक्ति पदों के सीडी अलबम का लोकार्पण भी किया गया। नट निमाड़ रंग समूह के स्थानीय सहयोग से आयोजित प्रसंग में ‘बिंब-प्रतिबिंब‘ शीर्षक छाया प्रदर्शनी ने अनूठा आयाम जोड़ा।

समारोह उस समय भावभीना हो उठा जब वनमालीजी के सहकर्मी शिक्षकों जी.एस. गौर, जी.एम. जोशी, एन.एस. वर्मा, रियाजुल हमीद, एम.आर. मंडलोई, कैलाश मालवीय आदि का पूर्व छात्रों महेन्द्र हूमड़, प्रदीप अग्रवाल, शरद जैन, सुभाष जैन, आलोक सेठी ने शॉल, श्रीफल, गुलदस्ता और प्रतीक चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया।उल्लेखनीय है कि सभी सम्मानित शिक्षक 1955 से 1966 के दौरान शासकीय बहुउद्देश्य उच्चतर माध्यमिक शाला खंडवा में स्व. जे.पी. चौबे वनमालीजी के अधीनस्त कार्यरत रहे। इन शिक्षकों ने भी आदर्श शिक्षक की परंपरा का पालन कर काबिल शिष्यों की पीढ़ियाँ तैयार कीं।

गौरीकुँज सभागार में मौजूद खंडवा के सैकड़ों कलाप्रेमियों ने वनमाली के जीवन और सृजन को ‘जिल्दसाज‘, ‘ट्रेन का डिब्बा‘, ‘आदमी और कुत्ता‘ जैसी रोचक और प्रेरक कहानियों के जरिए जाना। ‘रंग शीर्ष’ के कलाकारों ने प्रसिद्ध रंगकर्मी संजय मेहता के निर्देशन में इन्हें मंच पर उतारा।इस अवसर पर ‘नट निमाड़‘ के अध्यक्ष शरद जैन और वनमाली परिवार की ओर से संतोष कौशिक, प्रशांत सोनी, सौरभ अग्रवाल, मोहन सगोरिया आदि ने कलाकारों तथा अतिथियों का स्वागत किया। समारोह का संचालन कला समीक्षक विनय उपाध्याय ने किया।

वनमाली सृजन पीठ द्वारा जारी

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