जिंक नगर के एक्जुकेटिव क्लब में कवि गोष्ठी - अपनी माटी ई-पत्रिका

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका('ISSN 2322-0724 Apni Maati')

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जिंक नगर के एक्जुकेटिव क्लब में कवि गोष्ठी


चित्तौड़गढ़ 1 फ़रवरी 2013 

जानेमाने कथाकार और गीतकार स्वयं प्रकाश और हिन्दुस्तान जिंक के लोकेशन हेड विकास शर्मा के मुख्य आतिथ्य में एक फरवरी की शाम जिंक नगर के एक्जुकेटिव क्लब परिसर में एक कवि संगोष्ठी संपन्न हुई। अतिथियों का स्वागत और अभिनन्दन जहां क्लब के वरिष्ठ पदाधिकारी संजीव कुमार सिन्हा व सचिव कैलाश चान्दे ने किया वहीं लोकेशन एच. आर. हेड संजय शर्मा ने अतिथियों का विस्तार से जीवन परिचय दिया। इम्पीरियल क्लब के सचिव जी. एन. एस. चौहान के संचालन में हुई इस गोष्ठी के बहाने नगर और कोलोनी के कई नए और जमे हुए कवि सामने आये। काव्य गोष्ठी में जिंक के कर्मचारी व परिजनों ने भी काव्य पाठ किया जिसमें दिलीप गांधी का बेटी विषयक गीत सहित श्रीमती पायल, चेतन, आर. पी. जैन, सुनील कुमार दाधीच, सुरभि बाफना व जिंक के लोकेशन हेड विकास शर्मा ने समाज व देश की ज्वलंत समस्याओं पर केन्द्रित अपनी कविताओं का प्रस्तुतीकरण किया।

गोष्ठी में युवा कवि और उदघोषक विपुल शुक्ला की प्रगतिशील रचनाएं भी सभी ने खासकर सराही। आयोजन में राजस्थानी गीतकार सोहन लाल चौधरी ने लडवण चली ससुराल जैसी रचना से और राष्ट्रीय गीतकार रमेश शर्मा ने घर का परिचय जैसे अपने नए और यथार्थपरक गीत से समकालीन स्थितियों पर कटाक्ष किये। 

उन्होंने पूरे अभिनय और लयकारी के साथ उनकी प्रतिनिधि गीत सुनाये जैसे हम बंजारे, भारत दुर्दशा, मेरा परिचय। इसके साथ ही उन्होंने मेघराज मुकुल की राजस्थानी कृति सेनाणी का गोपाल दास नीरज कृत हिन्दी अनुवाद भी सुनाया।इन गीतों के समय समारोह सबसे ऊँचाइयों पर रहा।भारत दुर्दशा जैसा गीत उनकी ज़बान में एक आम आदमी की आवाज़ है।ये गीत जाने कब लिखा गया मगर आज भी समकालीन लगता है और तब तक समकालीन ही रहेगा जब तक हम नहीं जागेंगे ।पैसे के आगे एक आदमी किस कदर छोटा होता जा रहा है इस गीत का ख़ास मर्म है। थोड़े से लोगों ने हमारी संपदा को कब्जा रखा है इस बात का आभास फिर से यहाँ कराया गया है।


मेरा परिचय जैसे गीत के ज़रिये उन्होंने मानववाद की पैरवी की है।आज के दौर में जहां हम जातिवाद,साम्प्रदायिकता में धंसे-फंसे हुए हैं ऐसे गीत बेहद ज़रूरी हुए जाते हैं।आज़ादी के मायने के बरक्श हम किन हालात में जी रहे हैं का बखान करता है ये गीत। इस काव्य गोष्ठी में संभवना के संयोजक डा.कनक जैन, युवा आलोचक डॉ राजेन्द्र कुमार सिंघवी,कोलेज प्राध्यापक डॉ राजेश चौधरी, संस्कृतिकर्मी माणिक,पहल संस्थान के जे. पी. दशोरा,पत्रकार मुकेश मूंदड़ा  मनजीत सिंह ग्रेवाल, प्रकाश बाफना, इन्जीनियरिंग हेड एच.आर. श्रीवास्तव, अनिता शर्मा, संगीता शर्मा, विजयलक्ष्मी श्रीवास्तव, संगीता सिन्हा सहित कई प्रबुद्ध श्रोता उपस्थित थे।

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