रेडियो किसान दिवस आयोजन:आओ जोते खेत ये रचना-फचना छोड़े - अपनी माटी ई-पत्रिका

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका('ISSN 2322-0724 Apni Maati')

नवीनतम रचना

रेडियो किसान दिवस आयोजन:आओ जोते खेत ये रचना-फचना छोड़े

  1. रेडियो किसान दिवस आयोजन
  2. आकाशवाणी चित्तौड़ द्वारा रेडियो किसान पत्रिका का विमोचन 
  3. शीर्षक नागार्जुन की एक कविता से उठाया है 
चित्तौड़गढ़,15 फरवरी,2013 
हमारे देश में हरित क्रान्ति के बाद से लेकर अब तक हमने खाद्यान्न उत्पादन में लगातार वृद्धि करके देश को एक संतोषप्रद स्तिथि में लाने का महत्वपूर्ण कार्य किया है और खुशी की बात ये कि अभी भी हमारा अन्नदाता किसान इसी पथ पर अग्रसर है । एक तरफ हमारा विज्ञान विभिन्न प्रयासों के ज़रिये किसानों तक नया ज्ञान पहुँचा रहा है वहीं दूसरी तरफ हमारे गैर कृषक वर्ग में खेतीबाड़ी के प्रति स्थायी नज़रिए में भी बदलाव आ रहा है। आज का किसान हमारे मानव समाज का बसंत है। उसके पसीने का सही मूल्य हमें मालुम होना चाहिए। अब किसान लिखने पढ़ने लगा है। उन्हें आज के वैश्विक बाज़ार का सही अंदाजा भी होने लगा है। आने वाले वक़्त में भी नई तकनीकों और नवाचारों के बूते ये किसान वर्ग राष्ट्र की उन्नती में पूरी भागीदारी निभाएगा।।

ये विचार आकाशवाणी चित्तौड़गढ़ द्वारा सैंथी स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में आयोजित रेडियो किसान सम्मलेन में विभिन्न वक्ताओं के उदबोधन से निकले। स्वागत उदबोधन केंद्र निदेशक जितेन्द्र सिंह कटारा ने दिया वहीं कार्यक्रम की रूपरेखा आयोजन समन्वयक योगेश कानवा ने रखी। मुख्य अतिथि चित्तौड़गढ़ डेयरी अध्यक्ष बद्री लाल जाट ने अपने उदबोधन में किसानों की पीड़ा को साफ़ ढंग से सामने रखा और कहा कि आगामी समय में किसानों की पेंशन योजना और किसान की बेटी के लिए एफ डी आदि की योजनाएं प्रस्तावित हैं। आकाशवाणी के इतिहास में पहली बार रेडियो किसान पत्रिका का भी विमोचन यहाँ किया गया। विमोचन के बाद कवि और समालोचक डॉ सत्यनारायण व्यास ने कहा कि कविता करना और खेती करना समान है मगर किसान के लिए फसल में पाला पड़ने की पीड़ा के आगे किसी पांडुलिपि को दीपक चाट जाना कोई  बड़ी घटना नहीं है। किसान हमारे राष्ट्र के आधार हैं। उन्हें उपेक्षित करना हमारी बड़ी भूल होगी। मंचासीन अतिथियों में कृषि वैज्ञानिक डॉ मंजू उपाध्याय ने कई सरकारी योजनाओं की जानकारी दी। इसी अवसर पर सालेरा की प्रगतिशील किसान महिला सायरी बाई ने अपने जीवन अनुभव साझा किए।

कार्यक्रम के बीच में कई कलाकारों ने लोक गीतों की प्रस्तुतियों से श्रोताओं का मनोरंजन किया जिसमें गंगरार के गोपाल पांचाल ने मीरा भजन, भगवती लाल सालवी ने म्हारो वीर मेवाड़ी देश म्हाने प्यारो लागे सा, विष्णु भारती गोस्वामी ने रुणेजा रा धणीया, लक्ष्मी कलावंत ने परण्यो एबलो घणो जैसे लोक गीत प्रस्तुत किए। सुबह ग्यारह बजे से शुरू हुआ ये आयोजन तीन घंटे तक इन्ही गीतों के माध्यम से रोचक बन पड़ा। इसी बीच माणिक और जयराज कंडारा ने किसान क्विज प्रस्तुत किया जिसमें प्रश्नों के माध्यम से पंद्रह किसान विजेताओं को पुरस्कार दिए गए।

रेडियो किसान समारोह का संचालन किरण आचार्य और देवेन्द्र पालीवाल ने किया।अतिथियों का माल्यार्पण, पुष्प गुच्छ और कुंकुम तिलक  द्वारा रमेश जुनवाल, एस एस शक्तावत, शैलेन्द्र कुमार, संगीता श्रीमाली, सुनीत श्रीमाली, प्रकाश कंडारा, सीमा जोशी, जयंत कुमार पुर्बिया, महेंद्र सिंह राजावत, अब्दुल सत्तार,कृष्णा मरलेचा  ने स्वागत अभिनन्दन किया। आभार कार्यक्रम प्रमुख चिमाराम ने दिया। इस आयोजन में किसानों के लिए कुछ विज्ञान वार्ताएं भी हुई जिनमें कृषि वैज्ञानिक बच्चू सिंह मीणा, शंकर लाल जाट, कृषि विभाग के उपनिदेशक पी एल मीणा, प्रतिशील किसान चैनसिंह जाड़ावत, श्याम सुन्दर शर्मा ने अपने अनुभव सुनाए। इस समारोह में श्रमिक नेता घनश्याम सिंह राणावत, जी एन एस चौहान, प्रगतिशील किसान जगदीश चन्द्र प्रजापत , स्वतंत्र लेखक नटवर त्रिपाठी, बी डी  कुमावत, रमेश मेहता सहित कई गणमान्य लोग शामिल थे।

योगेश कानवा
रेडियो किसान सम्मलेन आयोजन समन्वयक,
आकाशवाणी चित्तौड़गढ़
मो-9414665936
ई-मेल-kanava_0100@yahoo.co.in

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

ज्यादा जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें

Responsive Ads Here