दो सीधी सादी कवितायेँ और संजीव निगम - अपनी माटी 'ISSN 2322-0724 Apni Maati'

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित ई-पत्रिका

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दो सीधी सादी कवितायेँ और संजीव निगम

                          यह सामग्री पहली बार में ही 'अपनी माटी डॉट कॉम' पर ही प्रकाशित हो रही है।

[1] तुम्हारा प्यार .........

समुद्र का फैलाव है  मेरे सामने ,
पानी है ,दूर दूर तक पसरा 
लगभग अंतहीन सा।
पर,
मुझे नहीं चाहिए तुम्हारा प्यार ऐसा।
समुद्र का फैलाव है  मेरे सामने ,
असीम , अनंत, अगाध,
आँखों में न समा सके सा।
पर ,
मुझे नहीं चाहिए तुम्हारा प्यार ऐसा।
मुझे नहीं चाहिए कोई 
अंतहीन, असीम,अनंत ,अगाध सम्बन्ध 
तुम्हारे साथ।
मुझे चाहिए ऐसी गहराई 
जिसमे उतरा जा सके,
बिना डूबने का डर  लिए।
ऐसी दूरी जिसे आँखों से 
बाँधा जा सके ,
बिना खो जाने  की चिंता लिए।
और ,
एक ऐसी सीमा जिसमे बंध  कर बहती हो 
वो धारा , जिससे मिलता  हो 
एक से दूसरा किनारा .
मुझे चाहिए तुम्हारा प्यार ऐसा,
किसी कल कल बहती,
 नदी का विस्तार हो जैसा।
            

[2]  समरूप - दो रूप -

एक स्त्री और एक पुरुष 
जब चलते हैं जीवन की राहों में बहुत दूर तक,
थाम कर हाथ,
एक दूसरे के साथ,
तब न जाने कैसे -
मिलने लगते हैं उनके चेहरे भी 
एक दूसरे के साथ। 
है ये अचरज की बात।
अलग अलग माता पिता के 
जीन्स से बने दो अलग अलग शरीर,
साथ क्षण बिताते हुए ,
कैसे , किस तरह और कब,
अपने आपको समय के पानी में 
थोडा थोडा घुलाते हुए 
उसे अपना रंग दे देते हैं।
दो छोर - दो किनारे 
जिनसे बहता है  दो तरह का रंगीन पानी,
एक दूसरे की तरफ लगातार बांह पसारे।
पहले एक दूसरे को छूता है,
फिर साथ साथ बहता है,
और फिर यूँ ही साथ साथ बहते 
एक दिन समा जाता है , एक दूसरे में।
मिट जाता है अलग अलग अस्तित्व ,
और दिखने लगता है,
एक सा आकार, एक  सी पहचान।
इस तरह से हो जाते हैं 
एक रूप,
एक स्त्री और एक पुरुष 
जब चलते हैं साथ साथ ,
जीवन की राहों में बहुत दूर

संजीव निगम 

हिंदी के चर्चित रचनाकार.  कविता, कहानी,व्यंग्य लेख , नाटक आदि विधाओं में सक्रिय रूप  से  लेखन कर रहे हैं. अनेक पत्रिकाओं-पत्रों में रचनाओं का लगातार प्रकाशन हो रहा है. रचनाएं कई संकलनों में प्रकाशित. कई सम्मान प्राप्त.कुछ टीवी धारावाहिकों,18  कॉर्पोरेट फिल्मों का लेखन.आकाशवाणी के विभिन्न केन्द्रों से 16 नाटकों का प्रसारण.


मूलतः दिल्ली निवासी पर अब मुंबई में स्थायी निवास. यहाँ की कई साहित्यिक व सामाजिक संस्थाओं से जुड़े हुए.एक राष्ट्रीयकृत बैंक के मुख्य प्रबंधक [मार्केटिंग, प्रचार व जनसंपर्क ] के  पद से स्वेच्छा से त्यागपत्र देकर अब सक्रिय रूप से स्वतंत्र लेखन. विज्ञापन जगत से जुड़े हुए. जनसंपर्क  व विज्ञापन विशेषज्ञ 


डी - २०४,संकल्प-२,पिम्परिपाडा,
फिल्म  सिटी रोड,
मलाड [पूर्व], मुंबई-४०००९७. 
ई -मेल :sanjiv_nigam@yahoo.co.in

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